होमगार्ड विभाग: आईजी,पुलिस गायब,डीआईजी के कमरे में टाईप किये बयान पर होमगार्डों से कराये हस्ताक्षर…

सुनील कुमार बयान के समय वहां क्या कर रहे थे ? डीआईजी ने उन्हें बैठने का कैसे दिया परमिशन ?

आईजी,पुलिस कहां थे,क्या उन पर ऊपर से है दबाव या हल्के में ले रहे हैं भ्रष्टाचार की जांच ?

ड्राइवरों में आक्रोश: कुछ बोलेंगे तो हो जायेंगे सस्पेंड ?

मुझे नहीं मुख्यालय की जांच पर भरोसा,मुख्यमंत्री जी से लूंगा समय : मनोज कुमार

संजय पुरबिया
लखनऊ। मुख्यमंत्री जी,आपके पास होमगार्ड विभाग है और आपके नाक के नीचे भ्रष्टाचार तो हो ही रहा है अब मुख्यालय के अफसर आपको गुमराह करने का नया कुचक्र रचने की हिम्मत कर रहे हैं। क्या इन्हें आपका रत्तीभर भय नहीं है कि यदि आपको मालूम चलेगा तो इनके खिलाफ किस तरह की कार्रवाई होगी ? आप भ्रष्टाचार में शामिल खाकी वालों पर कहर बनकर टूट पड़े हैं। हर दिन कोई ना कोई पुलिस अधिकारी सस्पेंड हो रहा है,फिर होमगार्ड विभाग के मुख्यालय पर बैठकर भ्रष्टाचार करने और अधिकारियों व कर्मचारियों पर हिटलरशाही करने वाले अफसर के खिलाफ क्यों नहीं हो रही है कार्रवाई ? आपको बता दूं कि मुख्यालय पर तैनात सीनियर स्टाफ अफसर सुनील कुमार के खिलाफ जूनियर स्टाफ अफसर मनोज कुमार ने आज से 12 दिन पहले आपको 12 पन्ने का एक शिकायती पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने सुनील कुमार और उनके अधीन काम करने वाले कर्मचारियों द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार की कई गंभीर शिकायतें की है वो भी पूरे सबूत के साथ। द संडे व्यूज के खुलासे के बाद मुख्यालय के डीजी विजय कुमार ने जांच बिठा दी है। जांच अधिकारी आईजी,पुलिस धर्मवीर के नेतृत्व में डीआईजी, इलाहाबाद संतोष सुचारी,गोण्डा के मंडलीय कमांडेंट प्रमोद पाल ने 10 सिंतबर को होमगार्ड मुख्यालय पर 10 कर्मचारियों का बयान लिया। कर्मचारियों में होमगार्ड,क्लर्क और ड्राइवर शामिल हैं। बयान डीआईजी रंजीत सिंह के कमरे में लिया गया और उस वक्त वहां पर दोनों जांच अधिकारी संतोष सुचारी और प्रमोद पाल सहित सीनियर स्टॅाफ अफसर सुनील कुमार,जूनियर स्टाफ अफसर ए.पी.सिंह और डीआईजी रंजीत सिंह मौजूद थे। बारी-बारी से सभी को बुलाया गया और टाईप किये गये कागज पर सभी के बयान पहले से ही लिखे थे,बस उनका हस्ताक्षर करा लिया गया। इस दौरान जांच अधिकारियों ने सिर्फ सभी से हस्ताक्षर कराये और जाने दिया। अधिकारियों ने सवाल किया कि आपलोगों को कोई समस्या तो नही,किसी अधिकारी से कोई परेशानी तो नहीं? नाम न छापने की शर्त पर ऐसा बयान देने वालों ने बताया है। सवाल यह है कि जब डीजी ने जांच, आईजी,पुलिस धर्मवीर को कराकर देने का निर्देश दिया तो कल शाम लगभग सात बजे जब मुख्यालय पर कर्मचारियों,होमगार्डों व ड्राइवर का बयान लिया जा रहा था तो,धर्मवीर कहां थे? नियम की बात करें तो उनके कमरे में उनकी मौजूदगी में सभी का बयान लेना चाहिये था। मामला गंभीर है इसलिये आईजी,पुलिस का बयान के समय गायब होना यह दिखाता है कि या तो उन पर ऊपर से जांच प्रभावित करने का दबाव है या फिर उन्होंने इस प्रकरण को बहुत हल्के में ले लिया ? सवाल दोनों जांच अधिकारियों से है, जब आप डीआईजी के कमरे में बयान ले रहे थे तो जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार,पेट्रोल चोरी की जांच चल रही है सीनियर स्टाफ अफसर सुनील कुमार को आपने वहां पर किस हैसियत से बिठा रखा था? दोनों जांच अधिकारियों से सवाल है कि सभी कर्मचारियों का लिखित बयान लेना चाहिये लेकिनआपलोगों ने टाईप किये कागज पर सिर्फ हस्ताक्षर करा लिये? क्या आपलोगों ने सभी कर्मचारियों से जिस कागज पर हस्ताक्षर कराये,उसकी एक-प्रतिलिपि दी ? नहीं तो क्यों नहीं दी ? आखिर इन कर्मचारियों को भी जानने का हक है कि आपलोगों ने जिस कागज पर हस्ताक्षर कराये,उसमें लिखा क्या है ?

 

बता दें कि जांच होमगार्ड मुख्यालय पर तैनात सीनियर स्टाफ अफसर सुनील कुमार पर मनोज कुमार द्वारा कई गंभीर आरोप लगाने पर की जा रही है। आरोप है कि सुनील कुमार के इशारे पर डीजल,पेट्रोल चोरी होती चली आ रही है,चुनाव बाद सरकारी धन को यहां पर दबाये रखा गया,जिसे वे निकालने का अनुचित दबाव जेएसओ पर बना रहे थे। लेकिन,तेज-तर्रार अफसरों ने सुनील कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच को दबाने के लिये मामले को दूसरी तरफ मोड़ दिया और बागपत की महिला कमांडेंट नीता भारतीया,उनके पति के खिलाफ मनोज कुमार द्वारा अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने की तरफ कर दिया गया,जिस पर मनोज कुमार सस्पेंड भी कर दिये गये हैं। खैर,बात बयान की हो रही है। द संडे व्यूज़ का सवाल जांच अधिकारियों से है। गुरु मेरे सवाल पर ध्यान दें क्योंकि ये किसी होमगार्ड पर लगे आरोप की जांच नहीं हो रही है। जांच के दायरे में जो है वो क्लास टू आफिसर है और जांच कराने वाला भी क्लास टू आफिसर है।महोदय,जांच किसी होमगार्ड की नहीं हो रही,जांच क्लास टू पर लगे भ्रष्टाचार की हो रही है और आपलोग उसे अपने साथ बयान लेते समय बिठा लिया? उसके सामने आप सभी से बस एक ही सवाल कर रहे हैं आपलोगों को कोई समस्या तो नहीं,आपलोगों को किसी अधिकारी से कोई परेशानी तो नहीं…। हद हो गयी यार,आपलोगों ने इतने गंभीर मुद्दे को ही मजाक नहीं बनाया बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस की नीति की धज्जियां उड़ाकर रख दी है। सोचिये,जिसके खिलाफ जांच चल रही है उसी के सामने कर्मचारियों से सवाल दाग रहे हैं किसी अधिकारी से कोई परेशानी तो नहीं, अरे भईया,बयान देने वाले कर्मचारियों की स्थिति तो ठीक उसी तरह होगी जैसे शेर के सामने किसी बकरी को छोड़ दिया जाये और उससे कहा जाये की स्वादिष्ट चारा है खालो…।

सवाल यह है कि जब सभी कर्मचारियों के बयान ले लिये गये तो पत्रावलियों को सीलबंद किया गया ? नियम की बात करें तो बयान की पत्रावलियों को आईजी,पुलिस के कमरे में सीलबंद कराकर रखना चाहिये लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया है। कर्मचारियों ने बताया कि बयान की रिपोर्ट स्टाफ अफसर ए.पी.सिंह अपनने घर ले जाते हैं।आपको बता दें कि जब नोयडा के कमांडेंट कार्यालय में अग्निकांड़ हुआ था,उससे पूर्व शासन के निर्देश पर जांच करने सीनियर स्टॉफ अफसर सुनील कुमार और बागपत की कमांडेंट नीता भारतीया जांच करने गयी थी। इनलोगों ने लगभग 600 पन्ने की रिपोर्ट बनायी और उसे कमांडेंट कार्यालय के अलमारी में रखकर वापस चले आये। अगले दिन उसी अलमारी में आग लगा दी गयी और सारे दस्तावेज जलकर राख हो गया। इस मामले लापरवाही बरतने पर गाजीयाबाद के मंडलीय कमांडेंट डीडी मौर्या को सस्पेंड कर दिया गया था। लापरवाही बरतने वाले सुनील कुमार और नीता भारतीया के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी। इस प्रकरण में भी वही लापरवाही बरती जा रही है।आखिरी सवाल डीआईजी के कमरे में बयान लेने वक्त जूनियर स्टाफ अफसर ए.पी.सिंह क्या कर रहे थे ? उन्हें क्या आपलोगों ने अपने आवभगत के लिये बिठाया था या फिर प्लांटेंड बयान टाईप कराकर लाने के लिये, जिस पर सभी के हस्ताक्षर कराये गये हैं।

जेएसओ मनोज कुमार का कहना है कि मुझे मुख्यालय स्तर पर की जा रही जांच पर रत्तीभर भरोसा नहीं है। जिस तरह से जांच अधिकारियों ने आरोपित को साथ बिठाकर उसके सामने कर्मचारियों का बयान ले रहे हैं,उससे साबित होता है कि जांच अधिकारी एसएसओ सुनील कुमार के दबाव में हैं। कायदे से बयान आईजी,पुलिस के सामने लेना चाहिये,क्यों नहीं लिया गया? कर्मचारियों से लिखित बयान क्यों नहीं लिया गया? उस कमरे में जेएसओ क्या कर रहे थे? बयान के दौरान यदि आईजी,पुलिस नहीं थे तो बयान सीलबंद क्यों नहीं करके आईजी के कमरे में रखा गया? लिखित बयान क्या था,कर्मचारियों को उसकी एक कॉपी क्यों नहीं दी गयी? मनोज ने बताया कि ये जांच पूरी तरह से सुनियोजित तरीके से की गयी है लेकिन मैं अपने हक की लड़ाई लडूंगा और मुख्यंत्री जी से मिलने का समय मांग रहा हूं। उम्मीद ही नहीं पूरा भरोसा है कि वहां से ही मुझे इंसाफ मिलेगा।

सीधी बात करें तो ये भ्रष्टाचार की जांच नहीं बल्कि जांच के नाम पर मजाक किया जा रहा है। अब जांच अधिकारी जांच क बाद इसी प्लांटेड स्क्रीप्ट को अपर मुख्य सचिव के पास भेजेंगे और जांच खत्म। लेकिन गुरु,द संडे व्यूज़ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राह पर चलने की कोशिश कर रहा है। जांच पर आंच ना आये इसके लिये द संडे व्यूज़ के पास इतने दस्तावेज हैं की दूध का दूध और पानी का पानी करके ही रहेगा। क्योंकि,मुद्दा मुख्यमंत्री के जीरो टॉलरेंस से जुड़ा है…

 

Post Author: thesundayviews

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