आक्रामक तेवर में आये प्रमुख सचिव बी.एल.मीणा : तत्कालीन सचिव भूपेन्द्र कुमार को पद से हटाया

द संडे व्यूज़ की खबर का असर

सीएम द्वारा बिठायी गयी जांच में भर्ती घोटाले में भूपेन्द्र कुमार के खिलाफ दर्ज हुयी एफआईआर

सवाल: सपा सरकार में बड़े पैमाने की भर्ती घोटाले के आरोपी पर कुर्सी बदलने की कार्रवाई उचित है ?

सवाल: बेरोजगारों का हक छिनने वाले भूपेन्द्र कुमार के खिलाफ क्यों नहीं हुयी सख्त कार्रवाई ?

सवाल: भूपेन्द्र कुमार पर कार्रवाई के नाम पर नरमी बरतने का दबाव तो नहीं है ?

संजय पुरबिया

लखनऊ। सहकारिता विभाग में प्रमुख सचिव बी.एल.मीणा ने जब कुर्सी संभाली तो इस विभाग के अफसरों के पसीने छूटने लगे। बी.एल. मीणा के आक्रामक तेवर से सभी वाकिफ हैं। अफसरों को मालूम है कि भ्रष्टïाचार की पोल उनके सामने खुली तो फिर उनकी खैर नहीं। प्रमुख सचिव ने आते ही अपना तेवर दिखाना शुरु कर दिया। एसआईटी द्वारा दर्ज एफआईआर में सपा सरकार में हुयी भर्तीे के मुख्य आरोपी उ.प्र. सहकारी संस्थागत सेवा मंडल के तत्कालीन सचिव एवं उ.प्र. कोआपरेटिव बैंक लि. के प्रबंध निदेशक भूपेन्द्र कुमार को आज विभागीय अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित होने तथा चल रही जांच को देखते हुये उनके पद से हटा दिया गया है। भूपेन्द्र कुमार किसी तरह की जांच को प्रभावित ना करे इसलिये उनके पद से हटाकर उन्हें आयुक्त एवं निबंधक सहकारी कार्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया है। उनके हटने से रिक्त पद पर अग्रिम आदेश तक अपर आवास आयुक्त एवं अपर निबंधक सहकारिता आवास एवं विकास परिषद उ. प्र.,लखनऊ को अपने काम के साथ-साथ प्रबंध निदेशक उ.प्र. कोआपरेटिव बैंक लि. लखनऊ का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है।


द संडे व्यूज़ ने फरवरी 2020 में ही सपा सरकार में हुयी भर्ती घोटाले का खुलासा कर दिया था। हमारी टीम ने सहकारिता विभाग में भ्रष्ट अफसरों की चांदी में खुलासा किया था कि भर्ती घोटाले को अंजाम ओंकार यादव,श्रीकांत गोस्वामी, भूपेन्द्र कुमार,धीरेन्द्र सिंह वर्मा सहित वरुण मिश्रा ने दिया था। बता दें कि ये वही भूपेन्द्र कुमार हैं जिनका सपा सरकार में तूती बोलती थी। नियमों को तोडऩा इनकी फितरत बतायी जाती है। उ.प्र.कोआपरेटिव बैंक में की गयी भर्ती घेाटाले में इन्होंने ओंकार सिंह के गुर्गे की भूमिका अदा की थी। भर्ती कराने के समय कम्प्यूटर एजेंसी का चयन करने,अयोग्य अभ्यर्थियों का कैसे चयन किया जाये,जिनके पास डिग्री नहीं हैउसकी फर्जी डिग्री कैसे बनवायी जाये,जो पोस्ट ग्रेजुएट नहीं था उसका चयन कैसे किया जाये,सभी बातों का समाधान भूपेन्द्र सिंह ही ने निकाली।

 

अफसरों की मानें तो 18 नवंबर 2013 को परीक्षा का पेपर बनाने से लेकर कॉपियों को जांचने के लिये कम्प्यूटर कंपनी वंडर पोस्ट क्रिएटिव सल्यूसन लि. विधान सभा मार्ग का चयन भी इन्होंने ही किया। ये वही भूपेन्द्र कुमार हैं जिन्होंने आखिरी समय में उक्तकम्प्यूटर एजेंसी से काम हटाकर अन्य कम्प्यूटर कंपनी डाटा ट्रैक्स कम्प्यूटर सिस्टम लि. को 18 दिसंबर को काम सौंप दिया था। यानि,भर्ती प्रक्रिया को येन-केन तरीके से घोटाले में अंजाम देने वाले यही साहेब भूपेन्द्र कुमार ही हैं। सवाल यह उठता है कि जब जांच में एसआईटी ने खुलासा करते हुये भूपेन्द्र कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी है तो इन्हें उक्त पद से हटाकर मुख्यालय क्यों अटैच किया गया? क्या बेरोजगारों का हक मारने और फर्जी मार्कशिट बनवाने सहित कॉपियों की जांच करने वाली कम्प्यूटर एजेंसी को आखिरी समय में हटाकर दूसरे कंपनी से फर्जी तरीके से काम कराने का आरोप साबित होने क बाद भी इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गयी? सवाल बहुतेरे हैं लेकिन एक बात तो तय है कि प्रमुख सचिव बी.एल.मीणा के आने के बाद भ्रष्टï अफसरों की सांसें हलक में अटक गयी है। देखते हैं आगे-आगे होता है क्या…

Post Author: thesundayviews

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *