समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा बनने से जो बौखलाए वे ‘जमीनी’ नहीं ‘आसमानी’ नेता : शिवपाल यादव

चार साल नही सताई याद, चुनाव आते ही याद आने लगे ‘राम’ : शिवपाल यादव

नाम बदलने से क्या होता है काम करके दिखाएं

संजय पुरबिया
लखनऊ। उत्तर प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहां से संसद का सफर तय होता है। चाहें किसी भी राजनैतिक पार्टी का लीडर हो, सभी ख्वाब देखते हैं कि वे (राजनीति के मंदिर) संसद तक पहुंच जाए। ये तभी संभव है जब ‘माननीय’ चुनाव के दौरान किए गए वायदों को पूरा करें। ऐसा नहीं कि ‘माननीय’ बनने के बाद आप सिर्फ ‘लग्जरी लाइफ’ में जीने लगें। आप उन्हें भूल जाएं, जिनकी बदौदत आपको ‘सत्ता सुख’ मिल रहा है। मेरा मानना है कि सत्ता मिलने के बाद माननीयों को अपने क्षेत्र में विकास के कार्यों सहित सभी जाति के लोगों के विश्वास को अपने काम से इस तरह से प्रभावित करना चााहिए ताकि जब अगला चुनाव आए तो जनता उसे दुबारा काम करने का मौका दे। आप भाजपा सरकार की बात करते हैं तो इतना ही कहूंगा कि चुनाव करीब आते ही ये लोग ‘राम राग’ अलापने लगते हैं।

विकास की बातों के बजाए स्टेडियम का नाम बदलने लगते हैं। आप ही बताएं क्या पुलिस-प्रशासन को अपराध पर रोक नहीं लगाना चाहिए? क्या विकास के कार्यों को नहीं कराना चाहिए? क्या बेरोजगारी दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर नहीं उपलब्ध कराना चाहिए …।  कुछ इसी तरह के सवालों को दागते हुए यूपी के कद्दावर नेता एवं समाजवादी सेक्यूलर मोर्चे के संयोजक शिवपाल सिंह यादव ने पूरी बेबाकी के साथ द संडे व्यूज़,इंडिया एक्सप्रेस एवं सैल्यूट स्टार के ब्यूरो चीफ संजय पुरबिया से बात की। पेश है खास बातचीत के प्रमुख अंश –

सवाल : लोक सभा चुनाव करीब है। भाजपा राम मंदिर का राग छेडक़र हिन्दुत्व जगाने की भरपूर कोशिश कर रही है,आप क्या कहेंगे? क्या रामलला अब तिरपाल से निकलकर मंदिर में जाएंगे?

जवाब : देखिए, जब चुनाव आता है तो भाजपा वालों को ‘राम जी’ की याद सताने लगती है। चार साल तक इन लोगों ने क्या किया। इतना लंबा समय हो गया आखिर ये लोग क्या कर रहे थे। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, सभी को इंतजार करना होगा। कोर्ट जो फैसला सुनाएगी,उसे सभी को मानना चाहिए। वैसे भी सूबे की जनता किसी के बरगलाने से बेवकूफ नहीं बनने वाली। उन्हें मालूम है कि ‘राम सभी के हैं’।

सवाल: सरकार किस चीज पर चलती है, विश्वास या अविश्वास ?

जवाब : किसी पार्टी की सरकार हो, यदि उसमें इकबाल नहीं है तो उसका गिरना तय है । विश्वास पर ही सारा काम होता है और जिस सरकार में इकबाल ही ना हो वो लंबे समय तक नहीं चल सकती।

सवाल: समाजवादी पार्टी सेक्यूलर मोर्चे के गठन के बाद सभी राजनैतिक दलों में बौखलाहट सी मची है, ऐसा क्यों?
जवाब: देखिए, मैं जमीनी नेता हूं। मैं जनता की जरूरतों के हिसाब से अपना काम करता हूं। मुझे मालूम है कि गरीब, मध्यम एवं अमीरों को किसी चीज की आवश्यकता है। मोर्चे के गठन के बाद जो लोग बौखला रहे हैं वे जमीनी नहीं ‘आसमानी नेता’ हैं।

सवाल: मोर्चे को कैसे आगे बढ़ाएंगे ?
जवाब : जनता ने सपा सरकार में मेरे काम को देखा है। पार्टी मुझे जितना काम सौंपती थी, उससे कहीं ज्यादा में करके रिजल्ट

देता था। यही वजह है कि नेता जी मुझ पर ज्यादा भरोसा करते हैं। वे आज भी मेरे साथ हैं। इस समय गरीब, किसान, बेरोजगार और मुसलमान सबसे अधिक परेशान है। मेरी कोशिश रहेगी कि इनकी जायज समस्याओं को दूर कर सकूं। आज मैं जो भी इन्हीं लोगों की वजह से हूं। और मेरी नई पार्टी से जुडऩे वाले कार्यकर्ता इनके लिए कुछ भी कर गुजरेंगे।

सवाल : सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. राम गोपाल से मीडिया ने सवाल किया कि शिवपाल यादव की पार्टी का जनाधार तेजी
से बढ़ रहा है, इस पर उनका जवाब था कि आपलोगों की मानसिक स्थिति खराब हो गई है। इसे क्या मानें उनकी बौखलाहट या सटीक विश्लेषण?

जवाब: भईया, इटावा ही नहीं पूरा उत्तर प्रदेश आने वाले समय में मेरे बिना नहीं चल पाएगा। मैं तो अपने राह पर निकल पड़ा हूं। युवा बेरोजगार, जिन्हें रोजगार की आस है वे मेरी तरफ देख रहे हैं, सवर्ण, मुसलमान या फिर पिछड़ी जाती के लोग इस उम्मीद में हैं कि मेरी सरकार बनेगी तो उनके सपनों को पंख लगेगा। जब सभी की चाहत शिवपाल सिंह यादव है तो जिसे जो बोलना है बोले, मुझ पर कोई असर नहीं पड़ता।

सवाल : भाजपा की सरकार बनने के बाद महिला उत्पीडऩ, अत्याचार की घटनाओं में तेजी से इजाफ ा हुआ है, आपकी सरकार बनी तो क्या करेंगे?
जवाब : आपलोगों को याद होगा,जब सपा की सरकार थी,उस दौरान यदि एक हत्या हो जाती थी तो यही भाजपा जो उस दौरान विपक्ष की भूमिका में थी, कोहराम मचा देती थी। अब, हर दिन सूबे में गैंगरेप,हत्या, बलात्कार, लूट जैसे जघन्य अपराध हो रहे हैं और साहेबान चुप्पी साध रखे हैं। आखिर ये लोग क्या बोलेंगे। सरकार अपराध, बेरोजगारी को लेकर पूरी तरह से फेल हो चुकी है। शिवपाल यादव ने कहा कि मेरी सरकार बनी तो सबसे पहले महिलाओं की सुरक्षा पर खास ध्यान देंगे। उनके लिए कई योजनाएं चलाई जाएंगी जिससे वे अपने को महफू ज कर सकें। इसके अलावा बेरोजगारी सहित अन्य मुद्दों पर ध्यान देंगे ताकि प्रदेश विकास की राह पर चल सके।

सवाल: भाजपा सरकार में स्टेडियम से लेकर शहरों के नाम बदलने की होड़ सी मची है। ऐसा नहीं लगता, इससे एक जाति वर्ग के लोगों के मन में गलत धारणाएं बन रही है?
जवाब : भाजपा सरकार अपने वायदे से मुकर रही है। प्रदेश की जनता सरकार द्वारा किए गए वायदों को पूरा होते देखना चाहती है,जिसमें ये लोग पूरी तरह से विफल हैं। क्रिकेट स्टेडियम या शहरों का नाम बदलने से कुछ नहीं होता,काम करके दिखाएं। बेरोजगारी,महंगाई,भ्रष्टïाचार बढ़ती जा रही है और ये लोग बातें विकास की कर रहे हैं। कहां है ‘विकास’? लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेई अंतराष्टï्रीय इकाना क्रिकेट स्टेडियम का नाम बदलने से कुछ नहीं होता। सरकार है, जो चाहें बदल सकती है। सरकार को चुनाव के दौरान किए गए नारों को बदलना चाहिए। उस समय नारा लगाया था कि सबको रोजगार देंगे,विकास की गंगा बहेगी,महंगाई कम करेंगे,लेकिन हुआ क्या? अपराध चरम पर है,महंगाई बढ़ती ही जा रही है,बेरोजगारों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। इस ओर सरकार का ध्यान क्यों नहीं जा रहा है।

सवाल : नई पार्टी से सूबे की जनता को उम्मीदें लगानी चाहिए या फिर आप भी चुनावी राग अलापेंगे?
जवाब: नई पार्टी बनी है, पार्टी की गूंज पूरे प्रदेश में हो रही है। सभी को मालूम है कि शिवपाल यादव जो कहते हैं उसे पूरा करते हैं… मैंने पिछली सरकार में प्रदेश को हाईवे से जोड़ा,सडक़ों का विकास कार्य कराने के साथ ही बड़ी संख्या में नौजवानों को रोजगार मुहैया कराया। यही वजह है कि आज मेरे साथ सभी वर्ग के लोगों का हुजूम है।

Post Author: thesundayviews

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