क्या आप स्वस्थ रहना चाहते हैं… तो जानिए Genomeह्यूमन आइडेंटिटी कोड

संजय पुरबिया

लखनऊ। आपको स्वस्थ रहना है तो आपको एक बार फिर सदियों पूर्व उन्हीं विधाओं की ओर जाना होगा जिसे ऋषि-मुनियों ने करके स्वयं के साथ-साथ सभी को पूरी तरह से बीमारियों से मुक्त रखा। चौंकिए मत,इसे आप मजबूरी समझें या फिर तमाम तरह की बीमारियों से अपने को मुक्त रखने का आसान और दैनिक उपाय। क्या आप नहीं चाहते कि आपका परिवार निरोग रहे ? क्या आप नहीं चाहते कि कुछ ऐसी दवाओं का सेवन करें जिसके सेवन के बाद आप और आपके परिजनों को किसी तरह का साईड इफेक्ट ना हो…। मेरे हिसाब से मेरी और आपकी सोच यही कहती है कि हम सभ चाहेंगे कि पूरा विश्व स्वस्थ और प्रसन्न रहे। तो इसके लिए हमें चलना होगा एक बार फिर नाड़ी विधा की ओर… जिसे कहते हैं Genome ह्यूमन आइडेंटिटी कोड। ’न्यू जनरेशन इन 21 जी सेंचुरी के अनुसार स्वस्थ रहना है तो जानना ही होगा ह्यूमन आइडेंटिटी कोड’।

आखिर ये विधा क्या है,इस पर बात करते हैं डॉ. वंशराज मौर्य से जिन्होंने 20 वर्ष तक व्यक्तिगत रिसर्च एवं अध्ययन करके इस ’ मानव जीनोम प्रकृति स्कैन’ को कुछ वर्षों से जनमानस के कल्याण के लिए शुरू किया है।

मै कौन हूं …

मानव हमेशा से चिंतन में था कि स्वस्थ कैसे रहे, कैसे निरोग रहे। जहां नए- नए रिसर्च व अध्ययन के अनुसार दवाएं बन रही है वहीं पर मनुष्य और ज्यादा बीमार होता जा रहा है। नई- नई बीमारियों से ग्रसित हो रहा है। सटीक इलाज व दवा ना हो पाने के कारण कुछ बीमारियों में सफ लता मिल रही है तथा कुछ में नहीं मिल पा रही है। नवीन अध्ययन व शोधों के अनुसार हर व्यक्ति की संरचना व प्रकूति अलग- अलग है। ये पूरे विश्व ने स्वीकार कर लिया है। अब व्यक्तिगत दवाएं व लाइफ स्टाइल के आधार पर रोग को ठीक करने एवं स्वस्थ व्यक्ति को स्वस्थ रहने के रास्ते बताए जाएंगे। इससे भविष्य में होने वाली बीमारियों का भी आकलन आसानी से हो सकेगा। किस ग्रुप को कौन सा आहार-विहार दिया जाएगा उसका पूरा विवरण आइडेंटीटी कोड 360 अर्थात मैनुअल में दिया गया है।

360 जीनोम नेचर लाइफ स्टाइल मेडिसिन

जीनोम मैनुअल एक अनुवांशिक मैनुअल है जिसमें उन सभी निर्देशों को शामिल किया गया है जो आपको एक कोशिका सेल से एक पूर्ण मानव में विकसित करने में सहायता करता है। जो आज आप इस समय हैं यह आप के विकास में सहायता करता है तथा आपके शारीरिक अंगों को अपना कार्य करने में मदद करता है। क्षतिग्रस्त होने पर खुद की मरम्मत भी करता है। यह मैनुअल आपके लिए एक उपहार है जितना आप अधिक से अधिक अपने जीनोम मैनुअल कोड के बारे में जानेंगे कि यह कैसे काम करता है उतना ही आप अपने जीवन को स्वस्थ, निरोग, नौजवान, लंबी उम्र एवं आनंदमयी बना सकेंगे।


हमारे जीवन में प्रभाव

जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी की प्रगति होती है हम जीनोम के बारे में और ज्यादा सीखते हैं, जानते हैं । यह कैसे हमारे जीवन में कार्य कर रहा है। ये जल्दी से हमारे जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है । प्रौद्योगिकी अर्थात टेक्नोलॉजी हमें जीनोम नेचर कोड को समझने में सहायता करती है। जीनोम नेचर कोड हमारे लिए व हमारे परिवार के स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा उपयोगी है । घर में अगर कोई व्यक्ति को रोग हो गया है तो उसके लाइफ स्टाइल में क्या परिवर्तन करना है, कौन सी औषधि देनी है, रोग का मुख्य कारण क्या है,क्यों हुआ, उसका सही इलाज क्या है। भटकना ना पड़े उसके लिए मानव डी कोड जानना पड़ेगा जिससे हम सही इलाज कर पाएं । अगर स्वास्थ्य एवं रोग का सही इलाज करना है तो हमें मैनुअल अपनाना पड़ेगा। इससे मानसिक, शारीरिक इत्यादि 360 डिग्री का डिकोडिंग उपस्थित है।
हमारे जीवन के कई हिस्से जिनोमिक नेचर सूचना और टेक्नोलॉजी से प्रभावित हैं अगर हम 360 जीनोम मैन्युअल का प्रयोग करते हैं तो घरेलू विवाद, असमय मृत्यु , घातक बीमारियों का होना, स्ट्रेस, दांपत्य जीवन, संतान सुख से वंचित रहना, लाइफ स्टाइल डिजीज, अनुवांशिक बीमारियां, गलत दवाएं, एलर्जी व मात्रा आदि समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है। अगर समस्या है तो दूर भी किया जा सकता है।

मानव जीनोम प्रकृति स्कैन की प्रक्रिया

यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति को आठ प्रकार से शरीर में उपस्थित मानव जीनोम कोड को डिकोड किया जाता है। यह परीक्षण आयुर्वेद एवं नेचुरोपैथी सिद्धांत पर आधारित है जिसको टेक्नोलॉजी एवं जैविक विज्ञान से जोडक़र कर जीनोम प्रकृति को स्कैन एवं काउंसलिंग के द्वारा किया जाता है। डॉ वंशराज मौर्य ने 20 वर्षो से व्यक्तिगत रिसर्च एवं अध्ययन करके इस ’ मानव जीनोम प्रकृति स्कैन’ को कुछ वर्षों से जनमानस के कल्याण के लिए शुरू किया है। यह प्रक्रिया बहुत महंगी होने के कारण हर मनुष्य के पहुंच से दूर थी। डॉ वंशराज मौर्य ने इसे इस प्रकार डिजाइन किया है कि ये हर एक मनुष्य के पहुंच में हो जिससे व्यक्ति स्कैन करा कर अपने लाइफ कोड यूजर मैनुअल गाइड अर्थात 360 मैनुअल को जान जाए। बीमारियों एवं मानसिक शारीरिक, भावनात्मक कष्ट से बच सके।

लोगों की जरुरत बनाए मानव जीनोम प्रकृति 360 डिग्री मैनुअल

कुछ दशकों से यातायात की सुविधा सहज होना एवं बेमौसम आहार- विहार, मनुष्य का स्थानांतरण, पलायन, बेमेल विवाह, एक देश का भोजन दूसरे भोजन में उपयोग होना, जीवन शैली परिवर्तन, एक समुदाय का दूसरे समुदाय का कॉपी पेस्ट करना , जीवनशैली,लगातार केमिकल युक्त सौन्दर्य प्रसाधन प्रयोग करना, मिलावटी भोजन, एवं फ सलों में डाला गया जहर, दवाओं का हद से ज्यादा प्रयोग, प्रदूषण, तापमान में बदलाव, कार्यशैली, जलवायु एवं मौसम के अनुसार मनुष्य की प्रकृति के विपरीत रहना, इससे आदमी की प्रकृति एवं विकृति दोनों मे बदलाव हो गया। उसका डीएनए आरएनए उसके मौसम जलवायु भौगोलिक स्थिति एवं माता पिता के ऊपर निर्भर करता है की उसके माता पिता का जेनोमिक क्या था।

आज के मौजूदा हालात में एक स्थान या परिवार मे अलग- अलग जीनोमिक नेचर के लोग है जिसके कारण एक नियम या मैनुअल सभी पर लागू नही हो सकता उसी का दुष्परिणाम है की प्राण घातक बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। सामाजिक, पारिवारिक, स्वास्थ्य संबंधित लोगों की जिंदगी कष्टमय एवं निराशा से भर गयी है।

अब समय आ गया है… जीनोम प्रकृति मैन्युअल 360 अब लोगों की जरूरत बन गयी है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए व्यक्ति को अपना जीनोम प्रकृति कोड जानना होगा। मानव जीनोम कोड क्या है? मैनुअल को जितना मनुष्य समझेगा व अपनाएगा उतना ही स्वस्थ निरोग एवं खुशहाल रहेगा।

Post Author: thesundayviews

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