2019 : इग्नोर करने वाला खुद इग्नोर हो जाएगा: नीतीश कुमार

2019 : इग्नोर करने वाला खुद इग्नोर हो जाएगा: नीतीश कुमार

अपनी शर्तो पर करेगा जदयू गठबंधन,सीटों पर लगी है नीतीश की निगाहें

ब्यूरो

दिल्ली।

राजनीतिक पार्टियां लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर जोड़ तोड़ की राजनीति में जुटी हुई है। चुनाव तो 2019 में होने हैं लेकिन उसकी सरगर्मियां अभी से बिहार में दिखाई दे रही है। चुनाव को नौ महीने या उससे भी कम का समय बचा है लेकिन जिस तरह से सीट बंटवारे को लेकर बिहार में जदयू, भाजपा, कांग्रेस, बीजेपी सहित क्षेत्रीय दलों के बीच घमासान मचा है उससे लगने लगा है कि इस बार का चुनाव बहुत ही दिलचस्प होने वाला है। बिहार का नेतृत्व कर रही जदयू बिहार के बाहर चार राज्यों में अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरने का एलान कर चुकी है। 2019 के चुनाव में सम्मानजनक सीट बंटवारे को लेकर पिछले कई महीनों बयानबाजी कर रही है। बिहार में नीतीश कुमार पर सभी की निगाहें टिकी है। राजद, कांग्रेस हो या फि र भाजपा हर कोई किसी तरह से नीतीश को अपने पाले में लाना चाहती है। लेकिन राजग के साथ गठबंधन को देखते हुए नीतीश अभी किसी तरह की हड़बड़ी में नहीं दिखा रहे हैं।


2014 के चुनाव में मोदी लहर के बाद भी बिहार की जनता ने नीतीश का साथ दिया था, पार्टी उसे अब भुनाना चाहती है। साफ शब्दों में कहूं तो फिलवक्त नीतीश ही बिहार का चेहरा हैं। जिसे बहाने- बहाने से कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा अपने पाले में रखना चाहती है। कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि भाजपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष अमित शाह का 11 जुलाई का दौरा भी इसी जोड़ को और मजबूत करने के लिए है। जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जिस तरह से पार्टी नेताओं ने अपनी बातें सामने रखीं हैं उससे यह स्पष्ट हो गया है कि इस बार गठबंधन जदयू अपनी शर्तों पर करने जा रहा है। बैठक में हुई बयानबाजी से साफ है कि नीतीश कुमार किसी तरह की जल्दबाजी में नहीं है। वह इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि भाजपा उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए कितनी सीटों का ऑफ र देती है।

वहीं जदयू का एक धड़ा राहुल गांधी से भी बातचीत में जुटा है। के.सी. त्यागी इस बीच राहुल से मुलाकात भी कर चुके हैं। कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश ने राहुल गांधी पर निशाना साधा हो लेकिन भाजपा को भी 2014 की याद दिला दी है कि किस तरह से पार्टी ने बुरी स्थिति में भी 17 फ ीसदी वोट हासिल किए थे। उन्होंने यह भी कहा कि हमें कोई इग्नोर नहीं कर सकता। इग्नोर करने वाला खुद इग्नोर हो जाएगा। नीतीश ने इस दौरान भ्रष्टाचार, अपराध और सांप्रदायिकता के खिलाफ सख्ती से पेश आने की बात दुहराई और कहा सत्ता रहे या जाए वह इन तीन मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेंगे।

इस दौरान जदयू ने अगला लोकसभा चुनाव राजग के साथ लडऩे की भी घोषणा की। नीतीश ने कहा कि उनके महागठबंधन में जाने की बात फैलाई जा रही है। उन्हें किनारे करने के लिए साजिश के तहत ऐसी बातें फैलाई जा रही। सच्चाई यह है कि कोई उन्हें न तो अलग- थलग कर सकता है और न ही कोई नजर अंदाज ही कर सकता है। लेकिन इस बार बिहार में गठबंधन इतना आसान नहीं होने जा रहा है। बताया जा रहा है कि बिहार भाजपा के नेता इसबार नीतीश कुमार को अलग- थलग कर चुनाव लडऩे का मन बना रही है। ऐसा मान रही है कि नीतीश के गठबंधन से हटने का फ ायदा भाजपा को मिलेगा। हालांकि, यह सब इतना आसान नहीं है।

बिहार की जनता की मानें तो जमीनी हकीकत इससे विपरीत है, नीतीश के बिना चुनाव में जाना आत्मघाती होगा। सीटों के तालमेल पर फि लहाल भाजपा की तरफ से ऑफ र आने का इंतजार कर रहे नीतीश ने भले ही चालाकी से अपने पाले की गेंद भाजपा के पाले में डाल दी हो लेकिन पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेताओं का मानना कि अगर भाजपा सहयोगी के रूप में जदयू को चाहती है को सम्मानजनक सीटों की संख्या बताएं नहीं तो पार्टी अपने भविष्य के बारे में सोचेगी। भले ही भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व वाला एक गुट जो नीतीश को अलग- थलग कर चुनाव में जाने कि तैयारी में लगा है, वह यह भी चाह रहा है कि लालू और नीतीश में किसी तरह से मिलाप न हो। वह कभी तेज प्रताप तो कभी तेजस्वी के बहाने फू ट डालने में लगी है। यही वजह है कि लालू के लाल के निशाने पर हमेशा नीतीश बने हुए हैं।

Post Author: thesundayviews

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