आबकारी विभाग भाग 1 : 300 उप-निरीक्षक,सिपाही,दिवान के हुए तबादले ,विभागीय दलाल लाते थे केस

300 उप-निरीक्षक,सिपाही,दिवान के तबादले किए गए,इस खेल में सफेद कॉलर वाले भी शामिल

आबकारी विभाग में रामनरेश त्रिपाठी के हैं कई दलाल जो लाते हैं केस

निजी सचिव त्रिपाठी जी मुख्यालय भेजते थे फाईनल लिस्ट ,डिप्टी कार्मिक तिवारी जी देते थें हरी झंड़ी

ट्रांसफर-पोस्टिंग के रेट : उप निरीक्षक- 1.50-4 लाख रुपए, सिपाही व दिवान- 50 हजार रुपए- 1.50 लाख रुपए

संजय पुरबिया
लखनऊ। एक कहावत है जो पकड़ा जाए वो चोर,और जो बच गया वो साधु। उत्तर प्रदेश में मंत्रियों के साथ तैनात निजी सचिवों पर ये बात सटीक बैठ रही है। सरकारी विभाग में मंत्रियों के यहां तैनात निजी सचिवों की डकैती राज बदस्तूर कायम है। चलिए,मीडिया ने खबर दिखाई और तीन डकैतों की जगह सचिवालय,बापू भवन के बजाए अब सलाखों में है। अन्य मंत्रियों के यहां तैनात अधिसंख्य निजी सचिव आज भी ये खेल खेल रहे हैं लेकिन पकड़े नहीं जा रहे इसलिए वे पाक साफ, ईमानदार दिख रहे हैं लेकिन इनके भी हाथ कोयले की मानिंद काले हैं। अब तीनों निजी सचिव रामनरेश त्रिपाठी,ओमप्रकाश कश्यप और संतोष कुमार अवस्थी रंगे हाथ धरे जा चुके हैं तो इनके बारे में ज्यादा लिखने का मतलब है कि ये जेल से छूटने के बाद अपने को करप्शन का हीरो मानने लगेंगे लेकिन कलमकार हूं इसलिए कुछ और सच्चाई से आपलोगों को रूबरू कराना मेरा नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है। कैबिनेट मंत्री अर्चना पाण्डेय के पास खनन एवं आबकारी विभाग है। इनके निजी सचिव जो अब सलाखों के पीछे रिरिया रहे हैं,आबकारी विभाग में गजब का जलवा कायम था।


आज ये बताता हूं कि मंत्रीजी के कमरे में बैठकर किस तरह अपना जादुई छड़ी घुमाते थें और जलवे से ट्रांसफर-पोस्टिंग करा कर अपने लोगों को तो करोड़पति बना ही दिए और खुद भी बन गए करोड़पति…। एसआईटी के अफसरानों को आबकारी विभाग में सिपाही से लेकर उप-निरीक्षकों के तबादले की भी जांच करनी चाहिए क्योंकि सारे तबादले मंत्री के निजी सचिव राम नरेश त्रिपाठी द्वारा बनाए गए लिस्ट से ही हुआ है। द संडे व्यूज़इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ डॉट कॉम तबादले के बदले दिए गए माल की लिस्ट भी लिख रहा है। जिसने माल दिया उसे मिल गई मनचाही तैनाती और जो रह गया उसे उठाकर दूर फेंक दिया गया।निजी सचिव रामनरेश त्रिपाठी आबकारी मंत्री अर्चना पाण्डेय के यहां तैनात थें जिन्हें एक चैनल ने स्टिंग के दौरान रंगे हाथ खनन की दलाली करते हुए पकड़ा,जिस पर उन्हें जेल की हवा खानी पड़ी। हालांकि वे आबकारी विभाग के भी निजी सचिव थे। भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि रामनरेश त्रिपाठी ने ट्रांसफर-पोस्टिंग के बड़े खेल में अपने विभागीय दलालों को लगा रखा था।

बताया जाता है कि निजी सचिव रामनरेश त्रिपाठी के इशारे पर विभाग में तैनात तथाकथित कर्मचारी उप-निरीक्षक एवं सिपाहियों के ट्रांसफर के मामले लेकर आते थे। बताया जाता है कि सरकार बनने के बाद से अब तक लगभग 300 उप-निरीक्षक,सिपाही एवं दिवान का तबादला निजी सचिव रामनरेश त्रिपाठी के इशारों पर किया गया है। सिपाही और दिवान के ट्रांसफर-पोस्टिंग का रेट 50 हजार रुपए से लेकर 1.50 लाख एवं उप-निरीक्षक के ट्रांसफर-पोस्टिंग के रेट 1.50 लाख रुपए से लेकर 4 लाख रुपए तक चले हैं। होता क्या है,कईयों की मांग होती है कि होम डिस्ट्रीक के पास या फिर मलाईदार पोस्ट पर भेज दें। इसी आधार पर रूपए की मांग बढ़ती जाती है। ऐसा नहीं कि सारे रूपए त्रिपाठी जी के जेब में गया। बड़े लोगों का मुंह काफी बड़ा होता है,मेरा इशारा, एसआईटी के अफसरान तो समझ ही गए होंगे…।

अफसरों ने बताया कि बापू भवन में तैनात निजी सचिव रामनरेश त्रिपाठी के पास जब दलाल माल और नाम पहुंचा देते थें,उसके बाद इनका खेल तूफानी रफ्तार से शुरू होता था। ये प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय,इलाहाबाद भेज देते थें। मुख्यालय के कार्मिक विभाग में तिवारी जी से निजी सचिव श्री त्रिपाठी की मजबूत सेटिंग थी। सारे ट्रांसफर-पोस्टिंग कार्मिक विभाग द्वारा ही होता है,इसलिए श्री त्रिपाठी ने शातिराना चाल चला और तिवारी जी को कार्मिक विभाग में तैनात करवा दिया। डकैती में एक हिस्सा उक्त अधिकारी को भी जाता होगा।

खैर,ये तो जांच का विषय है,इस पचड़े में कलमकारों को पडऩे की जरूरत नहीं है। लेकिन एक बात तो है कि त्रिपाठी जी और तिवारी जी ने मिलकर ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल में जो चौव्वा-छक्का जड़ा इसका यदि एसआईटी ने खुलासा किया तो इनके अलावा कई लोगों के नाम उजागर हो सकते हैं,जो कालर सफेद कर इठला रहे हैं। यदि एसआईटी के अफसरों ने निजी सचिव रामनरेश त्रिपाठी के मोबाइल नंबर 9454410161 पर्सनल नंबर की जांच करा ली जाए तो आबकारी विभाग के सारे दलाल उप-निरीक्षक,निरीक्षक सहित कई बड़े नाम का खुलासा हो सकता है। कुल मिलाकर यही कहना है कि आबकारी,खनन मंत्री के निजी सचिव रामनरेश त्रिपाठी द्वारा अभी तक आबकारी विभाग में किए गए 300 उपनिरीक्षक,सिपाही व दिवान के ट्रंासफर-पोस्टिंग में कमाए गए काली कमाई की भी जांच होनी चाहिए।

Post Author: thesundayviews

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