नैतिक किरदार मुझे आकर्षित नहीं करते : तब्बू

फिल्म अभिनेत्री तब्बू की मानें तो जब भी वह कोई हवाई यात्रा करती हैं, तो ऐसा कभी नहीं होता कि कोई व्यक्ति एयरपोर्ट पर उनसे फिल्म ‘अंधाधुन’ के रहस्यमय अंत से जुड़े सवाल न पूछे! इस करिश्मायी सफलता से चकित तब्बू ने एक रोचक बातचीत के दौरान कई खुलासे किए …..  तब्बू एक ऐसी अभिनेत्री हैं, जो किरदार में बेहद आसानी से रच-बस जाती हैं। हाल ही में मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में आयोजित ‘इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न’ में उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री’ का पुरस्कार दिया गया। उनकी ज्यादातर भूमिकाएं शिद्दत से भरी होती हैं। तब्बू ने अपनी फिल्म ‘अंधाधुन’ के तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने और अभिनेत्रियों के किरदारों में आई तब्दीली पर बात की।

‘अंधाधुन’ जैसी फिल्म से जुड़ा होना बेहद अद्भुत है। कुछ चीजों का कोई तय फॉर्मूला नहीं होता। अगर हम बैठकर यह गणित लगाते कि हमें इस तरह की फिल्म बनानी है, तो यह ऐसी कभी न बनी होती। मैं जब भी हवाई यात्रा करती हूं, ऐसा कभी नहीं होता जब एयरपोर्ट पर मिलने वाला कोई व्यक्ति मुझसे इसके रहस्यमय अंत से जुड़े सवाल न पूछे। यह करिश्मायी है। ऐसा मेरे करियर में पहली बार हुआ है। इसने लोगों को इस कदर सोचने पर मजबूर किया है, जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकती थी।

किसी फिल्म की किस्मत के बारे में पहले से कुछ नहीं कहा जा सकता। कभी-कभी सोचती हूं कि आखिर इस किस्म की फिल्म कोई कैसे बना सकता है! फिल्म ‘अंधाधुन’ दरअसल एक टीमवर्क का नतीजा थी, जिसमें टीम के हर सदस्य को यह महसूस कराया गया था कि उसका काम महत्वपूर्ण है। हम नहीं जानते कि यह कैसे संभव हुआ, पर यह जो भी है, मैं इसके लिए शुक्रगुजार हूं।  हां, यह महज एक इत्तेफाक था। मैंने सलमान के साथ फिल्म ‘भारत’ में काम किया। अजय के साथ ‘दे दे प्यार दे’ में काम किया। हालांकि इन दोनों के साथ मैंने कुछ समय पहले भी काम किया था। पर सैफ के साथ मैंने बहुत लंबे अंतराल के बाद काम किया। मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि मुझे ऐसे लोगों के साथ काम करने का मौका मिला, जो मेरे दिल के करीब हैं। इन सभी के साथ मैं आज के दौर की कहानियों पर आधारित फिल्मों में काम कर रही हूं। जो लोग आपके सफर का हिस्सा रहे हैं, उनके साथ काम करना हमेशा दिलचस्प होता है।

महिला प्रधान फिल्मों की कहानियां अब बहुत शानदार लिखी जाने लगी हैं। हालांकि अच्छी बात यह है कि अब अभिनेत्रियों के छोटे किरदारों में भी एक अलग बात होती है। यह एक बड़ा बदलाव आया है। अब अभिनेत्रियों के किरदार में परतें होती हैं। उनकी अपनी ताकत होती है, अपनी कमजोरियां होती हैं।

वे सिर्फ एक आदर्श नारी नहीं होतीं। शायद यही वजह है कि मैंने एक वक्त पर अपने करियर में नैतिक किरदारों को स्वीकारना बंद कर दिया था। ऐसे किरदार मुझे आकर्षित भी नहीं करते। मुझे लगता है कि अब बहुत सारी अभिनेत्रियां ऐसा कर रही हैं। वे एक आदर्शवादी महिला का किरदार निभाने से बेहतर एक दिलचस्प अनैतिक किरदार निभाना पसंद करती हैं।  जब फिल्म ‘अंधाधुन’ को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस फिल्म के निर्देशक श्रीराम राघवन का मैं जितना शुक्रिया अदा करूं, कम होगा। इस फिल्म से जितने भी लोग जुड़े हैं, वे सभी इस सफलता से अभिभूत हैं। यह हम सभी के लिए एक बड़ी जीत है। यह एक ऐसी फिल्म है, जिसने व्यावसायिक रूप से भी बेहद शानदार प्रदर्शन किया।  मैं फिल्म ‘अंधाधुन’ से जुड़े हर एक व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से बधाई देना चाहती हूं

Post Author: thesundayviews

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