प्रतापगढ़ में दलित मासूम से रेप करने वाले बुड्ढे के खिलाफ दो दिन बाद क्यों दर्ज हुयी एफआईआर ?

प्रतापगढ़ में दलित मासूम से रेप करने वाले बुड्ढे के खिलाफ दो दिन बाद क्यों दर्ज हुयी एफआईआर ?

अभियुक्त की धमकी: बिना मारे नहीं जाऊंगा जेल…

दलित मासूम के व्यक्तिगत अंगों पर नाखुन से खरोंच के निशान, पुलिस ने नहीं कराया उसका मेडिकल ?

अभियुक्त पुलिस पुलिस की गिरफ्त से दूर,क्या पुलिस किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रही है ?

संजय पुरबिया
प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश पुलिस शायद ये मानकर चलती है कि कोई बड़ा मामला हो तभी क्वीक एक्शन लेगी। महिलाओं या बच्चियों के साथ छेडख़ानी करने के मामले में यदि कोई परिजन शिकायत लेकर थाने जाती है तो उन्हें दुत्कार कर भगा दिया जाता है। मामला यदि ग्रामीण अंचल में पडऩे वाले थानों का हो तो वहां इंसाफ मिलना नामुमकिन सा लगता है। ये दर्द उस पिता की है जिसके पड़ोस में रहने वाले 50 वर्षीय बुड्ढे ने एक नाबालिग लडक़ी के साथ घर में घुसकर रेप करने की कोशिश की। लडक़ी किसी तरह उसके चंगुल से छूटकर बाहर भागी और शोर मचा दी। उस वक्त लडक़ी के परिजन पूजा करने मंदिर गये थे। मां-बाप जब थाने रिपोर्ट लिखाने गये तो उनका शिकायती पत्र ले लिया गया लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गयी। चौंकाने वाली बात तो यह है कि उस बच्ची के व्यक्तिगत अंगों पर नाखुन से खरोंच के निशान है लेकिन पुलिस ने उसका मेडिकल तक नहीं कराया ? क्यों ? इस बीच रेप की कोशिश करने वाले बुड÷ढे और उसके लडक़ों ने लडक़ी के परिजन को जान से मारने की धमकी देते रहें। दो दिन बाद पुलिस ने एफआईआर तो लिखा लेकिन अभियुक्त गिरफ्तार नहीं किये गये हैं। अभियुक्त और उसके लडक़े बार-बार धमकी दे रहे हैं कि लडक़ी और उसके परिवार को बिना मारे जेल नहीं जाऊंगा। गरीब लडक़ी का पूरा परिवार भयाक्रांत है। मामला प्रतापगढ़ में पडऩे वाले लालगंज कोतवाली का है।


लालगंज कोतवाली के नयकापुरवा,बेलहा निवासी रामआसरे सरोज ने थाने में जो तहरीर दी थी उसके मुताबिक गत 12 अक्टूबर को वो अपनी पत्नी के साथ घुसइसरनाथ मंदिर में दर्शन करने गया था। उसी दिन दिन में तीन बजे उसकी पद्र्रह वर्षीय बेटी लक्ष्मी घर पर अकेले थी। अकेले देख आरोपी कपिलदेव उम्र 50 वर्ष पुत्र बच्चूलाल गौड़ ने उसके साथ छेडख़ानी शुरु करने लगा। उसने उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की लेकिन किसी तरह बाहर भागी और शोर मचाने लगी। पीडि़ता के शोर मचाने पर आरोपी जाति सूचक शब्दों में गालियां देते हुये जान से मारने की धमकी देने लगा। जब हमलोग घर आये तो लक्ष्मी ने सारी बात बतायी। उसके बाद हमलोग थाने गये और रिपोर्ट दर्ज कराने के लिये कहा लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इस बीच आरोपी के दोनों लडक़े दिलीप और धनराज सहित गांव के दबंग लोगों ने समझौता करने का दबाव डाला। मना करने पर इनलोगों ने जान से मारने और देख लेने की धमकी देने लगे।

रामआसरे सरोज का कहना है कि हमलोग गरीब लोग हैं,किसी तरह मजदूरी कर अपना परिवार चला रहे हैं अब यदि पुलिस अभियुक्तों को सजा नहीं देगी तो हमलोगों के साथ कुछ भी हो सकता है।
दूसरी तरफ, सुस्त रफतार से चलने वाली यूपी की पुलिस ने दो दिन बाद यानि 14 अक्टूबर की रात में कपिलदेव गौड़ के खिलाफ छेडछाड तथा दलित उत्पीडऩ व पास्को एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। वहीं अभियुक्त लक्ष्मी और उसके परिजन को धमकी दे रहा है कि बिना मारे जेल नहीं जाऊंगा। धमकी से गरीब परिवार का जीना दुश्वार हो गया है। सवाल यह है कि आखिर लालगंज कोतवाली की पुलिस क्या कर रही है? क्या एफआईआर लिखने से उनकी जिम्मेदारी खत्म हो गयी है या फिर किसी बड़ी घटना के होने का इंतजार कर रही है? अभियुक्त और उसके लडक़ों की धमकी की वजह से रामआसरे सरोज का पूरा परिवार घर से नहीं निकल रहा है।

क्या पुलिस की नजरों में खरोंच के निशान कोई मायने नहीं रखता ? क्या पुलिस को तभी मामला गंभीर लगता जब मासूम की अस्मत लूट ली जाती  शर्मनाक बात है कि खाकी वाले आखिर कब अपनी ड्यूटी को ईमानदारी से निभायेंगे…। शायद यही वजह है कि सूबे में आये दिन रेप,छेडखानी और महिला उत्पीडऩ की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि होती जा रही है।

Post Author: thesundayviews

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