महिला दिवस पर विशेष : हिन्दुस्तान से सात समुंदर पार तक महिलाओं ने लहराया परचम

दिव्या श्रीवास्तव

लखनऊ। आज के दौर में महिलायें पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ समाज और देश को संभाल रही हैं। कोई भी क्षेत्र हो, महिलायें आगे बढ़ रही हैं। एक समय ऐसा भी था जब महिलाओं के लिये घर की दहलीज से बाहर निकलना भी एक चुनौती थी। लेकिन अब दौर बदल चुका है। चाहें खेल हो,अंतरिक्ष हो या फिर प्रशासनिक सेवा,सभी जगह मुख्य पदों पर महिलायें भी विराजमान हैं। इसमें कोई संशय नहीं होना चाहिये कि जितनी शिदद्त से महिलायें अपने काम को पूरा करती हैं उतना पुरूष नहीं। अभी तक हम सुनते आये हैं कि हर सफल इंसान के पीछे एक महिला का हाथ होता है, लेकिन अब हम कह सकते हैं कि हर सफल अंतरिक्ष मिशन के पीछे भी एक नहीं बल्कि सैंकड़ों महिलाओं का सहयोग होता है। हम दावे के साथ ये भी कह सकते हैं कि खेल का मैदान हो या फिर सबसे बड़ी आईएएस की परीक्षा,सभी जगहों पर महिलायें अपना परचम पूरी ईमानदारी के साथ निभा रही हैं। आइये हिन्दुस्तान की उन महिलाओं के बारे में बताते हैं जिन्होंने सभी जगह अपने देश का नाम रौशन किया है। पेश है महिला दिवस पर स्पेशल रिपोर्ट–

स्मिता सबरवाल
कॉमर्स से ग्रेजुएट स्मिता ने महज 23 साल की उम्र में आईएएस परीक्षा पास कर ली थी और उन्हें ऑल इंडिया रैंकिंग में चौथा स्थान मिला था। स्मिता सबरवाल की पहली नियुक्ति चित्तूर जिले में बतौर सब- कलेक्टर हुई और फिर आंध्र प्रदेश के कई जिलों में एक दशक तक काम करते रहने के बाद उन्हें अप्रैल 2011 में करीमनगर जिले का डीएम बनाया गया। यहां उन्होंने हेल्थ केयर सेक्टर में अम्माललाना प्रोजेक्ट की शुरुआत की। इस प्रोजेक्ट की सफ लता के चलते स्मिता को प्राइम मिनिस्टर एक्सीलेंस अवार्ड भी दिया गया। स्मिता के करीमनगर में बतौर डीएम तैनात रहने के दौरान ही करीमनगर को बेस्ट टाउन का भी अवॉर्ड भी मिला चुका है। 2001 बैच की आईएएस अफ सर स्मिता सबरवाल तेलंगाना के मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात होने वाली पहली महिला आईएएस अधिकारी हैं। स्मिता को जनता के अफसर के तौर पर जाना जाता है।

संजुक्ता पराशर
असम की महिला आईपीएस अफ सर संजुक्ता पराशर बहादुरी का दूसरा नाम हैं। वह साल 2006 बैच की आईपीएस अफ सर हैं, जो असम के सोनितपुर जिले में बतौर एसपी तैनात हैं। संजुक्ता पराशर बोडो उग्रवादियों के खिलाफ चलाये जा रहे ऑपरेशन में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। उनके नेतृत्व में पुलिस उग्रवादियों के लिये काल बन गयी है। इस ऑपरेशन में उन्होंने 2015 में करीब 16 आतंकियों को मार गिराया, जबकि 64 को गिरफ्तार किया। 2014 में 175 और 2013 में 172 आतंकियों को जेल पहुंचाया दिया। संजुक्ता ने राजनीति विज्ञान से दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज से ग्रेजुएट किया है। इसके बाद जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशन में पीजी और यूएस फ ॉरेन पॉलिसी में एमफील और पीएचडी किया है। साल 2006 बैच की आईपीएस संजुक्ता ने सिविल सर्विसेज में 85वीं रैंक हासिल की थी। उन्होंने मेघालय- असम कॉडर को चुना। असम उनका गृह राज्य भी है। साल 2008 में उनकी पहली पोस्टिंग माकुम में असिस्टेंट कमांडेंट के तौर पर हुयी। उसके बाद उदालगिरी में बोडो और बांग्लादेशियों के बीच हुई हिंसा को काबू करने के लिये भेज दिया गया। संजुक्ता ने आईएएस अफ सर पुरु गुप्ता से शादी की है, जो असम- मेघालय कॉडर में नियुक्त हैं। उनका एक बेटा है। उसकी देखरेख उनकी मां करती हैं। यूपीएससी परीक्षा में संजुक्ता की की रैंक 85वीं थी। अगर वो चाहती तो आईएएस में जा सकती थीं उन्हें आसानी से डेस्क जॉब मिल जाती लेकिन संजुक्ता ने आइपीएस का रास्ता चुना ।

दुर्गा शक्ति नागपाल
दुर्गा शक्ति नागपाल 2009 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। यूपीएससी परीक्षा में 20वां रैंक हासिल करने वाली नागपाल मूल रूप से छत्तीसगढ़ की हैं। उन्होंने कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की है। प्रशिक्षण के बाद दुर्गा शक्ति नागपाल को पंजाब काडर मिला था लेकिन उत्तर प्रदेश काडर के आईएएस अधिकारी अभिषेक सिंह से शादी के बाद वे यूपी काडर में आ गयीं। 28 वर्षीय दुर्गा शक्ति नागपाल गौतमबुद्ध नगर में एसडीएम, सदर पद पर कार्यरत थीं। उन्हें 27 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार ने सांप्रदायिक सदभाव बिगाडऩे के आरोप में निलंबित कर दिया। हालांकि विपक्ष के मुताबिक उन्हें रेत खनन माफि य़ा के खिलाफ़ कार्रवाई करने के कारण निलंबित किया गया।

इरा सिंघल
यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम 2014 की टॉपर इरा सिंघल की कहानी से हर कोई प्रेरणा ले सकता है। शारीरिक रूप से विकलांग होने के बावजूद वो यूपीएससी की जनरल कैटगरी में टॉप करने वाली देश की पहली प्रतिभागी हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर जुनून और जज्बा हो तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको अपनी मंजिल हासिल करने से नहीं रोक सकती। इरा ने 2010 में सिविल सर्विस एग्जाम दिया था और तब उन्हें 815 वीं रैंक मिली थी। शारीरिक रूप से विकलांग होने की वजह से उन्हें पोस्टिंग नहीं दी गयी। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में केस दायर किया । 2014 में केस जीतने के बाद उन्हें हैदराबाद में पोस्टिंग मिली। इस बीच उन्होंने अपनी रैंक सुधारने के लिए कोशिशें जारी रखीं। आखिरकार अपने चौथे प्रयास में उन्होंने सिविल सर्विस एग्जाम की जनरल कैटेगरी में टॉप किया। इरा रीढ़ से संबंधित बीमारी स्कोलियोसिस से जूझ रही हैं। इसके चलते उनके कंधों का मूवमेंट ठीक से नहीं हो पाता है। उन्होंने कभी अपनी बीमारी को आड़े नहीं आने दिया और उनकी सफ लता इसी बात का प्रमाण है।

Post Author: thesundayviews

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *