बच्चों, दांतों को स्वस्थ रखना है तो फास्ट फूड छोड़ो : डॉ. प्रियंका त्रिपाठी

कोल्ड ड्रिंक पीने से बढ़ता है शुगर का स्तर,दांतों का ऊपरी सतह घिस जाता है

दिव्या श्रीवास्तव

लखनऊ। बचपन भी कितना खूबसूरत होता है। बच्चे खाने-पीने के लिए जो मांग दें,मम्मी-पाना तुरंत उसे खरीद कर दे देते हैं। दुलार में मम्मियां ये भी नहीं सोचती कि वे अपने बच्चों को खाने के लिए जो कुछ भी दे रही हैं, उससे उसे फायदा होगा या नुकसान। यही वजह है कि बचपन के खान-पान की वजह से ही इस समय बच्चों में दांतों की समस्याएं बढ़ती जा रही है। मासूम बचपन लेकिन दांतों में झनझनाहट, बेइंतहा दर्द से बच्चों का जीना दुभर हो गया है। दंत चिकित्सकों के यहां यदि बड़ों की भीड़ है तो बच्चों की संख्या भी कम नहीं है। इसके लिए सीधे तौर पर मां-बाप ही जिम्मेदार हैं।

यदि बच्चों के खान- पान में थोड़ी सी सावधानी बरती जाए तो बच्चों के दांतों की चमक बिखरने लगेगी। जी हां,इतनी सारी बातें मैं नहीं बल्कि आलमबाग में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस सिटी हॉस्पिटल की दंत चिकित्सक (मैक्सिलोपोशियल ) सर्जन डॉ.प्रियंका त्रिपाठी एवं (प्रोस्थोडान्टिस्ट) डॉ. आकाश पुरी ने बताई है। तो फिर देर किस बात की आप डॉ. के सुझाव पर अमल करें और आपके बच्चों के दांतों की चमक देख दूसरे बच्चों में भी प्रतिस्पर्धा हो कि वे अपने दांतों को कैसे ठीक रखें…

8 से 15 वर्ष के बच्चों की दांतों में कीड़े लगने एवं दांत सडऩे की समस्याओं से लगभग सभी परिजन परेशान हैं। इसे ठीक करने के लिए क्या किया जाए? इस पर डॉ. प्रियंका त्रिपाठी ने बताया कि सभी बच्चों की दांतों में कीड़े लगे होते हैं। ये समस्याएं इसलिए होती है क्योंकि बचपन में अपने बच्चों को दूध पिलाते समय मां सफाई पर विशेष ध्यान नहीं देती। इसके अलावा जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या है,वे जब बच्चों को दूध पिलाती हैं,तो बच्चों के दांतों में कीड़े अपने आप लगने लगते हैं।

प्रियंका त्रिपाठी ने बताया कि इस उम्र के बच्चों को पेप्सी,कोक सहित चिप्स व फास्ट फूड से परहेज करना चाहिए क्योंकि इनमें काब्रोहाइड्रेड पाया जाता है। ये खाने पर दांतों में ज्यादा चिपकता है। कभी-कभार स्वाद लेने के लिए ये चीजें खा सकते हैं। लेकिन,हमेशा एक बात का ध्यान रखें कि फास्ट फूड आपके सेहत और दांतों के लिए हानिकारक है।

डॉ. प्रियंका ने यह भी बताया कि साफ्ट ड्रिंक तो लेना ही नहीं चाहिए क्योंकि ये शुगर लेबल का बढ़ाने का काम करता है। ये दांतों के ऊपरी सतह को घिसने का काम करता है। इसके लिए मम्मियों को एक काम करना चाहिए। वे अपने बच्चों को खाने के बाद माउथवॉश या सादे पानी से तुरंत कुल्ला कराएं। इसके अलावा सुबह-शाम यानि दिन में दो बार ब्रश कराएं।

वहीं,डॉ. आकाश पुरी का कहना है कि बच्चों को खुद भी अपनी दांतों का ध्यान देना चाहिए। वे जब भी ब्रश करें,ज्यादा दबाव ना डालें। अक्सर लोग ब्रश करते समय दांतों पर ज्यादा दबाव डालते हैं,जो गलत है। आपको बस इतना करना है कि ब्रश करते समय किस तरीके से उसे चलाना है,डेंटिस्ट से जान लें,ताकि आपका दांत और उसके मसूड़े लंबे समय तक स्वस्थ रहे।

आकाश पुरी ने यह भी बताया कि दांतों पर ब्रश से ज्यादा दबाव डालने से मसूड़े प्रभावित होते हैं। इस बात का भी ध्यान दें कि दांतों को जिस तरह की तकलीफ है,उसी मुताबिक दंातों को ब्रश करें।

Post Author: thesundayviews

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