पंजाब और हरियाणा के किसान सरकार के भारी विरोध के बाद भी पहुंचे दिल्ली

दिल्ली की ओर किसानों का पलायन पुलिस बैरिकेडिंग भी नहीं रोक पाई 
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने जय जवान जय किसान का दिया था नारा 
संवाददाता
इटावा
दिल्ली की सीमाओं पर बड़े पैमाने पर  पुलिस द्वारा खड़े किए गए बैरिकेड्स और पानी के तोपों तथा आंसु गैस के गोलो को धता बताते हुए पंजाब और हरियाणा के हजारों किसानों ने शुक्रवार को ‘दिल्ली चलो’ के नारे के तहत राजधानी की तरफ कूच कर दिया  किसानों के  विरोध के सामने केंद्र सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा और उन्हें शहर में प्रवेश की अनुमति देनी पड़ी।  सरकार द्वारा लाए गए 3 कॉर्पोरेट-परस्त कृषि कानूनों को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए,
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति  के एक बयान में कहा गया है कि, भारत सरकार को किसानों की इच्छाशक्ति और सख्त निर्णय के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा, और उन्हे राष्ट्रीय राजधानी में किसानों के मार्च करने की अनुमति देनी पड़ी। किसान तीन काले केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ अपना विरोध जता रहे हैं, 300 से अधिक किसान संगठनों के संयुक्त मोर्चे ने केंद्र में मोदी सरकार द्वारा किसानों पर किए जा रहे दमन की कड़ी निंदा की है।
प्रदर्शनकारी किसानों के साथ लंबे समय तक गतिरोध में रहने के बाद, दिल्ली पुलिस  ने कहा, “किसान नेताओं के साथ चर्चा करने के बाद, प्रदर्शनकारी किसानों को दिल्ली के अंदर बुरारी के निरंकारी ग्राउंड में शांतिपूर्ण विरोध करने की अनुमति दे दी गई है।
इस बीच, आम आदमी पार्टी  सरकार ने दिल्ली पुलिस को किसानों और बड़ी तादाद में आ रहे किसानों को जेल में रखने के शहर के स्टेडियमों को अस्थायी जेलों में बदलने से मना कर दिया है। दिल्ली के गृह मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि केंद्र सरकार को प्रदर्शनकारी किसानों की मांगों को स्वीकार करना चाहिए क्योंकि किसानों को जेलों में डालना इसका समाधान नहीं है।इससे पहले दिन भर कई स्थानों पर पुलिस और किसानों के बीच झड़पें हुईं और दिल्ली की सीमा एक
तरह से युद्ध क्षेत्र बन गया, जहां आंदोलनकारी किसानों को तितर-बितर करने के लिए ड्रोन के ज़रीए आंसूगैस के गोले छोड़े गए।
सिंघू बार्डर और टिकरी बार्डर पर किसानों को रोकने के लिए रेत से भरे ट्रकों और पानी की तोपों सहित बैरिकेडिंग की गई थी।किसान नए कृषि कानूनों को खारिज करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद इन विधानों को तैयार किया जाए और मौजूदा काले क़ानूनों की जगह उन्हे लाया जाए। वे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी भी चाहते हैं।सुबह कई ट्रेड यूनियन, छात्र, महिलाओं और संगठनों के कार्यकर्ताओं ने किसानों की मांगों के प्रति समर्थन व्यक्त करने के लिए जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया।

Post Author: thesundayviews

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