कुम्भ : जय श्रीराम के उद्घोष के साथ अनि अखाड़ों ने किया मेले में प्रवेश

सात हाथी और 18 ऊंट और दो दर्जन बग्घी

मोदी-योगी का भी हुआ बखान

प्रयागराज

कुम्भ मेले में प्रवेश के लिए तीनों अनि अखाड़ों (दिगंबर, निर्वाणी और निर्मोही) ने एक साथ सोमवार को पेशवाई निकाली। शहर के केपी इंटर कॉलेज से जयश्री राम के उद्घोष से शुरू हुई मेला प्रवेश यात्रा सेक्टर 16 के मेलाक्षेत्र स्थित छावनी तक पहुंची। हाथी, घोड़े और ऊंट पर सवार महामंडलेश्वरों की झलक पाने के लिए लोग बेताब दिखाई दिए।


दोपहर 12 बजे केपी इंटर कॉलेज मैदान से जैसे ही पेशवाई की शुरुआत हुई, आगे हाथी, ऊंट, बजरंग बली के प्रतीक ध्वजा पताका लिए अखाड़े के संत चल रहे थे। इसके पीछे रामानंदाचार्या स्वामी हंसदेवाचार्य के नेतृत्व में पेशवाई में शामिल साधु समाज मेला क्षेत्र की ओर निकला। महात्मा गांधी मार्ग, सीएमपी डॉटपुल, मधवापुर सब्जी मंडी, अलोपीबाग आश्रम, एफसीआई गोदाम, दारागंज, मोरी दारागंज के रास्ते पेशवाई त्रिवेणी पुल से मेला क्षेत्र में पहुंची।

पेशवाई की शोभा बढ़ाने के लिए सात हाथी, पांच ऊंट, 18 घोड़े और दो दर्जन से अधिक बग्घी शामिल रही। बग्घी पर सवार थे अखाड़े के महामंडलेश्वर रामजी दास, चिन्म्यानंद, कनिराम बापू, सीताराम दास शामिल थे। तीनों अखाड़ों के कोषाध्यक्ष गंगादास, महंत धर्मदास, मोहनदास, कृष्णदास, राजेंद्रदास आदि प्रमुख साधु संत मौजूद रहे।

पेशवाई में लगभग एक दर्जन बैंड बाजे शामिल हुए। इसमें गंगा तेरा पानी अमृत, गंगा मइया में जब तक कि पानी रहे, है प्रीत जहां की रीत सदा जैसे गीतों के साथ ही बोल रहे हैं तीन ही नाम, योगी, मोदी, जयश्रीराम जैसे गीत भी खूब बजे। केपी इंटर कॉलेज से मेला क्षेत्र छावनी तक का रूट कुल सात किलोमीटर का था। लगभग दो किलोमीटर तक पेशवाई में संत ही थे। दोपहर 12:30 बजे पेशवाई का एक सिरा तिकोनिया चौराहे पर था तो दूसरा सिरा केपी इंटर कॉलेज मैदान तक। 

अखाड़ों के संतों ने पाटा, चक्र का अनूठा करतब दिखाकर सभी का ध्यान आकर्षित किया। पेशवाई में आगे चल रहे अखाड़े के अध्यक्ष महंतों के सामने एक-एक कर साधु आते और सधा हुआ करतब दिखाते। पाटे का करतब देखकर तो कई बार लगता किसी को चोट न लग जाए लेकिन संतों के हाथ और कदम सधे हुए थे। संतों का जगह-जगह स्वागत किया गया। मोरी पर जिला प्रशासन की ओर से संतों का स्वागत हुआ। मेला अधिकारी विजय किरण आनंद समेत तमाम अधिकारियों ने संतों को माला पहनाकर उनका स्वागत किया। वहीं महानिर्वाणी अखाड़े ने पहले अलोपशंकरी मंदिर और फिर मेला छावनी के बाहर भी स्वागत किया। सभी अखाड़े के सदस्यों ने एक-एक कर संतों का जगह-जगह स्वागत किया।

Post Author: thesundayviews

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