जैविक खेती की ओर लौटे किसान भाई -रणवेन्द्र सिंह धुन्नी

किसानों को जैविक खेती करने के लिए जागरूक किया

धान की फसल पर योजना का लाभ 

बलरामपुर।

कृषि राज्य मंत्री रणवेन्द्र सिंह धुन्नी ने कहा कि किसान जैविक खेती को बढ़ावा दें। रासायनिक उर्वरकों से भूमि की उर्वरा शक्ति क्षीण होती जा रही है। सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कृत संकल्पित है। श्री सिंह मंगलवार को जिला पंचायत सभागार में कृषि विभाग की ओर से आत्मा योजना के तहत एक दिवसीय किसान मेला व गोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।


रणवेन्द्र सिंह ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों की बढ़ते चलन एवं कार्बनिक पदार्थों के कम प्रयोग के कारण मृदा की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। भूमि की उर्वरा शक्ति के साथ साथ भूमिगत जल एवं पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। हमें जैविक खेती की आवश्यकता है। अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में जैविक खेती द्वारा उत्पादित खाद्यान्न, फूलों, साग सब्जियों आदि की मांग धीरे धीरे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने किसानों की आय दोगुनी रने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। फसल के समर्थन मूल्य में वृद्धि करके सरकार ने किसान की आय बढ़ाने का काम किया है।

सांसद दद्दन मिश्र ने कहा कि सरकार किसानों को उनकी फसलों की क्षति होने पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत क्षतिपूर्ति देती है। जिसमें प्रीमियम की अधिक धनराशि सरकार स्वयं अदा करती है। उन्होंने किसानों को जैविक खेती करने के लिए जागरूक किया। सदर विधायक पल्टूराम ने कहा कि जैविक खेती करने से फसलों की उत्पादकता व गुणवत्ता दोनों में वृद्धि होती है। जैविक खाद पौधों में सभी आवश्यक पोषक तत्व की आपूर्ति करती है। किसानों को जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाना चाहिए।

तुलसीपुर विधायक कैलाश नाथ शुक्ल ने कहा कि पूर्व में खेती को उत्तम व्यवसाय कहा जाता था। वर्तमान में खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार ने कई योजनाएं संचालित की हैं। किसानों को बीज, उर्वरक व कृषि यंत्रों की खरीद पर अनुदान दिया जा रहा है। जिला उप कृषि निदेशक राम बचन राम ने कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। कहा कि किसान विभाग में अपना पंजीकरण कराकर योजनाओं का लाभ ले सकते हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बारे में बताते हुए कहा कि जिले में मात्र धान की फसल पर योजना का लाभ दिया जाएगा।

किसानों को एक हेक्टेयर पर 972 रुपए का प्रीमियम राशि जमा करना होता है। फसल का नुकसान होने पर बीमा कम्पनी प्रति हेक्टेयर 42 हजार 936 रुपए की दर से क्षति पूर्ति करती है। उन्होंने बताया कि गन्ने की फसल पर योजना का लाभ नहीं मिलता है। जिला कृषि अधिकारी मंजीत कुमार ने कहा कि जिले में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक व बीज उपलब्ध हैं। जिले में इस वर्ष 70 हजार हेक्टेेयर में संकर धान व 35 हजार हेक्टेयर में सामान्य धान की खेती का अनुमान है। उन्होंने कहा कि यदि फसल में कीटों का प्रकोप दिखाई देता है तो विकास खण्ड व कृषि रक्षा इकाई पर जाकर किसान जानकारी व दवा हासिल कर सकते हैं। इ

Post Author: thesundayviews

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