विराट कोहली का शतक गया बेकार, ऑस्ट्रेलिया ने भारत को दी 32 रन से मात

रांची।

विराट कोहली ने दिलकश बल्लेबाजी का नजारा पेश करके वनडे में अपना 41वां शतक जमाया। लेकिन पहले स्पिनरों की नाकामी और बाद में बाकी बल्लेबाजों की ढिलायी भारत को भारी पड़ी और उसे ऑस्ट्रेलिया के हाथों रांची के जेएससीए स्टेडियम में खेले गए तीसरे एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में 32 रन से हार का सामना करना पड़ा। विराट कोहली ने लगातार दूसरे मैच में शतक जमाया। उन्होंने 95 गेंदों पर 123 रन की आकर्षक पारी खेली जिसमें 16 चौके और एक छक्का शामिल है। लेकिन उन्हें दूसरे छोर से किसी भी बल्लेबाज का सहयोग नहीं मिला और 314 रन के लक्ष्य का पीछा कर रही भारतीय टीम 48.2 ओवर में 281 रन पर सिमट गई।

विराट कोहली का 41वां शतक और विश्व रिकॉर्ड
विराट कोहली ने अपनी पारी के दौरान कप्तान के रूप में वनडे में 4000 रन भी पूरे किए। ऑस्ट्रेलिया ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवरों में 5 विकेट पर 313 रन बनाए थे। उसकी तरफ से उस्मान ख्वाजा (113 गेंदों पर 104 रन) ने वनडे में अपना पहला शतक जमाया और आरोन फिंच (99 गेंदों पर 93 रन) के साथ पहले विकेट के लिए 193 रन जोड़े। ग्लेन मैक्सवेल ने भी 31 गेंदों पर 47 रन बनाकर उपयोगी योगदान दिया। मार्कस स्टोइनिस (नाबाद 31) और एलेक्स कैरी (नाबाद 21) ने छठे विकेट के लिए 50 रन की अटूट साझेदारी की। भारत पहले दो मैचों में जीत दर्ज करके श्रृंखला में अजेय बढ़त हासिल करने के लिए उतरा था लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने पांच मैचों की श्रृंखला को जीवंत बनाए रखा।
इस मैच से भारत के लिए विश्व कप से पहले शीर्ष क्रम को लेकर थोड़ी परेशानी बढ़ गई है। शिखर धवन का पिछली दस पारियों में सर्वोच्च स्कोर 30 रन है जबकि अंबाती रायुडू भी फार्म से जूझ रहे हैं। धवन (एक) का जॉय रिचर्डसन (37 रन देकर 3 विकेट) की गेंद पर मैक्सवेल ने डाइव लगाकर शानदार कैच लिया। जबकि पैट कमिंस (37 रन देकर 3 विकेट) ने सपाट पिच पर भी मूवमेंट हासिल करते हुए रोहित शर्मा (14) और अंबाती रायुडू (2) को पवेलियन की राह दिखाई जिससे भारत का स्कोर तीन विकेट पर 27 रन हो गया। महेंद्र सिंह धौनी के क्रीज पर उतरते ही दर्शक उत्साह से भर गए। अपने घरेलू मैदान पर संभवत: अपना आखिरी मैच खेल रहे इस विकेटकीपर बल्लेबाज ने 26 रन बनाए।

घरेलू मैदान पर धौनी का बल्ला नहीं चला
धौनी नाथन लॉयन पर छक्का जड़कर अपने पुराने तेवर भी दिखाए लेकिन लेग स्पिनर एडम जम्पा (70 रन देकर तीन विकेट) की गेंद उनके बल्ले का किनारा लेकर विकेटों में समा गई और जेएससीए स्टेडियम को सांप सूंघ गया। धौनी ने 42 गेंदों पर 26 रन बनाए और विराट कोहली के साथ चौथे विकेट के लिए 59 रन जोड़े। कोहली पहली गेंद से ही लय में दिखे और उन्होंने फिर से बल्लेबाजी खूबसूरत पक्ष का जबर्दस्त नमूना पेश किया। ऑस्ट्रेलिया के तेज और स्पिन आक्रमण भारतीय कप्तान पर कोई असर नहीं छोड़ पाया। धौनी के आउट होने के बाद उन्होंने अकेले जिम्मा उठाया और कई दिलकश शॉट लगाए। वह 52 गेंदों पर 50 रन पर पहुंचे।

उन्होंने केदार जाधव (26) के साथ 88 रन की साझेदारी की। कोहली ने जाधव को विकेट बचाए रखने का निर्देश दिया था लेकिन वह जंपा की गेंद को स्वीप करने के प्रयास में गच्चा खा गए। कोहली ने 85 गेंदों पर वनडे में 41वां शतक पूरा किया लेकिन भाग्य ने भी उनका साथ दिया। जब वह 98 रन पर थे तब मैक्सवेल की गेंद पर कैरी ने उनका कैच छोड़ा जबकि सैकड़ा पूरा करने के तुरंत बाद गलत टाइमिंग से लगाया गया उनका शॉट छक्के के लिए चला गया। वह पूरे रंग में थे लेकिन जंपा पर लगातार तीसरा चौका लगाने के प्रयास में गुगली उनको गच्चा दे गयी जिससे भारतीय की जीत की उम्मीदें भी समाप्त हो गयी। विजय शंकर (32) और रविंद्र जडेजा (24) हार का कुछ अंतर ही कम कर पाए।   

मैच में भारत का क्षेत्ररक्षण बेहद खराब रहा 
यह ऐसा दिन था जिसमें भारतीय स्पिनर नहीं चल पाए। जडेजा (दस ओवर में 64 रन, कोई विकेट नहीं) और जाधव (दो ओवर में 32 रन, कोई विकेट नहीं) ने खूब रन लुटाये। कुलदीप यादव (दस ओवर में 64 रन देकर तीन विकेट) ने हालांकि पारी के दूसरे चरण में तीन विकेट लेकर अपने गेंदबाजी विश्लेषण में सुधार किया। ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 40 ओवर के बाद दो विकेट पर 244 रन था लेकिन आखिरी दस ओवरों में वह केवल 69 रन ही बना पाया। इसका श्रेय जसप्रीत बुमराह (52 रन देकर एक विकेट) और मोहम्मद शमी (53 रन देकर कोई विकेट नहीं) को जाता है जिन्होंने मिलकर 64 गेंदें ऐसी डाली जिन पर रन नहीं बने। भारतीय क्षेत्ररक्षण भी अच्छा नहीं रहा। धवन ने जडेजा की गेंद पर स्क्वायर लेग पर ख्वाजा का कैच छोड़ा। तब वह 17 रन पर खेल रहे थे।

विराट कोहली, केदार जाधव और बुमराह ने भी ढीला क्षेत्ररक्षण किया जिससे बल्लेबाजों पर से दबाव कम हुआ। मोहम्मद शमी भी तीन ओवर करने के बाद चोटिल हो गए और उन्हें कुछ देर के लिये मैदान छोड़ा और इससे भी बल्लेबाजों पर से दबाव कम हुआ। फिंच और ख्वाजा ने इस बीच तीनों स्पिनरों को अच्छी तरह से खेला। फिंच ने जाधव को निशाना बनाया और अपने तीनों छक्के लांग आन और मिडविकेट क्षेत्र में लगाये। विजय शंकर (आठ ओवर में 44 रन देकर कोई विकेट नहीं) ने ऐसे में अच्छी जिम्मेदारी निभाई। जडेजा भी सपाट विकेट पर प्रभावी नहीं दिखे। ख्वाजा और फिंच के बाद मैक्सवेल ने भी स्पिनरों का सामना करने के लिए अपने फ्रंट फुट का अच्छा इस्तेमाल किया। कुलदीप ने फिंच को पगबाधा आउट करके भारत को पहली सफलता दिलाई। इसके बाद उन्होंने अपने एक ओवर में शॉन मार्श (सात) और पीटर हैंड्सकांब (शून्य) को भी पवेलियन भेजा।

 

Post Author: thesundayviews

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