कलंकगाथा : डीजी साहेब, एंटी करप्शन ने दूसरी बार दबोचा महाभ्रष्ट अधिकारी सुभाष राम को,कब करेंगे सस्पेंड ?

हे भगवान: ये सरकारी विभाग है या भांग से पटा कुआं,कानपुर के बाद अब बाराबंकी में फंसा भ्रष्ट अफसर सुभाष राम

कानपुर में जब कमांडेंट रहा सुभाष राम रुपये लेते पकड़ा गया, आठ माह जेल,जांच चल रही, हो गया परमोशन ?

बाराबंकी का पूर्व कमांडेंट सुभाष राम बना वसूली मैन: कानपुर में पांच हजार तो बाराबंकी में गबन किया 5 लाख 48 हजार982 रुपये…

पूर्व डीआईजी एस. के. सिंह तो दुनिया से कूच कर गये लेकिन कई बेगुनाहों पर मढ़ गये अपना पाप…

मुख्यालय के गुमनामी कक्ष में एक नहीं,सुभाष राम जैसे अनगिनत महाभ्रष्ट अधिकारियों की दफन है फाईल

सवाल: जब सुभाष राम कानपुर में रंगे हाथ पैसा लेते धरे गये,सस्पेंड हुये,जेल गये, फिर कैसे बनें मंडलीय कमांडेंट

संजय पुरबिया

लखनऊ। नाम सुभाष राम,पद- होमगार्ड विभाग सहारनपुर में मंडलीय कमांडेंट। एंटीकरप्शन का आरोप-बाराबंकी में जब कमांडेंट थे,लखनऊ के हुसैनगंज थाने में होमगार्डों की तैनाती में मस्टर रोल के फर्जीवाड़ा में 5 लाख 48 हजार 154 रुपये का फर्जी तरीके से भुगतान कराया। सुभाष राम सहित 21 लोगों के खिलाफ 10 साल बाद एफआईआर दर्ज। होमगार्ड विभाग का नाम रौशन करने वाले सुभाष राम ने इससे पहले भी विभाग का नाक कटवाने वाला काम कानपुर में किया था। साहेब इतने उतावले रहते हैं कि अपने अवैतनिक,वैतनिक गुर्गों से डंके की चोट पर कहते हैं कि होमगार्डों से माहवारी वसूली में कोई कंजूसी नहीं,जमकर वसूलो…। कानपुर में जब कमांडेंट थे तो कार्यालय में ही 5 हजार रुपये वसूली की रकम लेते हुये सुभाष राम को एंटी करप्शन वालों ने दबोचा और जेल की सलाखों में पहुंचा दिया। साहेब लगभग आठ माह जेल की रोटी खाते रहें और कसमें खाते रहें कि दुबारा मौका मिला तो इससे लंबा हाथ मारुंगा…। कहां कानपुर में 5 हजार की वसूली और कहां बाराबंकी में 5 लाख 48 हजार 154 रुपये की वसूली…। सुभाष राम ने तो अपनी कसम पूरी कर ली वसूली की रकम बढ़ाकर लेकिन दोनों मामलों में देखा जाये तो इनकी हवस को देख कहीं विभागीय अधिकारियों ने फंसाया तो कहीं अवैतनिक कर्मचारियों ने…। बात जो भी होमगार्ड विभाग को शर्मसार करने का एक मामला ठंड़ा पड़ता नहीं की दूसरा उछल जाता है। इस बार 10 साल बाद सरकारी धन को डकारने सहित कई मामलों में एफआईआर दर्ज की गयी है। एक कहावत है ना कि खुद तो डूबेंगे सनम,तुझे भी ले डूबेंगे हम…। साहेब ने काली कमाई तो अपने जेब में डाल लिया लेकिन फंसा गये 21 कर्मचारियों को…। हालांकि कर्मचारियों ने स्वीकार किया उन्हें गुमराह किया गया तो किसी ने कहा रकम कमांडेंट डकार गया और हमलोगों को तो लईया-चना थमा दिया। बात जो भी सुभाष राम अभी तक ना तो निलंबित किये गये और ना ही जेल की सलाखों में…। वैसे भी साहेब किस्मत वाले हैं क्योंकि कानपुर में जब एंटी करप्शन वालों ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया था,वो जांच अभी तक लंबित है। ये भी चलेगा…। अब सवाल यह है कि आखिर होमगार्ड विभाग को भ्रस्टाचार का गोल्ड मैडल दिलाने वाले सुभाष राम को कब निलंबित किया जायेगा।

 


बता दें कि 11 साल पहले हुये फर्जीवाड़े में एंटीकरप्शन टीम ने एक दिन पूर्व खुलासा किया है। बाराबंकी जिला होमगार्ड कार्यालय से कुछ होमगार्डों को लखनऊ के हुसैनगंज थाने में सम्बद्ध किया गया था। इन होमगार्डों के मस्टर रोल से छेड़छाड़ कर फर्जी बिल बाउचर बनाये गये थे। लगभग साढ़े पांच लाख रुपये सरकारी खाते से गायब कर दिया गया था। एंटी करप्शन की इंस्पेक्टर अनुराधा सिंह की तहरीर पर हुसैनगंज थाने में जिला कमांडेंट सुभाष राम सहित 21 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है। बाराबंकी जिला होमगार्ड कार्यालय से कुछ होमगार्डों को हुसैनगंज थाने में तैनाती के लिये भेजा गया था। इनमें से कुछ होमगार्डों के तैनाती के दौरान बिल बाउचर बनाये गये। जनवरी 2010 से दिसंबर 2010 के बीच होमगार्ड स्वयंसेवकों के मस्टर रोल बनाकर 11 लाख 27 हजार 135 रुपये सरकारी खाते ट्रेजरी से निकाल लिये गये। जबकि हुसैनगंज थाने के रिकार्ड में यह रकम आधी यानि 5 लाख 78 हजार 982 रुपये ही दर्ज मिली है। जब इस फर्जीवाड़े की शिकायत की गयी तो जांच एंटी करप्शन से करायी गयी। इंस्पेक्टर अनुराधा सिंह ने अपनी रिपोर्ट एडीजी को भेजी जिसमें 5 लाख 48 हजार 154 रुपये का फर्जी तरीके से भुगतान कराये जाने का मामला सही पाया गया है। एंटी करप्शन की जांच और एफआईआर में कई सवाल उठ रहे हैं। जांच रिपोर्ट पर खुलासा द संडे व्यूज़ पड़ताल के बाद करेगा लेकिन असली सवाल यह है कि भ्रस्टाचार को बढ़ावा देने और सरकार की साख खराब करने वाले सुभाष राम जैसे अफसरों पर विभाग मेहरबानी क्यों बरतता है।

इस बाबत इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडवोकेट गोपाल श्रीवास्तव का कहना है कि जो अफसर भ्रस्टाचार को बढ़ावा दे उसे तो कायदे से बर्खास्त कर देना चाहिये क्योंकि यही लोग दीमक की तरफ विभाग को खत्म करते हैं। कायदे से विभाग को कानपुर में तैनाती के दौरान सुभाष राम द्वारा जो कृत्य किया गया था,उसकी जांच शीघ्र खत्म कराना चाहिये। जब वो रंगेहाथ पैसा लेते पकड़ा गया था तो एंटीकरप्शन आखिर इतना लंबा केस क्यों खिंच रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब इस मामले में एफआईआर दर्ज हो गयी है तो ये साबित होता है कि अधिकारी विभागीय हित नहीं अपना हित साध रहा था। इसमें भी विभाग अपनी नियमावली के तहत सख्त कार्रवाई करे ताकि अन्य अधिकारियों पर इसका असर दिखे।

Post Author: thesundayviews

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