मंत्री अनिल राजभर भ्रष्ट कमांडेंट गिरीराज सिंह से खरीदवा रहे हैं करोड़ों का कंबल, वर्दी,जर्सी,दरी और जूता

शीतलहरी में जवान ठिठुरते रहें, गर्मी में मंत्री अनिल राजभर होमगार्डों को बांटेंगे कंबल

भीषण गर्मी में होमगार्डों को मिलेगा कंबल, वर्दी,जर्सी,दरी और जूता

मंत्री के इशारे पर भ्रष्ट कमांडेंट गिरीराज सिंह एक बार फिर बनें वर्दी खरीददारी कमेटी के अध्यक्ष

डीजी साहेब, सुरेश यादव का मोबाइल नंबर 9455124446 सर्विलांस में लगा दें, कई भ्रस्ट अफसरों के चेहरे होंगे बेनकाब 

गिरीराज ने 2018 में घटिया वर्दी खरीदा जिसे जवानों ने फेंक दिया, शासन कर रही है जांच

मंत्री जी, आखिर गिरीराज में ऐसा क्या सुरखाब हैं जो उन्हें ही बनाते हैं वर्दी खरीद कमेटी का अध्यक्ष ?

जब कमेटी की टीम गठित हो गई तो सुरेश सिंह यादव को अफसर क्यों ले जाते हैं साथ ?

मुख्यालय पर तैनात  सुरेश यादव पार्टी से कराता है अफसरों की दलाली, फाईव स्टार होटल में साहेब को ठहराने और…कराता है…

डीजी की फटकार : जब कंपनियां मानक पूरा नहीं कर रही तो क्यों कर रहे हैं खरीददारी ?

संजय पुरबिया

लखनऊ। होमगार्ड मंत्री अनिल राजभर के बारे में यदि कहा जाए कि वे ‘निरंकुश’  मंत्रियों की फेहरिस्त में सबसे पहले पायदान पर हैं तो गलत नहीं होगा। जब से होमगार्ड मंत्री बने हैं,इलाहाबाद भर्ती घोटाला,प्रमोशन में खेल, भ्रस्टाचार के मामलों में जांच बिठाकर सौदेबाजी करने सहित कई ऐसे मामले देखने को मिले जिससे योगी सरकार की जीरो टालरेंस का मजाक बन गया । आचार संहिता लागू है लेकिन होमगार्ड विभाग के अफसरों को उन्होंने लगा रखा है होमगार्डों के लिए कंबल,जर्सी,जूता,कोट,दरी और मोजा खरीद में। ये खरीद लाखों में नहीं,कई करोड़ में हो रही है। अब आप समझ सकते हैं कि मंत्री जी की बल्ले-बल्ले होगी या नहीं…। अब ये भी बता दें कि मंत्रीजी और शासन में बैठे कुछ घाघ अफसरों ने ऐसे कमांडेंट को वर्दी खरीद कमेटी का अध्यक्ष बना दिया जिस पर पहले से ही वर्दी घोटाले सहित अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद की जांचें चल रही है,जिसे दफन कर दिया गया है। जी हां, मैं बात कर रहा हूं गाजीयाबाद के कमांडेंट गिरीराज सिंह का। खास बात यह है कि गिरीराज सिंह ने हाल ही में देहरादून,कानपुर और पानीपत में वर्दी सहित अन्य चीजों का सैम्पल देखने गए और लेकर आए भी हैं।


सवाल यह है कि विभाग में जब कई कमांडेंट हैं तो ऐसे अफसर को क्यों अध्यक्ष बनाया गया जिसके कार्यकाल में खरीद-फरोख्त में करोड़ों का गड़बड़झाला हुआ है? सवाल यह भी है कि जब कमेटी बन गई तो मुख्यालय के वरिष्ठï लिपिक सुरेश सिंह यादव को हर बार खरीद-फरोख्त के लिए क्यों ले जाते हैं ? बताया जाता है कि कंपनियों से दलाली और लेन-देन का काम यही बाबू करता है। खैर, गिरीराज सिंह ने करोड़ों का कंबल मंगा लिया है और उसे मुख्यालय के सेंट्रल स्टोर में भर दिया गया है। बताया जाता है कि गिरीराज के जेब में माल आ गया है। हालांकि, घटिया कंबल की खरीद पर डीजी जीएलमीना ने गिरीराज को बैठक में फटकार लगाया है। देखना है मंत्री अनिल राजभर की योजनाओं को डीजी जीएलमीना ध्वस्त करते हैं या एक बार फिर वर्दी खरीद पर योगी सरकार के खजाने को लूटते हुए देखते रह जाएंगे…

थोड़ा पीछे चलते हैं। होमगार्ड मंत्री की देख-रेख में वर्ष 2018 में होमगार्डों के लिए योगी सरकार के खजाने में रखी जनता की गाढ़ी कमाई से करोड़ों रुपए की वर्दी खरीदी गई। वर्दी का स्तर इतना घटिया था कि अधिसंख्य जिलों के होमगार्डों ने उसे फेंक दिया। कई जिलों में कमांडेंट लेने से मना कर दिए। उस वर्दी खरीद के अध्यक्ष भी गाजीयाबाद के कमांडेंट गिरीराज सिंह ही थे। आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि शासन ने प्रदेश के सभी कमांडेंट्स से जवाब मांगा है कि उनके यहां हुई वर्दी वितरण का ब्यौरा दिया जाए। वर्दी सही है या घटिया। अधिकांश कमांडेंट वर्दी के बारे में सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया,क्योंकि वर्दी निहायत घटिया स्तर का रहा। इस मामले में शासन ने जांच बिठाने की नौटंकी कर दी है। सभी जानते हैं कि इस विभाग में जांच के नाम पर मुंहमांगी सौदेबाजी होगी। उसके बाद पत्रावलियां ऐसे आलमारी में दफन हो जाएगी,जिसे ढूंढना नामुमकिन है।


अब बात करते हैं मंत्री अनिल राजभर द्वारा नए अंदाज में वर्दी सहित अन्य चीजों की खरीद-फरोख्त के बारे में। इस बार वर्दी वितरण कमेटी बनाई गई उसमें अध्यक्ष गाजीयाबाद के कमांडेंट गिरीराज सिंह,सदस्य मुख्यालय पर तैनात जूनियर स्टॉफ अफसर राजेन्द्र सिंह,वस्त्र विशेषज्ञ तेजवीर सिंह,निरीक्षक बृजेश यादव एवं वर्दी लिपिक प्रदीप श्रीवास्तव शामिल हैं। इसके अलावा एक वो शख्स है जो मुख्यालय पर है तो जूनियर क्लर्क,जिसे सभी होलसेल दलाल के उपनाम से पुकारते हैं सुरेश सिंह यादव,जो कमेटी में है नहीं लेकिन हर बार गिरीराज सिंह उसे खरीद-फरोख्त में ले जाते हैं। अफसरों ने बताया कि यही वो शख्स है जो कंपनियों से सौदेबाजी से लेकर अफसरों को एसी कोच में ले जाने और शानदार होटलों में ठहराने से लेकर सभी व्यवस्था कराता है।खैर,वर्दी वितरण कमेटी 14 मार्च को देहरादून,16 मार्च को पानीपत जाकर वर्दी सहित अन्य सामानों का नमूना देखा। 19 मार्च को कमेटी सभी सैम्पल लेकर कानपुर में लैब टेस्ट कराने गए।
अब आपको बता दूं कि कमेटी के सदस्य इस फर्जीवाड़े में डीजी को किस तरह से गुमराह करेंगे… गिरीराज सिंह ने सभी सामानों का सेटिंग होने वाली कंपनियों से 3 सैम्पल मंगाया है। कानपुर लैब में जांच ओरिजनल (असली) वर्दी,कंबल,मोजा,दरी या कोट के कपड़ों का कराया जाएगा। वहां से जांच रिपोर्ट पॉजीटिव (सकारात्मक) आएगा,जिसे डीजी जीएलमीना सहित शासन के सीनियर अफसरों को दिखाया जाएगा। जैसे ही डीजी साहेब हरी झंड़ी दिखाएंगे,शासन में बैठे घाघ अफसर,जो मंत्री अनिल राजभर के इस खेल में शामिल हैं उसे ओ.के. दिखाकर योगी के खजाने से पास करा देंगे करोड़ों रुपए…। आगे क्या बताएं,ये पब्लिक है सब जानती है…

बताया जा रहा है कि गिरीराज सिंह ने डीजी जी एल मीना की नाक के नीचे मुख्यालय के सेंट्रल स्टोर में करोड़ों का कंबल मंगा लिया है। यह भी बताया जाता है कि बैठक में डीजी ने गिरीराज सिंह को फटकार लगाते हुए कहा कि जब जो कंपनियां मानक पूरा नहीं कर रहे हैं,क्वालिटी खराब है तो क्यों उससे खरीददारी कर रहे हो ? चर्चा यह है कि मंत्री अनिल राजभर का गिरीराज सिंह पर वरदहस्त है। ये वही गिरीराज सिंह हैं जो वर्ष 2008 से 2017 तक मुख्यालय पर तैनात रहें। इनके कार्यकाल में विभाग के अत्याधुनीकरण के उपकरणों की कई करोड़ की खरीद की गई। जिसकी जांच शासन स्तर पर चल रही है,पत्रावलियां दबा दी गई है। हालांकि पूर्व एडीजी पी.के.तिवारी ने मुख्यालय पर तैनात वरिष्ठ  लिपिक सुरेश यादव का मोबाइल नंबर 9455124446 सर्विलांस में लगाकर वर्दी खरीद में चल रहे भ्रस्टाचार टीम का खुलासा करने की पूरी कोशिश की थी लेकिन कमांडेंट गिरीराज सिंह ने मैनेज कर लिया था। उसने सर्विलांस में नंबर लगने ही नहीं दिया। डीजी साहेब,यदि सुरेश यादव का नंबर आप सर्विलांस में लगवाने में कामयाब हो गए तो इस नेटवर्क से जुड़े अफसर और कंपनियों के एक बड़े दलालों का पर्दाफाश हो जाएगा। आपको ये भी पता लग जाएगा कि जो अफसर आपके कमरे में आकर बड़ी-बड़ी बातें करते हैंं,वही भ्रभ्रस्टाचार के पितामह हैं।

द संडे व्यूज़ ने जब पड़ताल की तो गाजीयाबाद और नोयडा में तैनात विभागीय लोगों ने अपने दिल की आवाज बताई जो इस तरह है: दिल्ली,नोयडा मंत्री हों या उनके शुभचिंतक जब आते हैं तो कमांडेंट पूरा खर्च उठाते हैं। आखिर सेवा-सत्कार में खर्च होता है तो वो पैसा कहां से आएगा… बात जो भी हो, आचार संहिता लागू होने के बाद आखिर कमांडेंट गिरीराज सिंह ने कैसे करोड़ों का कंबल मंगाया ? 2018 में घटिया वर्दी बांटी गई,जिसकी शासन स्तर पर जांच चल रही है तो दुबारा उस कमांडेंट को क्यों कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया ? इसका मतलब सोची-समझी रणनीति के तहत एक बार फिर करोड़ों रुपए की वर्दी घोटाला करने की तैयारी चल रही है? क्या इस विभाग में गिरीराज सिंह से वरिष्ठ और ईमानदार अधिकारी नही हैं? यदि हैं तो उनकी देख-रेख में वर्दी सहित अन्य सामानों की खरीद क्यों नहीं कराई जा रही है ?

Post Author: thesundayviews

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