विधायिका के सामने मिमियाते दिखें दारोगा,दबंग स्टाइल में हवालात से निकले हमलावर

इटावा में कमल यात्रा मुरझाई, चली रायफल से ठांय-ठांय-ठांय …

ब्लाक प्रमुख, महेवा शिवहरे दूबे ने भाजपा नेता गोविंद त्रिपाठी पर रायफल से कराया हमला

पुलिस ने दो को किया गिरफ्तार, भरथना विधायिका सावित्री कठेरिया ने कराया रिहा

शेखर यादव
इटावा। भाजपा की कमल संदेश पदयात्रा अपने मकसद से भटक गई। माथे पर तिलक लगाकर,भगवा रंग ओढक़र भाजपाई बनने का दम रखने वाले कार्यकर्ताओं ने अपनी हरकतों से मुख्यमंत्री के वायदों की धज्जियां उड़ाकर रख दी। इटावा में चार दिसंबर को ग्राम बहेरा, थाना बकेवर में कमल संदेश पद यात्रा निकाली गई। कमल यात्रा के बाद ब्लॉक प्रमुख, महेवा एवं जिलाध्यक्ष,इटावा शिवहरे दूबे ने भाजपा नेता गोविंद त्रिपाठी एवं उनके समर्थकों के ऊपर रायफल से जानलेवा हमला कर दिया।

बात सिर्फ इतनी थी कि गोविंद त्रिपाठी ने जिलाध्यक्ष, इटावा शिवहरे दुबे की शिकायत कुंवर मानवेंद्र सिंह से कर दी थी। कुंवर मानवेंद्र सिंह भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं। गोविंद त्रिपाठी ने जिला मुख्यालय आकर एसएसपी से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दो कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जिन्होंने रायफल से हमला किया था। मजेदार बात तो यह है कि भरथना की विधायिका सावित्री कठेरिया थाने पहुंची और खाकी को अर्दब में लेकर दोनों अभियुक्तों को छुड़ाकर चलती बनीं। सवाल यह कि क्या भाजपा की सरकार में खाकी, खादी की उंगलियों पर नाच रही है।

इस घटना की सच्चाई से रूबरू होने के लिए द संडे व्यूज, इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ की टीम इटावा पहुंची। भाजपा जिलाध्यक्ष शिव महेश दुबे से कई बार फ ोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। उसके बाद थाना बकेवर पहुंचकर जांच अधिकारी ने जवाब मांगा, लेकिन उन्होंने इस मामले में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। सिर्फ यही कहा कि अभी जांच चल रही है।


सवाल ये उठता है कि आखिर हमारे माननीय और पुलिस के अफ सर इस घटना के बारे में सच्चाई बताने से क्यों कतरा रहे हैं। मुख्यमंत्री जहां स्वच्छ प्रशासन, सुशासन देने की बातें करते हैं,लेकिन कार्यकर्ताओं की इन हरकतों ने सरकार की पोल खोल कर रख दी है। जिस तरह से हवालात से रायफल से हमला करने वाले दो लोगों को विधायिका ने छुड़ाया, उससे साबित होता है कि इस सरकार में खाकी पर अपराधी पूरी तरह से हावी हैं। तभी तो विधायिका को इस बात की जानकारी थी कि दोनों ने रायफल से हमला किया है,उसके बाद भी उन्हें सलाखों से निकाल लिया। सवाल यह भी है कि जब दोनों कार्यकर्ता अपराधी थे तो पुलिस ने किस आधार पर उन्हें छोड़ दिया। इस घटना का सूबे में जमकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया जिसे देश ने देखा।

Post Author: thesundayviews

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