कल छोटी छठ पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी सुहागिनें

लखनऊ। सूर्य उपासना का महापर्व छठ को लेकर एक ओर जहां घाटों पर सफाई अभियान के साथ सुसुबिता बनाने कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है तो दूसरी ओर बुधवार को नहायखाय के साथ व्रती महिलाओं की ओर से विधान शुरू कर दिया गया। छठ मइया को चढ़ाए जाने वाले सामानों की सफाई व रसोई की धुलाई की गई।

दिनभर व्रत रखने के साथ ही शाम को व्रतियों ने लौकी की सब्जी और रोटी का सेवन किया। 19 नवंबर को खरना के साथ ही छोटी छठ होगी। कुछ व्रती इस दिन भी घाट पर जाकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देती हैं। छोटी छठ पर प्रसाद तैयार होने के साथ ही सभी सामग्री को एकत्र किया जाता है। छठ मइया के प्रतीक सुसुविता का रंगरोगन सफाई होती है। शाम को व्रती गुड़ की बनी खीर का सेवन कर 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू करती हैं। मानस नगर की कलावती ने बताया कि 20 को दिनभर ठेकुआ बनाने के साथ ही टोकरी में फल, मौसमी सब्जी और सिंघाड़ा के साथ ही अन्य पूजन सामग्री छह, 12 और 24 की संख्या में रखा जाता है।

गन्ने के साथ सूर्य अस्त होने से पहले पति या बेटा सिर पर टोकरी लेकर घाट तक जाता है। जलते दीपक के साथ व्रती और साथी महिलाएं छठ गीत गाती हुईं घाट तक जाती हैं। पानी में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। 21 नवंबर के सुबह इसी तरीकेे से घाट पर जाकर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

अखिल भारतीय भोजपुरी समाज की ओर से लक्ष्मण मेला घाट स्थित छठ घाट की सफाई की गई। अध्यक्ष प्रभुनाथ राय ने सभी से कोरोना संक्रमण के चलते घर के पास पूजा करने की अपील की है। सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होंगे। अंतर्राष्ट्रीय भोजपुरी सेवा न्यास की ओर से झूलेलाल घाट पर सफाई की गई। 19 को शाम चार बजे भोजपुरी कवि संगोष्ठी होगी। मनकामेश्वर उपवन घाट, सझिया घाट, शिव मंदिर घाट व खाटू श्याम मंदिर घाट समेत अन्य स्थानों पर सफाई की गई।

Post Author: thesundayviews

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