होमगार्ड विभाग: किसका अपमान,सीएम या डीजी का ?

होमगार्ड विभाग: आखिर जिलों में तैनात अफसर डीजी, डीआईजी के आदेश का क्यों रहे हैं अपमान ?

डीआईजी रंजीत सिंह का सख्त तेवर:

1- रैतिक परेड की अवहेलना करने वाले अधिकारियों,कार्मिकों पर होगी कार्रवाई

2-बिना मुख्यालय के अनुमति लिये नहीं मिलेगा किसी को वेतन

संजय पुरबिया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में तैनात होमगार्ड विभाग के मंडलीय कमांडेंट,कमांडेंट की नजरों में शायद मुख्यालय पर तैनात अफसरों की कोई अहमियत नहीं है। तभी तो,रैतिक परेड के लिये डीजी के निर्देश पर डीआईजी ने सूबे के 339 अधिकारियों व कर्मचारियों को आगामी 6 दिसंबर को आयोजित रैतिक परेड से पूर्व मुख्यालय पर आने के लिये निर्देशित किया था। इन कर्मचारियों में वैतनिक कंपनी कमांडर, बीओ,हवलदार प्रशिक्षक से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अभी तक मंडल में तैनात मंडलीय कमांडेंट और जिला कमांडेंट ने नामित कर्मचारियो को नहीं भेजा है। यह पहला वाक्या है जब रैतिक परेड के लिये मुख्यालय से जारी आदेश की इतनी तौहीन हुयी है। कर्मचारियों के ना आने पर डीआईजी रंजीत सिंह ने दो बार रिमाइंडर भेजा है। पहले रिमाइंडर के बाद 154 कर्मचारी नहीं आये थे,जो आ गये। लेकिन, दूसरे रिमाइंडर के बाद अभी भी 72 कर्मचारी नहीं आये हैं। बड़ा सवाल है। रैतिक परेड ना तो डीजी विजय कुमार का निजी कार्यक्रम है और ना ही मुख्यालय पर तैनात डीआईजी रंजीत सिंह का…। आखिर कर्मचारियों की जुर्रत कैसे हुयी कि वे उस रैतिक परेड की,उस निर्देश की धज्जियां उड़ाने के बारे में सोच लिये,जिसमें मुख्यमंत्री,होमगार्ड मंत्री योगी आदित्यनाथ बतौर मुख्य अतिथि शामिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने समय भी दे दिया है।


द संडे व्यूज़ का सवाल यह है कि आखिर डीजी,डीआईजी के आदेश की अवहेलना करने की हिमाकत जिलों में तैनात अफसर और कर्मचारियों ने कैसे की ? सवाल यह भी है कि आखिर सूबे के सभी कर्मचारी इतने मनबढ़ कैसे हो गये कि वे रैतिक परेड में शामिल ना हो इसके लिये बीमारी से लेकर सारे जतन कर दिये ? क्या अफसर और कर्मचारियों के लिये मुख्यालय पर तैनात अफसरों की कोई इज्जत नहीं ? नहीं तो इसके लिये जिम्मेदार कौन है ? यह पहला मामला है जब एक डीआईजी को दो बार रिमाइंडर लिखकर नामित कर्मचारियों को रैतिक परेड की तैयारी के लिये रिरियाना पड़ रहा है। बेहद शर्मनाक बात है। जिले के अफसर हों या सभी नामित कर्मचारी, ये लोग मुख्यालय के अफसरों की ही नहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री का भी अपमान करने का काम कर रहे हैं। हालांकि कर्मचारियों के  गैर जिम्मेदाराना रवैया को देख डीजी विजय कुमार व डीआईजी रंजीत सिंह ने सख्त तेवर अपनाने का फरमान जारी किया है।


रंजीत सिंह ने 29 अक्टूबर को समस्त जिला कमांडेंट व समस्त कमांडेंट,मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र को पत्र लिखा है जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि होमगार्ड स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली रैतिक परेड में नामित कर्मचारियों में उपस्थित न होने वाले कर्मचारियों को तत्काल अवमुक्त किया जाये। नामित अधिकारियों व कर्मचारियों को 4 नवंबर तक अवमुक्त करते हुये 5 की अपरान्ह तक अपना योगदान केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थान,लखनऊ में करायें। आदेशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ उत्तरदायित्व निर्धारित किया जायेगा। दोषी कार्मिकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी। पत्र में यह भी लिखा है कि नामित कर्मचारियों को परेड से मुक्त रखने के लिये अधिकारियों द्वारा कोई भी पत्राचार तब तक नहीं किया जायेगा जब तक  ऐसा कोई कारण दृष्टिगत ना हो तथा पत्राचार किया जाना अपरिहार्य हो। नामित ऐसे कर्मचारियों को जो रैतिक परेड में अनुपस्थित रहते हैं,उनके वेतन का आहरण,होमगार्ड मुख्यालय की बिना अनुमति सुनिश्चित नहीं किया जायेगा। अब देखना है कि इस पत्र का रैतिक परेड में आने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर असर पड़ता है या नहीं ?

इस विभाग के कर्मचारियों का आरोप यह भी है कि मुख्यालय स्तर पर पहला आदेश हुआ था उसमें 351 कर्मचारियों को प्रशिक्षण के नाम पर मुख्यालय बुलाया गया था। क्यों ? हकीकत यह है कि रैतिक परेड हमेशा से प्रशिक्षण के नाम से कराया जाता रहा है। इसका कोई अलग से बजट नहीं होता है। फिर,बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर 226 कर्मचारी प्रशिक्षण क्यों नहीं लेना चाह रहे हैं ?

Post Author: thesundayviews

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