होमगार्ड विभाग के सीटीआई पर 24 साल से जमे क्लर्क तबादला नीति को जड़ रहे हैं तमाचा

सीटीआई पर 24 साल से जमे क्लर्क तबादला नीति को जड़ रहे हैं तमाचा

वाह रे डीजी: प्रदेश में पटल बदलने का दे रहे फरमान, मुख्यालय पर ही उड़वा रहे हैं धज्जियां

क्लर्कों का चैलेंज: कोई 17 तो कोई 24 वर्ष से जमा है तो…

कई क्लर्कों का दावा: साहेब सोच रहे हैं यहीं से रिटायर्ड हो जाए, यहां कमाई है, छोड़ कर कहां जाए…

आदित्य जौनपुरिया
लखनऊ।

होमगार्ड विभाग के डीजी सूर्य कुमार शुक्ला अपना घर साफ कर नहीं पा रहे हैं और चले प्रदेश को पाठ पढ़ाने। लंबे समय से एक ही जगह जमे कर्मचारियों का पटल बदलने के लिए होमगार्ड विभाग के डीजी सूर्य कुमार शुक्ला ने पत्र जारी किया है। तीन वर्ष से एक ही पटल पर जमे कर्मचारियों का तबादला करने के निर्देश दिए लेकिन भूल गए कि मुख्यालय पर बने सीटीआई पर 24 वर्ष से कर्मचारी तैनात हैं। एक नहीं दर्जनों ऐसे कनिष्ठï लिपिक, वरिष्ठï लिपिक,रनर, पीसीपी एवं हवलदार तैनात हैं जिन्हें कोई हटाने की जुर्रत नहीं कर रहा। इसी तरह, कई कर्मचारी ऐसे भी हैं जिन्हें कमाऊ सीट मिली है। हर साल उन्हें तबादले की धौैंस देकर अफसर अपना मतलब साध लेते हैं। कर्मचारी भी सोचते हैं कि अफसर जो सामान मांगे दे दो कम से कम ऊपरी कमाई से भरपाई पूरी कर लेंगे।


राजधानी में जेल रोड स्थित सीटीआई (केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थान) पर शासन की नीति का किस कदर मजाक बनाया जाता है,कभी भी देखा जा सकता है। यहां तैनात वरिष्ठï लिपिक सुरेश कुमार पिछले 17 वर्ष से एक ही सीट पर तैनात हैं। वरिष्ठï लिपिक योगेश कुमार ने तो रिकार्ड तोड़ डाला है। 24 वर्ष से मलाईदार पद पर तैनात हैं। इनका काम सीटीआई के कर्मचारियों का वेतन बनाना है। इसी तरह, लिपिक पूनम पाण्डेय लगभग 20 वर्ष, जयप्रकाश मौर्य 18 वर्ष से तैनात हैं। ब्लॉक आर्गनाइजर रेनू पाण्डेय 24 वर्ष से, रनर अनिल कुमार 15 वर्ष से,पीसीपी अंशुल कुमार यादव 6 वर्ष से,कनिष्ठï लिपिक विमला त्रिगुडायक 18 वर्ष से तैनात हैं।

इसी तरह, वरिष्ठï लिपिक रामबचन जिला कैडर के होने के बावजूद मुख्यालय पर लेखानुभाग में तैनात हैं। ये विभाग कमाई का माना जाता है। वहीं वरिष्ठï लिपिक शिव प्रताप शुक्ला जिला कैडर के क्लर्क हैं लेकिन मुख्यालय पर तैनात हैं। ये कर्मचारियों का वेतन आहरित करते हैं। जिला कैडर के लिपिक यजुवेन्द्र सिंह मुख्यालय पर , हवलदार श्रीकेश सिंह 10 वर्ष से क्वार्टर गार्ड पद पर तैनात हैं। नियम की बात करें तो तीन वर्ष बाद इन सभी का पटल बदल देना चाहिए लेकिन लालच से भरपूर अफसरों की रंगत को बदलने में माहिर कर्मचारी जानते हैं कि उनकी मांग पूरी करो और कुर्सी पर चिपके रहो। सीटीआई में प्रत्येक वर्ष जवानों की ट्रेनिंग होती है जिसमें राशन सामग्री एवं सुविधाओं के नाम पर लाखों रुपए का वारा-न्यारा होता है और उसका एक हिस्सा यहां तैनात कर्मचारियों की जेब में भी जाता है। अब देखना है कि डीजी सूर्य शुक्ला मुख्यालय की गंदगी साफ करते हैं या फिर कोई फर्जी आदेश जारी कर चुप्पी साध लेते हैं। बता दें कि डीजी सूर्य कुमार शुक्ला को जबरदस्त छपास रोग हैजिसे द संडे व्यूज़ पूरा कर रहा है।

Post Author: thesundayviews

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