कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय मर्यादा में रहें, समाज सुषमा अवस्थी का उत्पीडऩ बर्दाश्त नहीं करेगा: शाइस्ता अंबर

कमांडेंट की मानसिकता महिलाओं का शोषण करने वाले है तो बदल दें: शाइस्ता अंबर

न्याय पालिका ऐक्टिव है, कृपाशंकर ने महिला से न्याय नहीं किया तो नौकरी बचानी मुश्किल होगी

होमगार्ड विभाग में महिला उत्पीडऩ हो रहा है डीजी और मंत्री क्या कर रहे हैं?

संजय पुरबिया

लखनऊ।

ऑल इंडिया मुस्लिम वूमेन पर्सनल लॉ बोर्ड की (एआईएमडब्ल्यूपीएलबी) की अध्यक्ष ने साफ तौर पर कहा कि होमगार्ड विभाग में लखनऊ के प्रमोटी कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय की मानसिकता शोषण करने वाली है। वो अपनी सोच को बदल दे वर्ना उसे नौकरी करनी भारी पड़ेगी। महिलाओं के सम्मान को लेकर न्यायपालिका,संविधान इतनी ऐक्टिव हो चुकी है कि ऐसे घटिया सोच वाले अफसरों को किसी सूरत में नहीं बख्शेगी। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने मानवीय आधार पर जिन सरकारी मुलाजिमों का रिटायरमेंट दो वर्ष शेष रहता है,उसे स्वेच्छा से गृह जनपद में मनचाही जगह पर तैनाती का निर्देश दे रखा है तो कमांडेंट और डीजी उनका तबादला किस आधार पर दूसरे जिलों में कर सकते हैं ? इस पर सरकार को जांच बिठानी चाहिए।

महिलाओं के लिए संघर्ष करने वाली शाइस्ता अंबर ने सुषमा अवस्थी की बात सुनीं तो गुस्से से तमतमा गईं। उन्होंने कहा कि जब ट्रेनिंग सेंटर के स्टोर के प्रभारी इंस्पेक्टर या बीओ बनाए जाते हैं तो प्रमोटी कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय ने तमाम बीमारियों से जूझ रही कनिष्ठ लिपिक सुषमा अवस्थी को स्टोर का इंचार्ज कैसे और किस नियम के तहत बनाया ? जब महिला अपनी फरियाद लेकर विभाग के मुखिया डीजी सूर्य शुक्ला के पास गई तो उन्होंने तत्काल महिला को इंसाफ क्यों नहीं दिलाया ? सब कुछ जानने के बाद भी जब कमांडेंट ने सुषमा का तबादला हरदोई किया तो दूसरा अपराध करने वाले कमांडेंट के खिलाफ डीजी ने कार्रवाई क्यों नहीं की ? अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने यह भी कहा कि जरूरी नहीं कि रेप शरीर के साथ हो,रेप मौखिक तौर पर भी होता है,जो प्रमोटी  कमांडेंट कृपाशंकर ने लाचार महिला कर्मचारी सुषमा अवस्थी के साथ किया है। कहा कि बॉस का मतलब होता है कि वो कार्यालय में अपने सहयोगियों के साथ ऐसा बर्ताव पेश करे कि रिटायरमेंट के बाद लोग उसे यादों में संजोकर रखे। लेकिन,कमांडेंट ने कर्मचारियों की मजबूरी को दहशत में तब्दील कर रखा है,जो कानून के नजरों में भी दोषी माना जाता है।

बता दें कि 21 जुलाई को द संडे व्यूज़ एवं इंडिया एक्सप्रेस न्यूज डॉट कॉम ने मेरी मौत के जिम्मेदार कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय होंगे- सुषमा अवस्थी शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। रिपोर्ट में लिखा है कि किस तरह से प्रमोटी कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय ने अत्याचार मचा रखा है। उसे इतनी भी शर्म नहीं आई कि उस बीमार महिला कर्मचारी को स्टोर का इंचार्ज बना रहा है जो सक्षम नहीं है और वहां महिलाएं तैनात नहीं होती हैं। खबर से हडक़म्प मचा लेकिन विभाग के डीजी से लेकर मंत्री ने चुप्पी साध रखी है। इससे साफ जाहिर होता है कि कमांडेंट ने अच्छी तरह से सभी को मैनेज कर रखा है। विभाग में चर्चा जोरों पर है कि डीजी और मंत्री की हिम्मत नहीं है कि उसके खिलाफ कुछ बोल पाए। वजह क्या है मालूम नहीं लेकिन जिस तरह से उसने भ्रष्टाचार, महिला उत्पीडऩ की घटनाओं को अंजाम दिया उससे जाहिर होता है कि योगी राज में ना सरकारी विभाग में महिलाएं सुरक्षित हैं और ना ही ईमानदार कर्मचारी…

 

सुषमा अवस्थी ने द संडे व्यूज़,इंडिया एक्सप्रेस व्यूज़ के ब्यूरो चीफ संजय पुरबिया से कहा कि मैं सुसाइट कर लूंगी। कमांडेंट कृपाशंकर ने जिस तरह से मानसिक, शारीरिक उत्पीडऩ किया है, उससे मैं डिप्रेशन में चली गई हूं। मेरे पति नहीं है, एक बेटा है। मैं सुसाइट करती हूं तो इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदारी लखनऊ के कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय होंगे। सुषमा अवस्थी ने यह भी शंका जाहिर की कि स्टोर का इंचार्ज मुझे बनाने पर वे इतने बेचैन क्यों हैं? हो सकता है कि स्टोर में बड़ा घपला किया गया हो,कल को यदि कोई बात होती है तो वो मुझे फंसा दें ?  योगी सरकार में अब क्या बचा है। मंत्री और अफसरों की जुबां से भले ही ईमानदारी,महिलाओं का सम्मान, भ्रष्टाचार को नहीं बख्शेंगे जैसे कीमती वचन निकल रहे हों लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है। यानि, बेईमानी करो, महिलाओं का उत्पीडऩ करो, भ्रष्टाचार को पूरा संरक्षण दो। उक्त बातों को आदर्श की तरह मान रहे हैं होमगार्ड विभाग के कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय। उन्होंने मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र (डीटीसी) ,कृष्णानगर,लखनऊ में तैनात कनिष्ठ सहायक सुषमाअवस्थी पर स्टोर का इंचार्ज बनाने का इस कदर दबाव बना रखा है कि वो डिप्रेशन में चली गई हैं। 21 जून को कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय ने मौखिक रूप से समस्त स्टोर का चार्ज लेने की बात कही। इससे पूर्व 6 जुलाई को स्टोर का चार्ज उर्दू अनुवादक कु. शहनाज को दिया गया था। किसी की पैरवी लगी तो कु.शहनाज को वहां से हटा दिया गया। शहनाज उर्दू अनुवादक है और सुषमा अवस्थी कनिष्ठï सहायक है। मौजूदा समय अधिकांश जनपदों में लिपिक संवर्ग में शायद ही कहीं पर स्टोर इंचार्ज कीपर का पद स्वीकृत है और न ही स्टोर कीपर की नियुक्ति है।

व्यवहारिक बात करें तो मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्रों पर जवानों को प्रशिक्षण देने का काम होता है। इस दौरान जवान यहीं पर ठहरते हैं। 24 घंटे प्रशिक्षण चलता है इस दौरान कभी भी,किसी भी समय स्टोर इंचार्ज से कंबल,दरी,वर्दी, असलहे आदि मांगे जा सकते हैं। यदि स्टोर का इंचार्ज महिला को सौंपा जाएगा तो उसे रात्रि में भी ठहरना पड़ेगा जो संभव नहीं है। कमांडेंट ने जिस तरह से एक महिला कर्मचारी को मानसिक,शारीरिक उत्पीडऩ किया,वो अपराध की श्रेणी में आता है। खैर,लखनऊ के प्रमोटी कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय ने तुगलकी मौखिक फरमान तो जारी कर दिया लेकिन वे उस महिला को स्टोर इंचार्ज बनाने पर क्यों अड़े हैं जो बीमार है? क्या स्टोर में भी असलहा या अन्य सामानों में भी तो कमांडेंट खेल तो नहीं कर दिए हैं? ये सवाल इसलिए वाजिब है क्योंकि इन्होंने लखनऊ तैनाती के बाद से पूरी परिपाटी को ही बदल दिया है। लखनऊ में शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में तैनात जवानों से ड्यूटी के नाम पर प्रतिमाह 15 से 20 लाख रुपए महीने की वसूली करा रहे हैं।

जवानों से बातचीत के बाद द संडे व्यूज़ ने खुलासा किया था कि कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय वसूली की रकम में से हर माह दो लाख रुपए मंत्री अनिल राजभर को लखनऊ से लेकर बनारस तक का खर्च उठाता है। डीजी सूर्य कुमार शुक्ला के मौखिक जरूरतों को पूरा करता रहता है। यही वजह है कि जब सुषमा अवस्थी अपनी फरियाद लेकर डीजी सूर्य शुक्ला के पास गई तो उन्होंने मौके पर ही कमांडेंट से बात की लेकिन उल्टे वो और अधिक प्रताडि़त करने लगे हैं। सुषमा अवस्थी को इस बात का अहसास हो गया है कि उसके विभाग में भ्रष्टïाचार इस कदर बीमारी का विक्राल रूप धारण कर चुका है कि उसे इंसाफ नहीं मिलने वाला। इसीलिए उन्होंने कहा कि यदि मेरी मौत होती है तो इसके लिए जिम्मेदारी कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय होंगे…

 

Post Author: thesundayviews

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