मेरठ जंगल में चलाई जा रही थी अवैध असलाह बनाने की फैक्ट्री, पुलिस ने मारी रेड

गिरोह के सदस्यों ने लिया बीजेपी विधायक सोम का नाम 

पांच सौ की लागत, दो हजार की बिक्री

मेरठ

सरधना पुलिस ने भामौरी के जंगल में चलाई जा रही अवैध असलाह बनाने की फैक्ट्री को पकड़ा है। फैक्ट्री में पुलिस ने 500 से ज्यादा बने-अधबने तमंचे-बंदूकें, असलाह बनाने की मशीनें और अन्य सामान के साथ छह लोगों को गिरफ्तार किया है। ये असलाह फैक्ट्री जिले में अभी तक की पकड़ी गई सबसे बड़ी फैक्ट्री बताई जा रही है।

पुलिस लाइन में एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि सरधना पुलिस को भामौरी के जंगलों में अवैध असलाह फैक्ट्री की सूचना मिली थी। इसी सूचना पर पुलिस ने दबिश दी। मौके पर ही छह आरोपियों को पकड़ा गया और भारी मात्रा में असलाह बरामद किए गए। खुलासा किया कि पकड़े गए आरोपियों में मुजफ्फरनगर और मेरठ दोनों जगह के हथियार तस्कर शामिल हैं। बताया कि पुलिस ने मौके से ही 500 से ज्यादा अधबने और बने हुए तमंचे बरामद किए। इसके साथ ही असलाह बनाने का सामान, मशीनें, खराब मशीन, ट्रिगर, 310 स्प्रिंग, 82 बैरल, 92 गुल्ले, 74 पीतल की प्लेट, 27 नाल, 26 रॉड समेत भारी मात्रा में सामान बरामद किया।

पकड़े गए आरोपियों की पहचान फरमान, दिनेश, इनाम, अमित गिरी, अहसान और नदीम के रूप में हुई। इनसे पूछताछ में खुलासा हुआ है कि चुनाव से पहले हथियारों की डिमांड बढ़ जाती है। इसलिए ही फैक्ट्री में थोक के भाव में हथियारों की खेप तैयार की जा रही थी। बताया कि अभी हाल ही में उनके पास कुछ लोग आए थे और 200 तमंचों का ऑर्डर दिया था। इसलिए ही काम तेजी से किया जा रहा था। गिरोह के बाकी आरोपियों की धरपकड़ के लिए दबिश दी जा है।

पूछताछ में मीडिया के सामने आरोपियों ने बीजेपी के सरधना विधायक संगीत सोम का नाम लेकर सनसनी फैला दी। उन्होंने कहा कि जब भी कहीं पर उन्हें समस्या होती या पुलिस पकड़ लेती तो विधायक संगीत सोम से ही सिफारिश कराते थे। पकड़े गए आरोपियों में से दो सरधना क्षेत्र के ही रहने वाले हैं। प्रेसवार्ता में विधायक का नाम आरोपियों ने लिया तो हड़कंप मच गया। हालांकि पुलिस अधिकारी विधायक के नाम पर कन्नी काट गए। एसएसपी राजेश पांडेय ने बताया कि अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं आए हैं, जिनसे विधायक की भूमिका का पता चले। हालांकि पुलिस जांच करेगी। दूसरी ओर, विधायक संगीत सोम का कहना है कि उनका इससे कोई वास्ता नहीं है और न ही वह आरोपियों को जानते हैं। क्षेत्रीय होने के नाते संभव है कि उन्होंने मेरा नाम लिया हो, मेरी जानकारी में ऐसा कुछ नहीं है।

आरोपी अहसान ने बताया कि वो एक तमंचा बनाने में करीब पांच सौ से छह सौ रुपये खर्च करते हैं। इन तैयार तमंचों को दो हजार से लेकर 25 सौ रुपये में बेचते थे। राइफल और बंदूकों को करीब चार से पांच हजार रुपये के बीच बेचते थे। इसके अलावा गिरोह कारतूसों में भी डील कर रहा था। आरोपियों का कनेक्शन कारतूस बेचने वाले गिरोह से भी मिला है।

Post Author: thesundayviews

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