क्या अब पुलिस वाले कुंवारे मर जाएंगे !

पुलिस महानिरीक्षक,स्थापना बोर्ड से जवान की फरियाद : मैं कुंवारा नहीं मरना चाहता...
तालकटोरा,लखनऊ में तैनात जवान है मायूस,काम में नहीं रम रहा मन
क्या अब पुलिस की वर्दी पहनने वाले कंवारे मर जाएंगे!

संजय पुरबिया
लखनऊ।
पुलिस की वर्दी पहन कर देश की सेवा करने का जज्बा दखने वाले जवानों के लिए खतरे की घंटी बजने लगी है। नई भर्ती में वर्दी पहनने के बाद भले ही जवान या अधिकारी अपने को गौरवान्वित महसूस करते रहे हों लेकिन अब यही वर्दी उनके लिए किसी सौत की तरह दिखने लगी है। पुलिस विभाग के लोग इतने मायूस हो गए हैं कि उनका ड्यूटी में मन नहीं रम रहा। वे ऑफिस में गुमसुम,उदास हैं। दूसरी तरफ,ऐसे कुंवारे अफसर और जवान के माता-पिता बेहद चिंतित हैं। इन्हें इस बात का भय खाए जा रहा है कि कहीं हमरा बिटवा कुंवारा ही ना रह जाए…। यदि ऐसा हुआ तो,ये सोच-सोच कर जवानों की अम्मा और बापू को भूख नहीं लग रही और अपने लल्ला की शादी को लेकर तनाव में हैं।

ये मैं नहीं बल्कि एक गुमनाम जवान जो लखनऊ के तालकटोरा थाने में तैनात है, ने पुलिस महानिरीक्षक स्थापना बोर्ड को पत्र लिखकर अपनी दुख भरी दास्तां सुनाई है। पत्र में लिखा है कि प्रार्थी गृह जनपद से दूर लखनऊ में तैनात है। उसकी शादी के लिए कई रिश्ते आ रहे हैं लेकिन मेरे घर में ना होने की वजह से लडक़ी वाले मुझे देख नहीं पा रहे हैं। इस वजह से मेरी शादी तय नहीं हो पा रही है। ये चिंता मुझे खाए जा रही है। यही वजह है कि मेरा काम में मन नहीं लग रहा है।

पत्र में यह भी लिखा है कि मेरे माता-पिता इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं। वे कहते हैं कि मेरा लडक़ा पुलिस विभाग में भर्ती हो गया है,अब लगता है उसकी शादी नहीं हो पाएगी। मेरा लडक़ा कुंवारा ही रह जाएगा इसलिए मेरा ट्रांसफर शामली,मुरादाबाद या बुलंदशहर करने की कृपा करें।पत्र में उस जवान ने यह भी लिखा है कि मैं अविवाहित नहीं रहना चाहता। मैं शादी करने के लिए इच्छुक हूं। मेरी इच्छा पूरी कर दें आपकी महान कृपा होगी।


खबर पढक़र आप सभी को मजा आ रहा होगा क्योंकि जिस पुलिस वाले ने ये पत्र लिखा है,उसके अंदर पति कहलाने की भूख इस कदर जाग उठी है कि अब रहा नहीं जा रहा। मां-बाप ने भी सोचा होगा कि अब बिटवा वर्दी वाला हो गया है तो जल्दी शादी कराओ और ले लो दहेज…। यदि इनकी ये सोच नहीं भी होगी तो इन्हें सोचना चाहिए कि इसी नौकरी को पाने के लिए उसके बेटे ने कितनी मेहनत की होगी। और जब नौकरी मिल गई तो गृह जनपद का मोह जाग उठा,शादी वालों से हमदर्दी जाग उठी।

पुलिस विभाग के जिस अधिकारी या वर्दीधारी ने ये पत्र लिखा है उसे शर्म आनी चाहिए। आखिर उसने गृह जनपद में तैनाती के लिए पुलिस महानिरीक्षक,स्थापना बोर्ड के साथ इतना बड़ा झूठ बोला…। अरे भईया, जब घर से इतना ही मोह था तो पुलिस विभाग में नौकरी क्यों की? खैर, ये पुलिस विभाग के अधिकारी जानें या कुंवारा ना रहने वाले बेचैन…

Post Author: thesundayviews

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