शिक्षा को तरसे मासूम , स्टैच्यू पर करोड़ों बरसे,ये कहां का रामराज्य-ओमप्रकाश राजभर

साधू-संत पेट भरने के लिए अलाप रहे हैं राम मंदिर राग: ओमप्रकाश राजभर

ब्यूरो
लखनऊ। अपने शानदार और बेअंदाज अंदाज से अपनी ही पार्टी की धज्जियां उड़ाने वाले कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के स्पीच की लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। इनकी सभा हो या फिर स्पीच लोगबाग इनकी बातों को सुनने के लिए इकट्ठा होते हैं क्योंकि ये मुखर हैं और जो दिल में है वो जुबां पर होता है। भाजपा सरकार में ऐसा कौन मंत्री है जो अपने ही सरकार की कलई खोलने का जीगर रखता है। मुझे तो ऐसा कोई नजर नहीं आता सिर्फ ओमप्रकाश राजभर के अलावा। इनकी बातें कड़वी हैं लेकिन बातों में दम है,सच्चाई है।

रदोई में आयोजित एक कार्यक्रम में ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि प्रदेश सरकार स्टैच्यू पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है लेकिन गरीब बच्चों के शिक्षा और स्वास्थ्य पर नहीं। यहां बच्चे शिक्षा व स्वास्थ्य को लेकर तरस रहे हैं वहीं स्टैच्यू पर करोड़ों बरस रहे हैं। अब अयोध्या में सरयू तट पर राम की भव्य प्रतिमा स्थापित करने में सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है।

उन्होंने कहा कि कुंभ पर सरकार 300 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। सरदार पटेल की मूर्ति पर 3000 करोड़ रुपये खर्च किए गए। अयोध्या में दीपावली पर्व पर 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए। अब अयोध्या में सरयू तट पर राम की भव्य प्रतिमा स्थापित करने में सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है। हम इसके विरोधी नहीं है, परंतु सरकार को सबसे पहले शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। प्राथमिक स्कूलों में एक लाख 69 हजार अध्यापकों की नियुक्ति करके 70 लाख बच्चों को शिक्षा मिलती, परंतु सरकार ने इसे निरस्त कर दिया। अति पिछड़ा और दलित लोगों के कल्याण के लिए अति पिछड़ा सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट आ चुकी है,लेकिन सरकार उसे ठंडे बस्ते में डाले हुए है।

प्रयागराज में ओम प्रकाश राजभर ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर विवादित बयान दिया है। कहा है कि साधू- संत राम मंदिर का राग सिर्फ इसलिए अलापते हैं, क्योंकि इससे उनकी रोजी- रोटी चलती है और उनका पेट भरता है। साधू- संत न तो खेती करते हैं और न ही मेहनत का कोई दूसरा काम। उनकी आमदनी का कोई दूसरा जरिया भी नहीं होता, इसलिए वह मंदिर राग अलापकर अपनी रोजी- रोटी का इंतजाम करते रहते हैं। मंदिर को लेकर उनके मन में कोई आस्था नहीं होती। उन्होंने साधू संतों समेत मंदिर की मांग उठाने वालों का मजाक उड़ाते हुए कहा है कि मंदिर जाने से किसी को स्वर्ग थोड़ ही मिल जाता है।

अगर उनके इस बयान से यसे लोग नाराज होते हैं तो भी उन्हें इसकी फि क्र नहीं होगी। साधू- संत नाराज होकर भी उनका कुछ बिगाड़ नहीं पाएंगे। उनके मुताबिक जिनकी आस्था मंदिर में है, वह उसके लिए आवाज उठा सकते हैंए लेकिन उनकी आस्था गरीबों- किसानों व परेशान लोगों में हैं, इसलिए वह उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए आवाज उठाते रहते हैं।

Post Author: thesundayviews

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *