शासन ने वाहन चोरी होने पर पांच लाख 54 हजार रूपए रिकवरी के दिए आदेश, डीआईजी ने गायब करा दी पत्रावली

डीआईजी की सरकारी टाटा सूमो विक्टा चोरी हुई या कराई गई ?

चालक पेट्रोल निकाल ले तो चोर,अफसर गाड़ी गायब करा दें तो उन्हें कौन सा तगमा दें :रामेन्द्र यादव

तैनाती फैजाबाद में, लखनऊ में निजी आवास पर कैसे पहुंची सरकारी वाहन

बिना कमीशनर, डीजी से परमिशन लिए साहेब सरकारी वाहन से लखनऊ में करते थे मौज

विभाग की एक लाल जिप्सी सालों से है गायब, कहां गई किसी को नहीं मालूम

संजय पुरबिया
लखनऊ। यूपी में होमगार्ड विभाग की बातें निराली है। यहां पर न सत्ता की सुनी जाती है और ना ही सरकार की। मुख्यालय के अफसर चाहें तो फर्जी भर्ती कर लें, जांच रिपोर्ट दबा दें, बेवजह किसी को सस्पेेंड कर दे, अपने समकक्ष अफसर पर छेडख़ानी का आरोप लगवा कर बेइज्जती करा दे, चाहें तो सरकारी गाड़ी चोरी करा दे…। आप कह सकते हैं कि इस विभाग के कुएं में पूरी तरह से भांग भरा है। यहां खराब हो चुके सिस्टम को कोई नहीं ठीक कर सकता। आज आपको नई कहानी सुनाता हूं। कहानीे होमगार्ड विभाग की है। मुख्य किरदार मुख्यालय पर तैनात डीआईजी एस के सिंह निभा रहे हैं।

वर्ष 2013 की बात है। फैजाबाद में मंडलीय कमांडेंट एस के सिंह वर्तमान में (डीआईजी,मुख्यालय) हैं। एस के सिंह को विभाग द्वारा सरकारी टाटा सूमो विक्टा नंबर यूपी- 32 डीजी 5096 दी गई। वे सरकारी कामकाज के अलावा वाहन का उपयोग अपने निजी कार्यों के लिए भी करते थे। टाटा सूमो विक्टा से वे गोमतीनगर स्थित अपने निजी आवास 1-3 वास्तुखण्ड, गोमतीनगर पर आते-जाते थे। 13 दिसंबर 2013 की सुबह आठ बजे उनकी टाटा सूमो विक्टा यूपी 32 डीजी 5096 चोरी हो गई। उन्होंने गोमतीनगर स्थित विभूतिखण्ड थाने में वाहन चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। पुलिस ने अपराध संख्या 362-2013 कर अपनी खानापूरी कर ली। छह वर्ष बीत गए लेकिन डीआईजी साहेब की टाटा सूमो पुलिस को नहीं मिली। होमगार्ड विभाग द्वारा लिखित रूप से इस बात की सूचना शासन को दे दी गई।

सवाल यह उठता है कि जब एस. के. सिंह फैजाबाद में तैनात थे तो सरकारी वाहन टाटा विक्टा लखनऊ स्थित उनके निजी आवास पर कैसे पहुंची? क्या उस दिन उन्होंने फैजाबाद के कमीशनर और विभागीय डीजी से सरकारी वाहन लखनऊ लाने की अनुमति लिया था या नहीं? सवाल यह भी है कि आखिर उनके निजी आवास के सामने से दिन में वाहन चोरी कैसे हो गई? वाहन चोरी हुई या चोरी करा दी गई, यह बातें भी विभाग में गूंज रही है।
जहां तक मेरी तफ्तीश की बात है तो उस दिन उन्होंने सरकारी वाहन लाने के लिए दोनों अफसरानों से अनुमति नहीं लिया था। मतलब, श्री सिंह अवैध तरीके से सरकारी वाहन का दुरूपयोग कर फैजाबाद से लखनऊ आते-जाते रहते थे,जो सरकारी नियमावली के विरूद्ध है। विभाग के लोगों की मानें तो श्री सिंह के आवास से चोरी गई सरकारी वाहन की कीमत लगभग 5 लाख 54 हजार रुपए है। इस बात की जानकारी होते ही शासन गंभीर हो गया। शासन ने रिकवरी के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा था लेकिन अभी तक रिकवरी नहीं हो पाई है। बताया जाता है कि मंडलीय कमांडेंट से डीआईजी,मुख्यालय बनने के बाद एस के सिंह ने शासन द्वारा टाटा विक्टा की रिकवरी के लिए भेजे गए पत्रावली को गायब करवा दिया है।

दूसरी स्क्रीप्ट में किरदार इसी विभाग के पूर्व डीआईजी निभा रहे हैं। ये साहेब मुख्यालय पर अपनी तैनाती के दौरान लाल रंग की जिप्सी नंबर 3554 को ही गायब करवा दिया। विभागीय लोगों का कहना है कि पूर्व डीआईजी के ग्रेटर नोयडा पर लाल रंग की जिप्सी देखी गई है। अब सच्चाई क्या है,इसका पता तो इंटेलीजेंस वाले लगाए लेकिन इस पर भी सवाल बनता है कि आखिर लाल रंग की विभागीय जिप्सी कहां लापता हो गई…
इन भ्रष्टï अफसरानों के घटिया कारनामों पर आल इंडिया होमगाड्र्स कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष रामेन्द्र यादव ने शानदार जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस विभाग में यदि गल्ती से वाहन चालक अधिक दूरी तक चलता है और पेट्रोल ज्यादा खर्च हो जाता है तो अफसर उसे पेट्रोल चोर कहने लगते हैं। अब डीआईजी की सरकारी टाटा विक्टा चोरी हो गई तो इन्हें किस नाम से पुकारा जाए…

Post Author: thesundayviews

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