राजेश खन्ना की गाड़ी की धूल से मांग भरती थीं लड़कियां, कुछ ऐसा था सुपरस्टार ‘काका’ का स्टारडम

राजेश खन्ना एक कलाकार नहीं बल्कि एक स्टार थे। वो स्टार जिनकी दुनिया दीवानी थी। लड़कियां जिसकी एक झलक पाने के लिए बेताब रहती थीं। राजेश खन्ना का सुपरस्टारडम भले ही ज्यादा लंबा नहीं चला लेकिन जिस कदर उस छोटे से दौर में लोगों ने उन्हें चाहा, उन्हें लेकर जो दीवानगी थी, वैसी शायद हिंदी फिल्मों के किसी अभिनेता को नसीब नहीं हुई। ऐसे में राजेश खन्ना को अगर भारतीय सिनेमा का पहला सुपरस्टार कहा जाए तो इसमें कोई दो राय नहीं होगी। आइए एक नजर डालते हैं उनके स्टारडम पर…

राजेश खन्ना पर लिखी गई किताब ‘द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ इंडियाज फर्स्ट सुपरस्टार’ में यासिर उस्मान कहते हैं- “बंगाल की एक बुजुर्ग महिला थीं। उनसे मैंने पूछा कि राजेश खन्ना क्या थे आपके लिए? उन्होंने कहा कि आप नहीं समझेंगे। जब हम उनकी फिल्म देखने जाते थे तो हमारी और उनकी बाकायदा डेट हुआ करती थी।”राजेश खन्ना की फिल्में ही काफी नहीं थी उनका स्टाइल उनके कॉलर वाली शर्ट पहनने का तरीका या फिर पलकों को हल्के से झुकाकर गर्दन टेढ़ी कर देखना…ये सब उन्हें सभी स्टार्स से अलग बनाता था। आलम ये था कि जब उनकी सफेद गाड़ी कही खड़ी होती थी तो लड़कियों के लिपस्टिक के रंग से उनकी गाड़ी गुलाबी हो जाती थी। इतना ही नहीं ये राजेश खन्ना की गाड़ी की धूल से तो लड़कियां अपनी मांग तक भर लिया करती थीं। उन्हें अपना पति मान लिया करती थी।

राजेश खन्ना जैसा स्टारडम पाने वाला स्टार न कभी हुआ है न कभी होगा। राजेश खन्ना के बारे में मशहूर था कि वो अहंकारी थे और सेट पर हमेशा लेट आते थे। राजेश खन्ना ने कभी किसी भी चीज के लिए अपना लाइफ-स्टाइल नहीं बदला। वो सेट पर तभी आते थे जब उनका मन करता था बावजूद इसके प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर उन्हें अपनी फिल्म में कास्ट करने के लिए लाइन लगाते थे।

राजेश खन्ना को राष्ट्रीय पहचान फिल्म ‘आराधना’ से मिली। राजेश खन्ना का 69 से लेकर 75 तक का जो समय था उसकी तुलना किसी ने नहीं की जा सकती। राजेश खन्ना की लोकप्रियता जहां तक गई थी, वहां तक किसी की नहीं गई और शायद किसी की जा भी नहीं पाएगी। कारण ये था कि लोग उनमें खुद को देखते थे और उनकी मुस्कान लड़कियों को बहुत आकर्षित करती थी।

राजेश खन्ना ने अपने बॉलीवुड करियर में 180 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था। उन्होंने 1966 में आई फिल्म आखिरी खत से बॉलीवुड में कदम रखा था। बस इसी के बाद से उनका सुपरस्टार बनने का सफर शुरू हो गया। लेकिन कहते हैं न दुनिया का हर अच्छा सिलसिला हमेशा के लिए वैसा नहीं रहता। राजेश खन्ना के साथ भी ऐसा ही हुआ। कहा ये गया कि वो कामयाबी को ढंग से हैंडल नहीं कर पाए और गुमनामी में खो गए। साल 2012 में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनकी अंतिम यात्रा में भी लोगों में वहीं उन्माद देखने को मिला, जो 1970 में उनके स्टारडम हासिल करने के बाद था। उनके पार्थिव शरीर को पारदर्शी ताबूत में सफेद फूलों से सजे मिनी ट्रक में रखा गया था और उनके साथ भारी भीड़ चल रही थी। अभिनेता की अंतिम यात्रा में उनसे अलग रही पत्नी डिम्पल कपाड़िया, उनकी छोटी बेटी रिंकी और दामाद अक्षय कुमार उनके साथ रहे थे।

Post Author: thesundayviews

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