सरकार अनुसूचित जाति में कैटेगरी बनाकर दे आरक्षण, छप्पर फाड़ कर मिलेगा वोट : ओमप्रकाश राजभर

यूपी की सियासत में ‘सत्ता सुख’ नहीं, गरीबों को आरक्षण दिलाना मेरा लक्ष्य : ओमप्रकाश राजभर

पूर्वांचल की जनता जानती है कौन लीडर है और कौन लोडर

लोकसभा चुनाव आने तक बदल जाएगी यूपी की सोच

देश के 12 प्रदेशों में आरक्षण का बंटवारा है तो यूपी में क्यों नहीं!

संजय पुरबिया

लखनऊ। पूर्वांचल के खौदा फत्तेपुर गांव (वाराणसी) में बेहद गरीब घर में जन्मे ओमप्रकाश राजभर ने गरीबी के दर्द को सहा है। भूख लगने पर भरपेट खाना मयस्सर नहीं हो पाता था लेकिन कुछ बनने की ललक ने ओमप्रकाश को किताबों की ओर खिंचा। जहां गरीबी मुंह बाए खड़ी हो, वहां पढऩे के लिए किताबें कहां मिल सकती थी… उन्होंने अपनी मौसी के लडक़े से किताब मांग कर पढ़ाई की और जब भूख लगता था तो महुआ का लाटा खाते थे। थोड़े बड़े हुए तो परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ी। कुछ बनने का लक्ष्य पूरा करने के लिए इन्होंने 11 माह तक दिन में पढ़ाई की और रात में वाराणसी में आटो रिक्शा भी चलाया। उसी कमाई से वे अपने कालेज की फीस भी जमा करते थे और घर खर्चा भी उठाते थे। वक्त की रफ्तार बदली तो उन्होंने एक जीप खरीदी। पैसा बचाने के लिए खुद सवारियों भरते और उन्हें गंतव्य तक पहुंचाते। लेकिन सफलता मानों रूठी हुई थी, लेकिन हिम्मती ओमप्रकाश हार मानने वाले व्यक्ति नहीं थे। ओमप्रकाश ने फिर मेहनत की और तीन वर्ष तक कामर्शियल खेती की जिसके लिए उन्हें कमीशनरी में बेस्ट किसान का अवार्ड मिला। खेती के दौरान ही ओमप्रकाश ने कुर्ता-पायजामा पहना और उसके बाद उन्होंने पीछे मुडक़र नहीं देखा…। क्योंकि, अब उनकी मेहनत के आगे किस्मत मेहरबान हो चुकी थी। उन पर अवाम की सेवा भावना और राजभर बिरादरी के लिए कुछ करने का ऐसा जुनून पैदा हुआ कि आज वे अपनी बिरादरी के सबसे लोकप्रिय नेता और यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर हैं।

पेश है गरीबी से लेकर सत्ता के उच्च पद पर बैठे कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर से द संडे व्यूज़ एवं इंडिया एक्सप्रेस न्यूज डॉट कॉम के ब्यूरो चीफ संजय पुरबिया की खास बातचीत…

सवाल: 2019 में यूपी की सियासत की तस्वीर कैसी होगी ?
जवाब : यूपी की सियासत में 2019 में सपा-बसपा गठबंधन होने के बाद थोड़ी दिक्कतें तो बढ़ी है। इसीलिए गोरखपुर, कैराना, फूलपुर में हमलोगों को जनता के दंश को झेलना पड़ा। इस बात को लेकर मैंने कई बार भाजपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष अमित शाह से कहा कि जिन मतदाताओं की वजह से यूपी में भाजपा 325 सीटें जीती थी, आज किन्हीं कारणों से वे लोग थोड़ा नाराज हैं। उनकी नाराजगी दूर करने के लिए पिछड़ी जाति की 27 प्रतिशत आरक्षण में तीन कैटेगरी बना दिया जाए। पिछड़ा, अति पिछडा और सर्वाधिक पिछड़ा जाति बनाकर उन्हें जो हिस्सा नहीं मिला है, उसका लाभ दिया जाए। उन्होंने बताया कि आरक्षण लागू हुए 27 वर्ष हो गए हैं लेकिन पिछड़ी जाति को आरक्षण का लाभ नहीं मिला। आरक्षण का लाभ देकर उनके बीच में संदेश पहुंचाया जाए ताकि उसका लाभ हमलोग आगामी चुनाव में उठा सकें।

उन्होंने बताया कि अब तक सपा और बसपा 17 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के नाम पर वोट बटोरीती रही। सर्वाधिक पिछडे वर्ग की 54 प्रतिशत में अकेले 21 प्रतिशत की आबादी है। अति पिछड़ी जाति की संख्या 80 लोक सभा सीटों में सर्वाधिक है। मान कर चलें कि एक लोकसभा सीट में अति पिछड़ी जाति के वोट पांच से लेकर आठ लाख तक है। यदि हमलोग आरक्षण लागू कराने में कामयाब हो जाते हैं तो आसानी से इन जातियों के दो से तीन लाख वोट मिल सकते हैं। इसी तरह, अनुसूचित जनजाति में तमाम जातियां हैं, उन्हें भी उनका हिस्सा नहीं मिला है। यदि उनका भी तीन कैटेगरी बनाकर उन्हें अलग कर के आरक्षण दिला दें तो वे आसानी से हमारे साथ हो लेंगे।
उन्होंने बताया कि मैंने कई चरणों में अमीत शाह एवं मुख्यमंत्री के सामने ये बातें रखी है। यदि ऐसा होता है तो मैं दावा करता हूं कि एक बार फिर वर्ष 2014 व 2017 के रिजल्ट को हमलोग 2019 में दुहरा कर सपा बसपा और कांग्रेस का किला ढहा देंगे।

सवाल : फिर क्या दिक्कत आ रही है,भाजपा आरक्षण में हिस्सेदारी का लाभ देने के लिए कौन सा समय चुन रही है ?

जवाब: अमित शाह से कई चरणों में वार्ता हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आरक्षण के मसले का हल निकालेंगे। अमित शाह ने स्वयं कहा कि लोकसभा चुनाव से छह माह पूर्व आरक्षण लागू करेंगे, ताकि इसका प्रचार-प्रसार किया जा सके और जनता के बीच भाजपा द्वारा लिए गए एक बड़े फैसले को लोग समझ सके । ओमप्रकाश राजभर ने बताया कि हमलोगों को
समय मिल जाएगा तो इस बिरादरी के अशिक्षित लोगों को गांव-गांव, घर-घर जाकर या चौपाल लगाकर बताएंगे बताएंगे कि सरकार ने उनके लिए कितना बड़ा फैसला लिया है। फिर सूबे में भाजपा की तस्वीर पूरी तरह से बदल जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सदन में पिछड़ी जाति के आरक्षण के बंटवारे की बात उठाई है। उन्होंने चार सदस्यीय समिति बना दी है, जिसे चार माह में आरक्षण पर रिपोर्ट पेश करना है।
उन्होंने बताया कि अभी तक समिति ने रिपोर्ट सौंपी नहीं है। इसी बात को लेकर परेशान हूं। पूर्वांचल के मतदाता बार-बार हमसे पूछते हैं कि मंत्रीजी क्या हो रहा है? सभी को समझा रहा हूं कि उच्च स्तरीय वार्ता हो गई है, सब ठीक होगा। आप यूं कह सकते हैं कि सब कुछ कमेटी के रिपोर्ट पर टिका है। मैं जब भी आरक्षण की बात करता हूं तो मेरी जाति के कुछ नेताओं को आपत्ति होने लगती है। उन्हें मुझसे किस बात का भय हो रहा है, मालूम नहीं। मेरा मानना है कि जिन लोगों की वजह से ओमप्रकाश राजभर सत्ता तक पहुंचा है,उनकी दिक्कतों को दूर करना ही मेरा फर्ज है।

सवाल: आप ओबीसी में ओबीसी को आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं इससे अन्य जातियां खिलाफ नहीं हो जाएगी ?

जवाब: नहीं, इसलिए कि हम उनका हिस्सा नहीं ले रहे हैं। उनकी आबादी में 27 प्रतिशत में जो उनका हिस्सा बन रहा है वो उनको दे ही रहे हैं। हम अपना हिस्सा अलग कर रहे हैं जिसे वे अभी तक लूटते चले आ रहे हैं। इसमें किसी तरह क मतभेद नहीं होगा।

सवाल: सलेमपुर,घोसी, लालगंज के बाद ओमप्रकाश राजभर का डंका कहां बजेगा ?
जवाब: आज की तारीख में हम अपने पार्टी का संगठन 80 लोकसभा सीट में मजबूत कर चुके हैं। सभी मंडलों में बैठकों का दौर जारी है। इलाहाबाद मुरादाबाद गाजीयाबाद सहित कई मंडलों में कार्यक्रम लगा है। कार्र्यकम मेें हमलोग इस बात को प्रमुखता से उठा रहे हैं कि पिछड़ी जाति के लोगों को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है,उन्हें मिले। जिन्हें नहीं मिल रहा है उन्हें तीन कैटेगरी बनाकर लाभान्वित किया जाए। इसमें किसी का हक नहीं मारा जाएगा। गरीबों को राशन कार्ड,आवास, रोजगार,शिक्षा, शौचालय एवं दवा का लाभ मिले। साथ ही,आरक्षण के लाभ से वंचित लोगों को आरक्षण में उनका हिस्सा अलग करके दिया जाए।

सवाल: यूपी की पॅालीटिक्स ‘कास्ट फैक्टर’ पर टिकी है। क्या पिछली सरकारें आरक्षण के नाम पर इन जातियों से खेलते रहेें ?

जवाब: जी हां,पिछली सरकारों ने आरक्षण के नाम पर इन्हें पूरी तरह से ठगने का काम किया। चुनाव के समय चर्चा करते थे कि 17 जातियों को अनुसूचीत जाति में शामिल करने के नाम पर वोट लेते थे। सत्ता पाने के बाद किसी ने भी उनसे किया वायदा नहीं किया। इसीलिए वे नाराज हुए और भाजपा प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज कर सत्ता हासिल की।ओमप्रकाश राजभर ने बताया कि हमलोगों ने अति पिछड़ी जाति के लोगों को समझाया कि अनुसूचित जाति में जाना चाहते हो तो एक ही रास्ता है। ये लाभ आपलोगों को 27 प्रतिशत आरक्षण से ही कट कर मिलेगा। क्यों न अपने हिस्सा को यही पर अलग कर उसका लाभ लिया जाए क्योंकि केन्द्र में जाने पर फिर कई तरह की समस्याएं आएंगी। तीन कैटेगरी बनाया जाएगा तो इसका लाभ सभी को मिल जाएगा। इसी बात को लेकर अति पिछड़ी जाति के लोग हमारे साथ हैं। ओमप्रकाश ने दावा किया कि यदि इस जाति के लोग हमलोगों के साथ हो जाएंगे तो किसी की जरूरत नहीं पड़ेगी।

सवाल: क्या भाजपा वाले आपकी योजना से सहमत है ?
जवाब : हां, भाजपा के शीर्ष लोग अच्छी तरह से समझ रहे हैं। ओमप्रकाश राजभर ने गरीबी देखा है, झुग्गी झोपड़ी मे रहा हूं इसलिए गरीबी का दर्द क्या होता है जानता हूं।

सवाल: देश के 12 प्रदेशों में आरक्षण का बंटवारा है तो यूपी में क्यों नहीं ?
जवाब: आपने सही सवाल दागा। मैं भी यही कहना चाह रहा हूं कि जब देश के 12 प्रदेशों में पिछड़ी जाति को तीन कैटेगरी में बांट कर उन्हें आरक्षण की हिस्सेदारी दी जा रही है तो वही व्यवस्था उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं लागू किया जा रहा है। यहां भी इसी तर्ज पर पिछड़ी जाति में हिस्सा दिया जाना चाहिए। आपको याद होगा जब यूपी में राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री थें,उन्होंने सामाजिक न्याय नाम की समिति बनाई थी। समिति ने रिपोर्ट दिया था कि पिछड़ी जातियों के लिए तीन कैटेगरी बनाई जाए लेकिन तब तक सरकार चली गई और योजना दफन कर दी गई।

सवाल:ओमप्रकाश के लिए पहले क्या है अवाम या सत्ता सुख?
जवाब: इसका सही जवाब तो पूर्वांचल की जनता ही दे सकती है। ओमप्रकाश आज सत्ता की कुर्सी पर बैठा है तो जनता-जनार्दन की वजह से। वे जानते हैं कि सत्ता में अपने बिरादरी का यदि नेता होगा तो उनकी समस्याओं को सरकार तक आसानी से पहुंचा सकती है। मेरे लिए सत्ता सुख कभी मायने नहीं रखा,इसीलिए मैं समय-समय पर मुखर होकर अपनी ही सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ बोलता हूं। कहा कि समय-समय पर सरकार में रहते हुए भी मैं समाज में व्याप्त भ्रष्टïाचार,अन्याय एवं अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाता रहता हूं।

सवाल: आपकी बिरादरी में कोई व्यक्ति नौकरशाह या अधिकारी पद पर नहंी है, क्यों ?
जवाब : ये हमारी जाति का दुर्भाग्य है कि न तो कोई प्रशासनिक पद पर तैनात है,ना ही कोई आईपीएस, आईएस, एसडीएम, कानूननगो या दारोगा के पद पर है। इसके लिए नेताओं को ही जिम्मेदार मानते हैं। हमारे समाज के लोग नेता तो लोग बन गए लेकिन सत्ता मिलने के बाद अपनी बिरादरी को भूल जाते हैं। चुनाव जीतने के बाद अपने समाज को अधिकार दिलाने के लिए किसी ने नहीं बोला। आज हम आरक्षण की बात कर रहे हैं तो तमाम राजभर नेताओं को बुरा लग रहा है। भईया, हम अपने समाज के लिए लड़ रहे हैं,तो इसमें बुरा क्यों मान रहे हो। अपने समाज को हक दिलाने के लिए हम आखिरी सांस तक लड़ते रहेंगे।

सवाल: सीएम ने अनिल राजभर के सिर पर हाथ रखा लेकिन ओमप्रकाश राजभर पर नहीं, ऐसा क्यों ?
जवाब: मैं अपनी पार्टी भासपा (भारतीय समाज पार्टी) का राष्टï्रीय अध्यक्ष हूं। भाजपा अलग पार्टी है। हमदोनों के बीच समझौता हुआ है और मुख्यमंत्री अपनी पार्टी के नेता को कहां और किस पद पर रखते हैं ये वही जानें। मैं अपनी पार्टी का जिम्मेदारी लेता हूं कि किसे कहां और किस पद पर रखना,हम सबके लिए सही रहेगा।

सवाल: लेकिन, राजभर बिरादरी में आपका पद बहुत बड़ा,भाजपा सरकार में आप भी सम्मान के पूरा हकदार बनते हैं ?
जवाब: देखिए, इसका जवाब जनता देती है। लोडर और लीडर में अंतर होता है। लीडर समाज का नेतृत्व करता है और लोडर किसी पार्टी में रहकर लोडरई करता है। मैं समाज का नेतृत्व कर रहा हूं।

सवाल: आप गब्बर से आप कुछ ज्यादा ही प्रभावित दिखते हैं,जबकि वो विलेन है,ऐसा क्यों ?
जवाब: मैं एक बार सोनभद्र गया था। वहां पर दो दर्जन बुजुर्ग जिन्हें मारापीटा गया था। थाने गए तो वहां भी यही नजारा था। जब गरीबों पर अत्याचार होता है तो मुझसे बर्दाश्त नहीं हो पाता। उस दिन मैंने गब्बर सिंह की तर्ज पर कहा था कि यहां के अधिकारी और कर्मचारी अब सुन लो यदि 50 किलो मीटर दूर तक गरीबों पर अत्याचार होगा तो गब्बर बनकर मैं हर बार सामने आऊंगा। ताकि अफसरों में दहशत रहे कि बिना वजह वे गरीबों पर अत्याचार ना करें।

Post Author: thesundayviews

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