आजमगढ़ जेल बवाल : हंगामे के पीछे बड़े अपराधियों को भगाने की रची गई थी साजिश!

आजमगढ़
आजमगढ़ जिला जेल में शनिवार की शाम को उपजे हालात को देखते हुए यह कयास लगाया जा रहा कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कोई साजिश तो नहीं थी। बंदी लोकसभा चुनाव को देखते हुए किसी अपराधी को जेल से भगाने की योजना तो नहीं बना रहे थे। लगभग साढ़े पांच घंटे तक कैदियों ने तांडव जेल के भीतर ही किया गया। लेकिन पुलिस और जेल प्रशासन ने अपराधियों के ऐसे किसी भी मंसूबे को सफल नहीं होने दिया।
पूर्व की घटनाओं पर गौर करें तो जेल की 22 फुट ऊंची दीवार को फांदकर तीन जघन्य हत्यारोपी फरार हो गए हैं। जिन्हें पुलिस अभी तक नहीं ढूंढ पाई है। अगस्त 2017 में जिला जेल की 22 फुट ऊंची दीवार गैग पाइप लाइन के जरिए फांदकर गाजीपुर जिले के रहने वाले तीन मुसहर बंदी फरार हो चुके हैं। जेल से भागने वाले यह तीनों बंदी पेशेवर अपराधी हैं।

साल 2014 में बिहार से लेकर गाजीपुर, वाराणसी, जौनपुर, मऊ और आजमगढ़ में सिलसिलेवार हत्या और लूट की घटना को अंजाम दे रहे हैं। इन्हें गिरफ्तार करने वाली तरवां पुलिस को नक्सली संगठनों द्वारा धमकी भी दी गई थी। ऐसे शातिर अपराधियों को पुलिस अब तक नहीं गिरफ्तार कर सकी। ऐसे में लोकसभा चुनाव के माहौल में शनिवार को जेल के भीतर बंदियों द्वारा किए गए उत्पात का परिणाम रहा कि जिले में चर्चाओं का बाजार गरम हो गया। लोग यह कयास लगा रहे थे कि चुनाव में किसी बड़ी घटना को अंजाम दिलवाने के लिए बंदियों का गुट कोई गहरी साजिश तो नहीं किया है। हालांकि पूरा प्रशासन बंदियों को मंसूबों को ध्वस्त करने के प्रयास में जुटा है।

जिला जेल में शनिवार को पुलिस भले ही सर्च ऑपरेशन कर एक दर्जन से अधिक मोबाइलें बरामद करने का दावा कर रही, लेकिन जेल के भीतर अभी भी तमाम मोबाइलें चल रही हैं। जिसके जरिए शाम को जेल के भीतर हुए बवाल की जानकारी बंदी अपने परिचित नेताओं और समर्थकों को दे रहे थे।

इसी क्रम में एक दल के जिलाध्यक्ष को जेल के भीतर से एक बंदी ने फोन कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। साथ ही मदद की गुहार लगाई। पार्टी के जिलाध्यक्ष के मुताबिक जेल के भीतर होने वाले तांडव से बंदियों के घर वाले भयभीत हैं। उन लोगों का कहना है कि कुछ उपद्रवियों की वजह से पुलिस अन्य बंदियों को परेशान कर रही है।

Post Author: thesundayviews

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