लोकसभा चुनाव में ही लिख गई थी नीरज शेखर के इस्तीफे की कहानी

लखनऊ

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर के राज्यसभा से इस्तीफा देने की खबर सोमवार को आई तो उन सारी अटकलों पर विराम लग गया, जिसके कयास लोकसभा चुनाव के समय से ही लगाया जा रहे थे। हालांकि उन्होंने अभी समाजवादी पार्टी नहीं छोड़ी है लेकिन माना जा रहा है कि वे जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकते हैं। लोकसभा चुनाव में बलिया की सीट सपा-बसपा बंटवारे में सपा के खाते में थी। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की इस परंपरागत सीट से नीरज शेखर का लड़ना तय माना जा रहा था।

चूंकि वे राज्यसभा सदस्य भी थे, लिहाजा माना जा रहा था कि सपा अपनी एक सीट कम नहीं करेगी। ऐसे में नीरज शेखर की पत्नी डा. सुषमा शेखर को उम्मीदवार बनाने पर मंथन हो रहा था। इसे लेकर लंबे समय तक उम्मीदवार की घोषणा भी सपा नहीं कर पा रही थी। बताया जाता है कि डा. सुषमा शेखर का नाम तय भी हो गया था लेकिन ऐन मौके पर ऐसा कुछ राजनीतिक पेंच उलझा कि चंद्रशेखर की विरासत पर विराम लगाते हुए सपा ने यहां से सनातन पांडे को उम्मीदवार बना दिया।

सपा के इस फैसले के बाद से ही नीरज के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया था। टिकट कटने से नीरज शेखर के समर्थकों में आक्रोश था और इसका असर चुनाव पर भी पड़ा। खुद नीरज ने न सिर्फ चुनाव से दूरी बनाए रखी बल्कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की बलिया में हुई जनसभा में भी वे शामिल नहीं हुए। उसके बाद से यह तय माना जा रहा था कि नीरज व सपा का रिश्ता अब लम्बा नहीं चलने वाला।

बलिया पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की परंपरागत सीट रही। 2007 में उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में नीरज शेखर को सपा ने अपना उम्मीदवार बनाया और वे पहली बार सांसद बने। इसके बाद 2009 के आम चुनाव में भी नीरज ने सपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और दूसरी बार सांसद बने। 2014 के लोकसभा चुनाव में बलिया की सीट पहली बार मोदी लहर में भाजपा के खाते में चली गयी। इसके बाद भी सपा ने नीरज को चंद्रशेखर से अपने रिश्ते को मजबूती देते हुए राज्यसभा सदस्य बनाया।

लोकसभा चुनाव के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश ने खुद इसका जिक्र करते हुए कहा था कि मौका मिला तो फिर नीरज को सम्मान देंगे। उनका कार्यकाल 2020 तक था लेकिन इसी बीच उन्होंने इस्तीफा दे दिया। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के नाती रविशंकर सिंह पप्पू भी फिलहाल सपा से ही विधान परिषद के सदस्य हैं।

Post Author: thesundayviews

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *