video डीजीपी साहेब कहां है बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ जुमला,काकोरी पुलिस के आशीर्वाद से हिस्ट्रीशीटर गांव में बांका लेकर करता है हमला

हिस्ट्रीशीटर ने बेटियों के कपड़े फाड़ें, झोपड़ी में आग लगाकर जिंदा जलाने की कोशिश

पारा थाना के हिस्ट्रीशीटर रामकिशुन पर दर्जनों मुकदमा दर्ज,पुलिस नहीं कर रहा गिरफ्तार

 बच्चियां ट्रामा सेंटर में भर्ती,पूरा गांव दहशत में

पुलिस की जेब गरम करो और खुलकर करो गुंडई, गांव वाले दहशत में

संजय पुरबिया

लखनऊ। योगी राज में माफियाओं की पूरी दबंगई देखने को मिल रही है। माफिया हो या फिर इलाके-गांव के गुंडें,सभी थानों को सेट करने के बाद अपने आतंक को पिस्टल,बांका के साथ बोलते हैं हमला। इनका मकसद होता है कि गांव के लोग दहशत में रहें और फिर वे अपनी मनमानी करें। लखनऊ से चंद किलो मीटर दूर काकोरी जिसे शहीदों की शहादत के लिए याद किया जाता है लेकिन कुछ माह से एक पारा थाने के हिस्ट्रीशीटर राम बिलास उर्फ रामकिशुन ने पूरे गांव में दहशत फैला रखा है। राह चलती महिलाओं के अस्मत से खेलने,घरों में घुसकर बच्चियों के साथ अभद्र हरकतें करने और आग लगाकर जान से मारने जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहा है। पारा थाने में उसके खिलाफ दर्जनों मुकदमा दर्ज है लेकिन इंस्पेक्टर की इस पर क्यों इतनी मेहरबानी है,समझ से परे है। गांव वालों का कहना है कि हिस्ट्रीशीटर ने काकोरी और पारा थाने के इंस्पेक्टर को अपने वश में करने के बाद इतना बेखौफ होकर घटनाओं को अंजाम दे रहा है।

1 अक्टूबर को हिस्ट्रीशीटर रामबिलास उर्फ रामकिशुन पुत्र नन्हा,शशिमोहन पुत्र कंठू ,सीजू एवं शिवा पुत्र बलदेवन, सूरज उर्फ बउवा पुत्र रामजीवन,महेन्द्र पुत्र रामसूरत,अमन पुत्र जैपाल,रमेश पुत्र सोहन (सभी भपटामऊ थाना पारा के रहने वाले हैं) सरोज उर्फ छोटू एवं मनोज पुत्र गंगा,रामबिलास पुत्र अज्ञात (दोनों खेड़ा थाना काकोरी) के रहने वाले हैं। इसी तरह, रामपाल उर्फ पाले पुत्तु निवासी रानीखेड़ा,जानी पुत्र सोहन,रामकिशुन पुत्र नन्हा, रामसूरत पुत्र स्व.नन्हा,संदीप पुत्र रामखिलावन,धर्मेन्दे्र उर्फ बडकौना,पांडे पुत्र अज्ञात (निवासी भपटामऊ थाना पारा) के रहने वाले हैं।

 

इनलोगों ने 11 अक्टूबर को पिस्टल,बांका,लाठी-डंडों से लैस होकर शाम छह बजे भारत पुत्र स्व. चुरई के घर पर धावा बोल दिया। इनलोगों ने घर में मौजूद सभी सदस्यों पर लाठी-डंडे से हमला बोल दिया। गुंडों ने भारत की बड़ी बेटी आरती 20 वर्ष, प्रीती 17 वर्ष,रीती 15 वर्ष क्रीती 10 वर्ष एवं जितेन्द्र 12 वर्ष को बुरी तरह से मारापीटा और बेटियों के कपड़े फाड़ डाले,अभद्र व्यवहार किया। उसके बाद गुंडों ने गल्ला लूट कर दुकान और घर में आग लगा दिया। गुंडों की पूरी कोशिश थी पूरे परिवार को जलाकर मार डाले। इस घटना से भारत का परिवार ही नहीं पूरा गांव दहशत में है।


इस बात की सूचना गांव वालों ने काकोरी पुलिस को दी और किसी तरह भारत केे परिवार की जान बची। पुलिस ने घायल परिजनों को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। भारत और लड़कियों की गंभीर हालत देख चिकित्सकों ने उन्हें ट्रामा सेंटर रिफर कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में अपनी जान बचाने की खूब नौटंकी की। पुलिस ने ऐसे फर्जी लोगों को गिरफ्तार किया जो घटना के वक्त गांव में मौजूद थे ही नहीं…। संदीप जो वैष्णो देवी का दर्शन कर घटना के दो दिन बाद अपने घर पहुंचे,गिरफ्तार कर लिया गया,सुरेन्द्र थाने पर घायलों को देखने पहुंचा, उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

इसी तरह सुल्तान साढे पांच बजे तक कचेहरी में था,घायलों को देखने थाने पहुंचा उसे हवालात में डालकर पुलिस ने अपना गुडवर्क दिखा दिया। कुल मिलाकर काकोरी और पारा थाने के इंस्पेक्टर ने मामले को रफा-दफा करने के लिए फर्जी गुडवर्क का खेल खेलकर कई बेगुनाहों को हवालात के पीछे डालकर उनका भविष्य तो बर्बाद कर ही दिया लेकिन जो असली अपराधी हैं वे आज भी बेखौफ होकर गांव में घूम रहे हैं।

सवाल यह है कि बेटी बचाओ,बेटी बचाओ का नारा देने वाली योगी सरकार में पुलिस इसका पालन क्यों नहीं कर रही है? क्या खाकी सरकार की बातों पर अमल करने में अपनी तौहीन समझती है? क्या ये पुलिस की जिम्मेदारी नहीं बनती है कि वो इस मामले में शामिल सभी अभियुक्तों एवं हिस्ट्रीशीटर को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजकर गांव वालों को राहत महसूस कराएं? थाना पारा और काकोरी के इंस्पेक्टर यदि अपना पूरा ध्यान इलाकों से होने वाली वसूली की राशि बढ़वाने के बजाए अपराधों को नियंत्रण करने में लगाएं अन्यथा डीजीपी साहेब की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है,क्योंकि इस सरकार में अपराधियों के हौसले मस्त है और सरकार की हालत पस्त…

Post Author: thesundayviews

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