ऑडियो में खुलासा – मेडिकल और ऊपर देने के नाम पर हवलदार प्रशिक्षक ने मांगे 40 हजार रुपए घूस

मुजफ्फरनगर में मृतक आश्रित से कालीचरण ने कहा- 40 हजार रुपए दो तभी मिलेगी नौकरी

ड्यूटी के दौरान नवाब अली की हुई मौत,जून में 8 मृतक आश्रित कोटे की निकली भर्ती

ऑडियो ना दिखाने के लिए कालीचरण ने संवाददाता पर बनाया दबाव, लेकिन मिली नाकामयाबी

संजय पुरबिया

मुजफ्फरनगर।

योगी सरकार मृतक आश्रितों को शीघ्र सहायता राशि एवं घर के एक सदस्य को नौकरी देने की बात करती है लेकिन क्या मंत्री और अफसर इस पर अमल कर रहे हैं? सही बात तो यह है कि मरने वाले कर्मचारियों के परिजनों को मंत्री तो छोडि़ए साथ में काम करने वाले कर्मचारी तक भूल जाते हैं। लोग ये क्यों भूल जाते हैं कि एक दिन जब वे इस दुनिया में नही रहेंगे और कुर्सी पर बैठे कर्मचारी उनके परिजनों के साथ घूस मांगेंगे,दौड़ाएंगे तो उन पर क्या बितेगी। शायद, कुर्सी पर बैठे मुलाजिमों की हवस के आगे सारे रिश्ते बेमानी है। इस मामले में होमगार्ड विभाग नंबर वन पर आता है। यहां रूपए के लिए अधिसंख्य अफसरान एवं कर्मचारी किसी की भी बलि लेने और देने के लिए हर क्षण तैयार बैठे रहते हैं। सवाल यह है कि क्या होमगार्ड विभाग में काम करने वाले मुलाजिमों में इंसानियत खत्म हो गई है ? यह सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि सरकारी विभाग में उन कर्मचारियों के बच्चों से बेरहमी पूर्वक मेडिकल और नौकरी दिलाने के नाम पर रूपए की मांग की जाती है,जो कभी उनलोगों के साथ कदम ताल मिलाकर चला करते थे। पैसे की हवस में होमगार्ड विभाग के कर्मचारी इतने अंधे हो चुके हैं कि वे मृतक आश्रित के बच्चों को लूटने का काम कर रहे हैं। यही कहूंगा कि इस विभाग के तथाकथित अफसरों एवं कर्मचारियों में इंसानियत पूरी तरह से खत्म हो चुकी है।

द संडे व्यूज़ एवं इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ डॉट कॉम के मुजफ्फरनगर के संवाददाता अनिल कुमार गुप्ता के हाथ एक ऐसा ऑडिया हाथ लगा है जिसने वहां के कमांडेंट विजय कुमार सिंह कर गुर्गा हवलदार प्रशिक्षक कालीचरण अपने मोबाइल नंबर 8532043223 से एक मृतक आश्रित से 40 हजार रुपए घूस मांग रहा है। रुपए ना होने की वजह से मृतक आश्रित गिड़गिड़ा रहा है लेकिन रुपए की हवस में अंधे हवलदार प्रशिक्षक कालीचरण पर उसका कोई असर नहीं दिख रहा। आज मैं आपको वो ऑडियो सुनाता हूं। ये आवाज मुजफ्फरनगर के हवलदार प्रशिक्षक कालीचरण की है जो मृतक आश्रित के बेटे जाहिद से मृतक आश्रित कोटे में नौकरी दिलाने के नाम पर 40 हजार रुपए की मांग कर रहा है।

किसी तरह जाहिद ब्याज पर 10 हजार रुपए लेकर आता है लेकिन कालीचरण इतने कम रकम लेने से मना करते हुए दुत्कार रहा है। मां-बाप का साया उठने से लेकर छोटे भाई-बहनों एवं बच्चों की भारी जिम्मेदारी का बोझ बताने के बाद भी भ्रष्ट हवलदार प्रशिक्षक कालीचरण का दिल नहीं पसीजा। ऑडियों के मुताबिक उसने कहा कि मेडिकल बनाने वाले डॉक्टर साहेब इतने में नही मानेंगे लेकिन उसे जब लगा कि कहीं हाथ से 10 हजार रुपए भी ना निकल जाए तो उसने स्टेशन पर बुलाकर उस रकम को ले लिया। हराम की कमाई खाने वाले कालीचरण का दिल नहीं पसीजा उसने वार्निंग दी कि बाकी के रकम जल्द पहुंचाओ वर्ना…।

नवाब अली मुजफ्फरनगर में जिला कमांडेंट कार्यालय में तैनात था। 8 जनवरी 2016 में विधान सभा चुनाव के दौरान उसे शांति व्यवस्था के लिए ट्रैफिक लाइन में तैनात किया। शाम साढे पांच उसे उसे हार्ट अटैक पड़ा और साथियों सहित टीएसआई राजेेश जब तक उसे हॉस्पिटल ले जाते रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। उस दिन से लेकर आज तक नवाब अली का बेटा जाहिद अपने पिता की जगह मृतक आश्रित नौकरी के लिए भटक रहा है लेकिन उसे फर्जी आश्वासन मिल रहा है।

लगभग दो वर्ष से उसे प्रमोटी कमांडेंट विजय कुमार सिंह जो (मुख्यालय पर तैनात डीआईजी एस के सिंह का रिश्तेदार है) एवं जिला कार्यालय पर तैनात उसे आश्वासन देकर गुमराह करते चले आ रहे हैं। माह जून में मुजफ्फरनगर में मृतक आश्रित कोटे से आठ लोगों की भर्ती निकली। उसी दरम्यान नवाब अली के पुत्र जाहिद भी पहुंचा तो वहां तैनात हवलदार प्रशिक्षक कालीचरण ने उससे रुपयों की मांग की और कहा कि बिना रुपए दिए नौकरी नहीं मिलेगी। सबसे पहले तुम्हारा मेडिकल बनेगा उसके बाद कमांडेंट साहेब का आशीर्वाद मिलेगा,तब जाकर नौकरी पक्की मानी जाएगी। जाहिद ने अपने गरीबी और परिवार की जिम्मेदारियों की दुहाई दी लेकिन उस पर कोई असर नहीं पड़ा।

उम्मीद की कोई किरण ना दिखने पर जाहिद ने मुजफ्फरनगर में द संडे व्यूज़ एवं इंडिया एक्सप्रेस न्यूज डॉट कॉम के संवाददाता अनिल कुमार गुप्ता से संपर्क किया और उन्हें हवलदार प्रशिक्षक कालीचरण का वॅायस रिकार्डिंग सुनाया। बताया जाता है कि हवलदार प्रशिक्षक कालीचरण पर कमांडेंट की खास मेहरबानी है जिसकी वजह से वो एक नहीं दो कंपनियों सैथावल एवं गुढ़ावा का इंचार्ज बना है। बताया जाता है कि कमांडेंट के वसूली मैन में कालीचरण भी है। खैर,जाहिद ने महाजन से ब्याज पर लेकर 10 हजार रुपए कालीचरण को दे दिया है।

इस बात की सूचना मिलते ही हवलदार प्रशिक्षक कालीचरण ने संवाददाता को खबर प्रकाशित ना करने की धौंस दी लेकिन सच्चाई का खुलासा करने वाले संवाददाता ने चेतावनी दी कि खबर तो हर हाल में पोर्टल पर चलेगा,जो करना है कर लो…सवाल यह है इस बात की पूरी जानकारी कमांडेंट विजय कुमार सिंह को है,लेकिन उसने हवलदार प्रशिक्षक के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?

 

Post Author: thesundayviews

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