सरकार को कोसें या पुलिस के अफसरानों को,यही हाल रहा तो खाकी भूल जाएगी ‘ईमानदारी’

पुलिस के किस दस्तावेज में लिखा है,‘आत्म रक्षा के लिए गोली चलाना अपराध है’ !

 आतंकियों को मिल जाते हैं वकील, ईमानदार एसआई शैलेन्द्र सिंह के लिए कोई नहीं…

 शैलेन्द्र सिंह का परिवार भूखमरी की कगार पर, फीस अदा न करने पर बच्चों का स्कूल से नाम कटा

 धिक्कार है ऐसे ‘सिस्टम’ पर जिसने एक परिवार को पूरी तरह से तबाह कर दिया

 मां-बाप, भाई, सास ने तोड़ा दम, अब सरकार किसकी लेगी बली?

संजय पुरबिया
लखनऊ। नाम शैलेन्द्र सिंह। यूपी पुलिस का जांबाज सब इंस्पेक्टर। तैनाती नारी बारी पुलिस चौकी,इलाहाबाद। 13 मार्च 2015 को अपने आत्मरक्षा के लिए सर्विस रिवाल्वर से गोली चलाई जिससे वकील नबी अहमद की मौत हो गई। तब से लेकर अभी तक शैलेन्द्र सिंह जेल की सलाखों में हैं। साक्ष्य चीख-चीख कर बताते हैं कि वर्दी के लिए आन-बान-शान की शपथ खाने वाले इस नौजवान को जब कोई रास्ता नहीं मिला तो अपनी जान बचाने के लिए सेल्फ डिफेंस में फायर किया था। सरकार और विभाग के अफसरों को सब कुछ दिखा लेकिन वकीलों का मामला था इसलिए सभी खामोश हैं। ऐसा लगा मानों नबी अहमद की मौत का सरकार और पुलिस विभाग के बड़े अफसरानों ने सौदा कर दिया हो कि एक सब इंस्पेक्टर की बली ले लो वर्दी पर सितारों की संख्या में इजाफा भी हो जाएगा और गुस्से से खौल रहे वकीलों का आक्रोश भी कमतर हो जाएगा। खाकी और खादी के नाम पर ईमानदारी,वसूल की बातों से जनता को बरगलाने वालों का बेहद घिनौना चेहरा अब सबके सामने है।

सच ये है कि सरकार और पुलिस विभाग के अफसरों की घटिया सोच ने एक शैलेन्द्र सिंह को जेल की सलाखों में नहीं डाला बल्कि कई मौतों के जिम्मेदार बन गए हैं। शैलेन्द्र के जेल जाने के बाद उसका हंसता परिवार पूरी तरह से बिखर गया। ऐसा लगा मानों प्रकृति ने उसके परिवार को पूरी तरह से तहस-नहस करने का मन बना लिया हो। उसके जेल जाने के सदमें को उसके मां-बाप नहीं झेल सकें। दोनों की मौत हो गई। शैलेन्द्र सिंह के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा कि उसने अपने मां-बाप को मुखाग्नि तक नहीं दे सका। अचानक परिवार पर हुए इस बज्रपात से उनका छोटा भाई अपना मानसिक संतुलन खो बैठा है। केस की पैरवी कर रहे सगे साले की दुर्घटना में मौत हो गई। शैलेन्द्र सिंह की पत्नी अपने दोनों बच्चों को लेकर अपने मां-बाप के घर पर रह रही है। अपने पति को इंसाफ दिलाने के लिए उनकी पत्नी ने घर के सारे सामान,जेवर तक बेच डाले लेकिन इंसाफ तो दूर उनके साथ कोई खड़ा नहीं हो रहा है। सबसे शर्मनाक बात तो यह है कि अब आर्थिक तंगी की वजह से स्कूल से उनके दोनों बच्चों का नाम कटने की नौबत तक आन पड़ी है।

शैलेन्द्र सिंह की पत्नी ने हर उस दरवाजे को खटखटाया जहां से उन्हें उम्मीद थी लेकिन हर जगह से उन्हें नाउम्मीदें मिलीं। इस केस को लडऩे के लिए कोई वकील तैयार नहीं हो रहा है। ऐसा लग रहा है मानों वो शैलेन्द्र सिंह का केस ना होकर किसी आतंकी की वकालत कर रहे हों। सबसे अहम सवाल यह है कि हिन्दुस्तान में आतंकियों के लिए वकील मिल जाते हैं लेकिन एक जांबाज सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह का केस लडऩे का माद्दाकिसी में नहीं…। सवाल यह भी है कि घटना सपा सरकार में हुई इसलिए उस दौरान पुलिस विभाग में तैनात बड़े अफसरों ने आखिर क्यों नहीं अपने होनहार सब इंस्पेक्टर के उस मान-सम्मान को बचाया जिसकी कसम खाकर उसने ये खाकी वर्दी पहनी थी…। क्या पूर्व की सरकार ने इसलिए शैलेन्द्र को जेल की सलाखों में डाल दिया ताकि वकीलों का वोट बैंक उनसे ना खिसक जाए? सवाल यह भी है कि भाजपा की सरकार में आखिर सरकार और पुलिस विभाग शैलेन्द्र सिंह के मामले में क्यों नहीं तेजी दिखा रहे हैं।

जब वीडियो की रिकार्डिंग में साफ तौर पर दिख रहा है कि शैलेन्द्र सिंह ने अपनी आत्मरक्षा के लिए सरकारी रिवाल्वर से फायर किया था और उसकी गोली से जिस वकील की मौत हुई उस पर लगभग आधा दर्जन मुकदमा दर्ज है। उस समय यदि सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह गोली नहीं चलाता तो उसकी मौत निश्चित थी। पुलिस के अफसरानों से मेरा एक सवाल है कि आखिर किस दस्तावेज में लिखा है कि अपने आत्मरक्षा के लिए सर्विस रिवाल्वर से फायर करना अपराध है? यदि कभी आपलोग इस तरह से घीर जाएंगे और आपलोगों को लगेगा कि अब जान नहीं बचेगी तो क्या आपलोग अपनी सर्विस रिवाल्वर से फायर करेंगे या फिर उसे अपने कमर की शोभा बढ़ाते हुए शहीद होना मंजूर करेंगे…। सही जवाब तो आप और आपका परिवार ही दे सकता है…

13 मार्च 2015 यानि चार सालों से सलाखों के पीछे बंद है यूपी पुलिस का एक सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह। इलाहाबाद के नारी बारी पुलिस चौकी पर तैनात शैलेन्द्र का कसूर बस इतना था कि इसने अपने बचाव में अपनी सर्विस रिवाल्वर से अधिवक्ता नबी अहमद को गोली मार दी थी। अधिवक्ता की हत्या से पूरे देश भर के वकील सडक़ पर उतर आए थे। वकीलों ने इस वर्दी वाले का केस तक लडऩे से मना कर दिया था और जिस वकील ने पैरवी की कोशिश भी कि उसे भी डरा- धमाकर पीछे हटवा दिया गया। ताज्जुब की बात यह है कि पुलिस विभाग के मतलब परस्त अफसरों ने भी इस केस से अपने हाथ पीछे खिंच लिए। इससे शर्मनाक बात और क्या हो सकती है कि जिस देश में आतंकी अजमल कसाब और कातिल याकूब को वकील नसीब हो गया वहां आज तक जेल में बंद इंस्पेक्टर शैलेंद्र अपने केस के लिए किसी वकील के आने का इंतजार कर रहा है। आज इस वर्दीवाले का पूरा घर बर्बाद हो चुका है।

आइए घटना पर एक नजर डालते हैं। आखिर उस दिन क्या हुआ था जिससे एक नौजवान सब इंस्पेक्टर पर हत्यारा होने का दाग लगा और उसके परिवार पर मातम की तिरछी नजर गड़ गई। कभी नारी बारी पुलिस चौकी के इंचार्ज शैलेंद्र पर कोर्ट में ही जानलेवा हमला हुआ था। इस हमले में उसकी जान जाने की पूरी आशंका थी हमला करने वाला था एक वकील नबी अहमद जिस पर कम से कम आधा दर्जन मुकदमे दर्ज होंगे। बताया जाता है कि जब सब इंस्पेक्टर शैलेंद्र सिंह पर हमला हुआ तो इस वर्दीवाले ने आत्मरक्षा की खातिर अपनी सर्विस रिवाल्वर से गोली चला दी थी ये गोली नबी अहमद को लगी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस पूरी घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमे साफ तौर पर देखा जा सकता है कि उस समय दर्जनों हमलावरों से घिरा अकेला सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह मोब लिंचिंग का शिकार हो रहा था जिसका नेतृत्व नबी अहमद कर रहा था। नबी अहमद साफ तौर पर सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की पिटाई करते हुए देखा जा सकता था। लेकिन आत्मरक्षा के लिए शैलेंद्र सिंह का गोली चलाना उनकी जिंदगी को तहस- नहस कर गया। वकील तो उनके खिलाफ हो ही गए थे उनके खुद के महकमे ने उनका साथ नहीं दिया । हैरान कर देने वाली बात थी कि इलाहाबाद परिक्षेत्र की पुलिस ने अपने ही विभाग के सब इंस्पेक्टर को सलाखों के पीछे भेजने के लिए दिन- रात एक कर दिया था और आत्मरक्षा करने वाले उस सब इंस्पेक्टर को हत्यारा घोषित कर कई धाराएं लगाकर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। आज तक ये सब इंस्पेक्टर जमानत के लिए तरस रहा है लेकिन उम्मीद की किरण कोसों दूर भी नजर ऩहीं आ रही।

शैलेंद्र के जेल जाने के बाद से उनका भरा-पूरा परिवार तबाह हो गया। इन चार सालों में उसके माता पिता की मृत्यु हो गई और जेल में बंद इस बेटे की बदकिस्मती तो देखिए कि वो अपने मां- बाप की चिता को मुखाग्नि भी ना दे पाया। वहीं, उसका एक छोटा भाई इसी के चलते पागल हो गया। किस्मत का खेल यही नहीं थमा फि र उनकी पैरवी करता उनका साला भी एक एक्सीडेंट में सदा के लिए खामोश हो गया और उसी दु:ख में सब इंस्पेक्टर की सास भी चल बसी। और पूरा परिवार खत्म सा हो गया लेकिन अब भी बदकिस्मती शैलेंद्र और उसके परिवार का पीछा छोडऩे को तैयार नहीं दिख रही है। उसकी बेबस पत्नी सपना सिंह दो मासूम बेटियों को साथ लेकर कोई दर- चौखट नहीं छोड़ी होगी जहां इसने पति कि रिहाई के लिए गुहार ना लगाई हो, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। इलाहाबाद पुलिस के अधिकारी तो अपने वर्दी के सितारे बढ़वाते नजर आए कि देखो कैसे हमने अपने ही विभाग के सब इंस्पेक्टर को सलाखो के पीछे पहुंचा दिया।

आज सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की धर्मपत्नी सपना सिंह अपने पिता के साथ उनके ही घर पर अपनी दो बेटियों इशिता सिंह और सौम्या सिंह के साथ नाम के लिए जिंदगी काट रही है। क्योंकि खुशियां तो उनसे कब का नाता तोड़ चुकी है। बड़ी बेटी इशिता कक्षा 2 में पढ़ती है और सौम्या अभी नर्सरी में है। सौम्या ने तो अपने पिता को ठीक से देखा भी नहीं है क्योकि उसके जन्म के कुछ दिन बाद ही सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह जेल चले गए थे। बर्बाद हो चुके परिवार को पड़ोसियों ने भी नहीं छोड़ा और इनकी सारी जमीन- जायदाद हड़प ली। शैलेंद्र की पत्नी ने पति के मुकदमे के लिए अपना एक-एक गहना बेच दिया। धीरे- धीरे सब खत्म हो गया है। ना पैसा रहा और उम्मीद तो कब का साथ छोड़ चुकी है। हालात ये हैं कि शैलेंद्र सिंह का परिवार खाने के लिए भी मोहताज है। जब घर में अन्न का दाना नहीं है तो बेटियों की फ ीस कहां से भरी जाए। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि फ ीस ना भर पाने के चलते बेटियों के नाम तक कटने की नौबत आ चुकी है।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ’ के नारे देने वाली केंद्र और राज्य सरकार को तो इन मासूमों के हालात देखकर शर्म आनी चाहिए। लगभग चार साल से जेल में बंद उत्तर प्रदेश पुलिस का सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह सब कुछ अपनी आंखों से देख रहा है लेकिन ये मजबूर बाप और पति कैसे अपनी पत्नी और बेटियों को दुनिया की सारी खुशियां दे। लेकिन अफ सोस की जेल की सलाखों ›के पीछे शैलेन्द्र सिंह की सिसकियां गूंज रही है। वो जानते हैं कि अपने मासूम बेटियों,पत्नी के लिए चाहकर भी कुछ कर नहीं पाएंगे क्योंकि उनके विभाग के नकारे अफसरों ने जिस तरह से ताना-बाना बुनकर उन्हें फंसाया है,इससे वे शायद ही बाहर निक ल पाएं…। उन्हें उम्मीद है कि शायद कोई फरिश्ता आए और उन्हें बेगुनाह साबित कर यूपी पुलिस के चाटुकार अफसरों को करारा जवाब दे सके। क्योंकि अब सब इंस्पेक्टर के परिवार में सिर्फ उनकी पत्नी और दो बेटियां ही बची हैं। चर्चाओं की बात करें तो हर जुबां यही कह रही है कि भाजपा सरकार में ईमानदार खाकी को इंसाफ मिलना चाहिए। मेरा ये सवाल है कि आखिर सरकार और पुलिस विभाग के अफसरान किस बात का इंतजार कर रहे है? सदमे में कई अर्थियां निकल चुकी हैं,ये लोग अब किसकी बलि लेना चाहते हैं?

Post Author: thesundayviews

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