हल्ला बोल 3 : 7 लाख रुपए प्रति माह होने वाली काली कमाई के बादशाह बनें अमरोहा कमांडेंट दूबे जी

अमरोहा कमांडेंट दूबे जी ने पिटवाई मुनादी : वसूली, वसूली और वसूली

जवानों का आरोप : ड्यूटी लगाने के नाम पर हो रही सात लाख रुपए किसकी जेब में जा रहा…

अमरोहा में जवानों के मेहनत की कमाई चूसने वाले दूबे जी असली चेहरा सामने लाएंगे : रामेन्द्र यादव

संजय पुरबिया

लखनऊ। होमगार्ड विभाग के अफसरों में कमाई के मामले में नंबर वन बनने की रेस चल रही है। कई नामी-गिरामी कमांडेंट्स का खुलासा हुआ लेकिन अधिसंख्य ऐसे चेहरे हैं जो कमाई में सभी को पछाड़ रहे हैं लेकिन उनका खुलासा नहीं हुआ। इस विभाग में कमाई कई तरीके से की जाती है लेकिन प्रमुख तौर पर होमगार्डों की मनचाही ड्यूटी लगाने के नाम पर या उन्हें बर्खास्त करने के बाद बहाली के नाम पर होती चली आ रही है। डयूटी के नाम पर तो हर माह लाखों रूपए की माहवारी होती है और बर्खास्त करने पर एक ही बार मोटी रकम अंदर…। यही वजह है कि आज प्रदेश में हजारों बेगुनाह होमगार्ड बर्खास्त चल रहे हैं। इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार जिला कमांडेंट हैं जो मुख्यालय पर बैठे भ्रष्ट अफसरों की अनुमति व सौदेबाजी तय होने के  बाद जवानों को बर्खास्त करते हैं। हालांकि डीजी ने इस परिपाटी पर रोक लगाने की कोशिश की लेकिन उनके हाथ नाकामी ही लगी। तथाकथित कमांडेंट एवं मुख्यालय पर तैनात अफसरों के मुंह हराम की कमाई के खून का स्वाद इस कदर लग चुका है  कि उन पर डीजी के आदेश का कोई असर नहीं दिखता।  आज बात करते हैं अमरोहा के कमांडेंट मनीष दूबे  की।

पश्चिम का ये शहर आम के लिए मशहूर है लेकिन इस समय भ्रभ्रस्टाचार में सुर्खियां बटोर रहा है। होमगार्ड विभाग के कमांडेंट मनीष दूबे ने तय कर रखी है जवानों की ड्यूटी की धनराशि। जिसने उनके गुर्गों को तय राशि दी उसकी मनचाही जगहों पर डयूटी लगा दी गई,जिसने नहीं दिया उसे दूर फेंकने के अलावा डयूटी से वंचित रखा जा रहा है। कुछ माह से दूबे जी की भूख इतनी बढ़ गई है कि उन्होंने तय धनराशि बढ़ाने का मौखिक फरमान जारी कर दिया है।

जवानों की बात में इसलिए दम है क्योंकि द संडे व्यूज़ के पास कमांडेंट के खिलाफ कई मामलों के सबूत हैं जिसके आधार पर अब दूबे जी के भ्रस्टाचार के कारनामों को जनता के सामने ला रहा हूं। मुख्यालय पर बैठे तथाकथित भ्रष्ट अफसरों को ये भी मालूम चल जाए कि दूबे जी लगभग 7 लाख रूपए प्रति माह की वसूली कर रहे हैं,कहीं आपलोगों को हिस्सा कम तो नहीं दे रहे हैं ? अमरोहा के जवानों का कहना है कि कमांडेंट पैसा भी लेते हैं और दबाव भी बनाते हैं,जो अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यानि, अमरोहा के जवान अब कमांडेंट दूबे जी द्वारा वसूली,वसूली और वसूली की राह पर चलने के इरादे का पर्दाफाश पूरी तरह से करने के मूड में आ गए हैं।

दूबे की पहली किश्त में आज बताते हैं कि उनके कौन-कौन से विभागीय गुर्गे हैं जिन्हें वसूली मैन का दर्जा दिया गया और कहां पर ड्यूटी लगाने के नाम पर जवानों से कितना पैसा लिया जा रहा है। डीएम,अमरोहा के आवास एवं कार्यालय पर तैनात होमगार्डों से एक-एक हजार रुपए की वसूली की जा रही है। कमांडेंट ने डीएम आवास पर तैनात 16 होमगार्डों से वसूली की जिम्मेदारी चमन सिंह- पीसी , कार्यालय पर तैनात 13 जवानों से वसूली की जिम्मेदारी बलराम सिंह-पीसी को सौंप रखी है। डीएम आवास पर जवान तीन वर्ष से और कार्यालय में चार वर्ष से जमे हैं। क्या यहां पर किसी और जवान की ड्यूटी नहीं लगानी चाहिए ? जवाब यह है कि जो 1000 रुपए देगा,उसे ही यहां पर ड्यूटी करने का अधिकार है। इसी तरह,यातायात में तैनात 18 जवान जो एक ही जगह पर तीन वर्ष से लगातार ड्यूटी करते चले आ रहे हैं। यहां पर तैनात जवानों से वसूली करने की जिम्मेदारी दूबे जी ने बलराम सिंह-पीसी व नेपाल सिंह: एसीसी को सौंप रखी है जो प्रति जवान 1500 रुपए वसूली करता चले आ रहे हैं।

महिला थाने में 14 महिला होमगार्डों को,11 थानों में 30-40 जवान,जजों के आवास पर 82,4 एसडीएम के यहां24,चार तहसीलदार के यहां 24,2 एडीएम के यहां 122 एसडीएम के यहां12 जवान तैनात हैं। जवानों ने बताया कि नजदीक थानों पर ड्यूटी लगवाने के लिए 1000 रुपए देना पड़ता है। मांग पूरी करने वालों की तैनाती नजदीक थानों में मिल जाती है,जो देने में सक्षम नहीं है उसे दूर-दराज के थानों में भेज दिया जाता है।

यह भी बताया जा रहा है कि कमांडेंट कार्यालय में ओमवीर सिंह,बवीर सिंह, हरिकेश, राजकुमार तिवारी एवं इकबाल-पीसी पिछले दस वर्ष से जमे हैं। इन्हें कोई कमांडेंट हटाने की जुर्रत नहीं करता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इकबाल कमांडेंट की गाड़ी को चलाता है लेकिन उसके पास डीएल तक नहीं है। कुल मिलाकर ईमानदारी से काम करने वाले होमगार्डों का इस विभाग में सिर्फ शोषण है। इस बात को लेकर जवानों में आक्रोश है।

Post Author: thesundayviews

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