अतीक के आगे नतमस्तक है जेल प्रशासन

देवरिया। 

देवरिया जिला कारागार में बंद अतीक अहमद के आगे जेल प्रशासन बौना साबित हो रहा है। अतीक जेल से अपना साम्राज्य चला रहा है। लखनऊ के रियल एस्टेट कारोबारी के साथ हुई घटना इसी की बानगी है। यह पहला मामला नही है। इससे पहले भी अतीक द्वारा जेल से दो कारोबारियों को धमकाने के मामले आ चुके हैं।  सूबे में नई सरकार बनने के बाद माफियाओं पर नकेल लगाने की कवायद शुरू हुई थी। इसके बाद 4 अप्रैल 2017 को अतीक अहमद को प्रयागराज के नैनी जेल से देवरिया जेल भेज दिया गया था। कुछ दिनों तक तो सबकुछ ठीक रहा लेकिन बाद में अतीक अहमद का जेल में सिक्का चलने लगा। सूत्रों की मानें तो जेल में अतीक से मिलने वालों को जेल की सामान्य औपचारिकता भी नहीं पूरी करनी पड़ती है। गेट पर नेताजी से मिलने की बात कहते ही न मुहर लगती है और न ही कोई इंट्री होती है। अब तक जेल में  पिटाई व धमकाने के तीन मामले सामने आ चुके हैं।

घटना एक-
22 नम्बर 2018 को अतीक अहमद ने इलाहाबद के जैद खालिद, उमैश अहमद और अभिषेक पाण्डेय को अपने गुर्गों के माध्यम से जिला कारागार में बुलवाकर पिटाई की थी। तीनों ने इलहाबाद पहुंच कर एक अस्पताल में इलाज कराया था। मामला अधिकारियों के सामने आने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। न ही कोई मुकदमा दर्ज हुआ।

घटना नम्बर 2-
पूर्व विधायक राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल को जेल से धमकी दी गई। उससे गवाही व मुकदमे की पैरवी से हटने को कहा गया। इस मामले में 10 दिसम्बर को प्रयागराज के घूमनगंज थाना क्षेत्र के जयंतीपुर गांव के रहने वाले उमेश पाल की तहरीर पर अतीक अहमद, मोहम्मद तालिब, फरहान, अकबर और पूर्व विधायक अशरफ के खिलाफ केस दर्ज हुआ था।

घटना नम्बर 3-
जिला कारागार में पिछले दिनों एक व्यक्ति अपनी रिश्तेदारी के एक व्यक्ति से मिलने आया था। इसी बीच उसे बाहुबली से मिलने के लिए बुलाया गया। उसने इसकी नाफरमानी कर दी। बस क्या था, उसे बैरक में बुलाकर जमकर पीटा गया। यह घटना चर्चा में तो रही लेकिन न तो मुकदमा दर्ज हुआ और न ही कोई कार्रवाई जेल प्रशासन की तरफ से की गई।

घटना नम्बर 4-
चौथी घटना लखनऊ के प्रापर्टी डीलर मोहित जायसवाल के साथ हुई है। 26 दिसंबर को अतीक ने गुर्गों के सहारे अपहरण कराकर जिला कारागार में लाकर मारपीट करने के बाद उसकी 45 करोड़ की सम्पति अपने नाम करा ली। इस मामले में 28 दिसंबर को लखनऊ में अतीक समेत अन्य लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ है। अतीक के आने के बाद से जब भी जिला कारागार में छापेमारी हुई हर बार उसकी बैरक से आपत्तिजनक सामान मिले। इसमें मोबाइल, चाकू, पेन ड्राइव, गुलेल समेत शामिल है। छापेमारी के दौरान उसकी अधिकारियों से भी नोकझोंक की बात सामने आ चुकी है। हद यह है कि इन मामलों में जेल प्रशासन की तरफ से अज्ञात के नाम पर केस दर्ज करा कर कोरमपूर्ति कर दी गई। छापेमारी में तत्कालीन जिलाधिकारी से नोकझोंक के बाद अतीक को दूसरी जेल में शिफ्ट करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया था, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

दिलीप कुमार पाण्डेय, जेल अधीक्षक देवरिया का कहना है कीजेल में बंद अतीक से मिलने के लिए लोग आते हैं। 26 दिसम्बर को भी लोग आए हुए थे। मारपीट के बारे में जानकारी नहीं है। शिकायत की है तो उच्चाधिकारी इसकी जांच करेंगे। जेल की औपचारिकता पूरी होने के बाद ही किसी की मुलाकात कराई जाती है।

Post Author: thesundayviews

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