डीजी के शातिराना खेल में फंसे उनके ही विभाग के मंत्री अनिल राजभर

होमगार्ड मंत्री के भ्रष्टïाचार का डीजी ने किया खुलासा

 मंत्री जी ने कराया 7 कर्मचारियों का तबादला, अब आप ही बताएं, माल किसकी जेब में गया !

सूर्य कुमार शुक्ला के पत्र ने द संडे व्यूज़ के खबर की पुष्टि

संजय पुरबिया

लखनऊ।

होमगार्ड विभाग के मंत्री अनिल राजभर और डीजी के कार्यकाल में भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई न होना संदेह पैदा कर रहा है। शासन की नीति को न मानकर अपनी नीति बनाकर चलने का हौसला वही अफसर करता है जिस पर विभागीय मंत्री का वरदहस्त हो। बिना शासन की अनुमति लिए ‘इलाहाबाद में होमगार्डों की भर्ती’ करने का मामला हो या ‘कमांडेंट द्वारा पटल ना बदलने’ का प्रकरण या फिर ‘पत्रावलियों को दबाने’ या ‘तबादले के नाम पर वसूली’ करने का मामला। मुख्यालय पर तैनात अफसरों ने शासन की नीति को दरकिनार कर आतंक मचा रखा है लेकिन मंत्री जी की तरफ से किसी भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। अफसरों के हौसले इतने बुलंद हो गए कि अपनी जान बचाने के लिए उनलोगों ने अपने ही चहेते मंत्री अनिल राजभर को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अफसरों ने साबित कर दिया कि ‘याचना’ के आधार पर हुए तबादलों में पैसा वे लोग नहीं बल्कि मंत्री ले रहे हैं।

‘द संडे व्यूज़’ ने खुलासा किया था कि ‘होमगार्ड विभाग में याचना के नाम पर हो रहे तबादलों में लिए जा रहे हैं 50 हजार रुपए’ खबर पर अफसरों ने मुहर लगा दी है। इसकी पुष्टि डीजी डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला के पत्र से हो रही है। पत्र में डीजी ने साबित कर दिया है कि सभी कर्मचारियों की तबादला सूची मंत्री अनिल राजभर ने दी है। चौंकाने वाली बात यह है कि आखिर डीजी ने पत्र में अपने ही विभाग के मंत्री का नाम क्यों लिखा ?

6 जून 2018 को डीजी डॅा. सूर्य कुमार शुक्ला के निर्देश पर होमगाड्र्स मुख्यालय तैनात कनिष्ठ स्टाफ अधिकारी सुभाष राम प्रदेश के मंडलीय कमांडेंट एवं जिला कमांडेंट को एक पत्र जारी करते हैं। पत्र में लिखा है कि राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार,सैनिक कल्याण,खाद्य प्रसंस्करण,होमगाडर्स,प्रांतीय रक्षक दल,नागरिक सुरक्षा विभाग,उ.प्र. शासन द्वारा 7 कार्मिकों को स्थानांतरण करने के निर्देश प्रदान किए गए हैं। इनमें बृजेश्वर सिंह सेंगर बीओ को फर्रूखाबाद से कानपुर नगर, हिमांशु वर्धन हवलदार प्रशिक्षक को केन्द्र्री प्रशिक्षण संस्थान,लखनऊ से मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र ,फैजाबाद,रविन्द्र यादव रनर को आजमगढ़ से संतकबीर नगर,सत्यवान सिंह रनर को बलिया से गोरखपुर, सर्वेश कुमार वर्मा रनर को सीतापुर से बाराबंकी,छेदीलाल वैतनिक प्लाटून कमांडर को कानपुर नगर से उन्नाव एवं संजय कुमार वैतनिक प्लाटून कमांडर को सिद्धार्थनगर से कानपुर नगर तबादला करने का निर्देश मंत्री द्वारा दिया गया है। उपरोक्त जिलों में सातों कर्मचारियों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है।

चौंकाने वाली बात ये भी है कि डीजी सूर्य कुमार शुक्ला को मालूम है कि पत्र में मंत्री का नाम नहीं लिखना चाहिए। ये शासनादेश के आदेश की खुली अवहेलना है,फिर उन्होंने तबादले में मंत्री अनिल राजभर का नाम क्यों दिया? कहीं ऐसा तो नहीं कि विभाग में तबादले के नाम पर लाखों रुपए की वसूली का गेम खेला जा रहा है,उससे अपना बचाव करने के लिए मंत्री को बली का बकरा बना दिया? बहरहाल, एक बात तो तय है कि जिस मंत्री ने होमगाड्र्स मुख्यालय के अफसरों को काम करने की पूरी आजादी दी,आज वे अफसरों के चक्रव्यूह में पूरी तरह से फं स गए हैं।

डीजी के पत्र से साबित होता है कि तबादले के गेम में लाखों रुपए की वसूली मंत्री और उनके खास लोगों द्वारा की जा रही है। विभाग में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि अफसरों के माध्यम से ही पैसा ऊपर पहुंचा है लेकिन अभी भी बहुत से ऐसे कर्मचारी हैं जो मलाईदार कुर्सी के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। मैं तो यही कहूंगा कि द संडे व्यूज़ एवं इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ डॉट कॉम की खबरों पर डीजी सूर्य कुमार शुक्ला ने मुहर लगा दी कि तबादले के नाम पर कौन कर रहा है वसूली…

Post Author: thesundayviews

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