ब्यूरो
लखनऊ । सत्ता के गलियारे में इस कयास के तर्क और आधार कई हैं कि योगी मंत्रिमंडल में जल्द फेरबदल हो सकता है। भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के दौरे ने चर्चा की ऐसी गर्म हवा तेज कर दी है, जो कई मंत्रियों को बेचैन किए है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले संभावित इस बदलाव को मिशन-2022 की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि करीब आधा दर्जन मंत्री उलटफेर से प्रभावित होंगे। कुछ नए चेहरों की एंट्री भी हो सकती है।

पार्टी में यह अटकलें जोर पकड़ चुकी हैं कि चुनावों के लिए तैयार हो रहे मंत्रिमंडल में जातिगत व क्षेत्रीय समीकरण साधे जाएंगे। महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के अलावा युवाओं को मौका मिलेगा। जिन मंत्रियों का स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा है, उनको बदला जाना तय माना जा रहा है। जिलों में प्रभारी मंत्री के तौर पर अपेक्षित काम न करने वाले भी रडार पर हैं। नेतृत्व का मानना है कि विवादों में घिरे मंत्रियों को नहीं हटाया गया तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। यूं भी प्रदेश मंत्रिमंडल में अभी आधा दर्जन नियुक्ति की गुंजाइश है। जिन दो कैबिनेट मंत्रियों चेतन चौहान और कमल रानी वरुण का कोरोना संक्रमण में निधन हो गया था, उनके स्थान पर कोई तैनाती नहीं हो सकी है। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले दिनों दिल्ली दौरे में शीर्ष नेताओं से मंत्रिमंडल में फेरबदल की हरी झंडी ले आए थे।

इधर, भाजपा अध्यक्ष नड्डा ने जिस तरह मंत्रियों को कार्यशैली में सकारात्मक बदलाव की नसीहत दी, उसने भी मंत्रिमंडल फेरबदल की संभावना को बल दिया है।बजट सत्र से पहले मंंत्रिमंडल का बदलाव तय मानने वालों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निकटस्थ माने जाने वाले गुजरात कैडर के सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी अरव‍िंद कुमार शर्मा का समायोजन होना तय है। शर्मा को जिस तरह अचानक भाजपा की सदस्यता ग्रहण कराकर विधान परिषद भेजा गया, उससे उनकी भूमिका को लेकर तमाम अटकलें लगाई जा रही हैं। माना रहा है कि हाईप्रोफाइल शर्मा को जल्द मंत्रिमंडल में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। साथ ही किसान आंदोलन से ग्रामीण क्षेत्रों में नुकसान की आशंका देखते हुए कुछ ऐसे नेताओं को महत्व दिया जा सकता है, जिनका समाज आंदोलन के खिलाफ और सरकार के पक्ष में डटकर खड़ा रहा।

कृषि कानूनों के पक्ष में वातावरण तैयार कराने में मंत्रियों की भूमिका अहम होगी।सरकार व संगठन में पश्चिमी जिलों का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम होने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मौजूदा मंत्रिमंडल में पश्चिम के मंत्रियों के पास कम महत्व वाले विभाग होना भी चर्चा में रहा है। ऐसे में सपा-रालोद गठजोड़ व बसपा के मुकाबले चुनावों में बढ़त लेने के लिए मंत्रिमंडल में पश्चिम के नेताओं को महत्व मिल सकता है। नए मंत्री बनाने के अलावा कुछ को महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। अनुसूचित वर्ग कोटे से नए मंत्री बनाए जाने की संभावना है। कैबिनेट मंत्री कमल रानी वरुण के निधन से रिक्त हुए स्थान की पूर्ति पर ध्यान दिया जाएगा। वहीं, अपना दल कोटे से आशीष सि‍ंह को मंत्रिमंडल में स्थान मिलने की चर्चा जोरों पर है।

Post Author: thesundayviews

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