रूपए देने वाले इंस्पेक्टर को बचाने के लिए डीजी ने इलाहाबाद में तैनात दूसरे इंस्पेक्टर को बनाया बली का बकरा

रूपए देने वाले इंस्पेक्टर को बचाने के लिए डीजी ने इलाहाबाद में तैनात दूसरे इंस्पेक्टर को बनाया बली का बकरा

इलाहाबाद में क्लर्क में भर्ती होकर इंस्पेक्टर बनने तक जमे इंस्पेक्टर को डीजी ने दिया अभयदान

नियम की धज्जियां उड़ाने में माहिर डीजी के इस पत्र में इंस्पेक्टर संवर्ग में आक्रोश

इंस्पेक्टर संवर्ग कहिन : रिटायरमेंट से पहले सूर्य शुक्ला जुटे हैं बटोरने में …

इलाहाबाद में रूपए लेकर वाराणसी के इंस्पेक्टर को इलाहाबाद भेजने का मामला गरमाया

संजय पुरबिया

लखनऊ।

होमगार्ड विभाग के डीजी सूर्य कुमार शुक्ला इस समय चर्चा में हैं। सूबे में इनके किस्से जवान से लेकर अफसरानों के बीच सुर्खियों में है। लेकिन, चर्चा में रहने वाले डीजी इस बार अपने काम के बजाए बेतुके पत्र जारी करने एवं बेसिर- पैर का आदेश जारी करने के लिए छाए हुए हैं। याचना के आधार पर 22 जून को डीजी ने 10 कर्मचारियों का तबादला कर दिया था। इनमें वाराणसी में तैनात इंस्पेक्टर विश्वनाथ राम का तबादला इलाहाबाद जिला कार्यालय में किया गया,जबकि वहां पहले से ही 2 की जगह 3 इंस्पेक्टर तैनात हैं। विश्वनाथ राम के जाने के बाद 2 इंस्पेक्टर अतिरिक्त हो गए थे। विभाग में चर्चा है कि तबादला किये गये कर्मचारियों से 50-50 हजार रुपए लिए गए हैं। इस रूपए की हिस्सेदारी ऊपर तक बताई जा रही है। अब ऊपर कौन है बताने की जहमत किसी ने नहीं उठाई।

खैर, खबर की पुष्टि करने के बाद द संडे व्यूज़ समाचार पत्र एवं इंडिया एक्सप्रेस न्यूज डॉट काम ने होमगार्ड विभाग में याचना के नाम पर तबादला कराने की कीमत 50 हजार रुपए शीर्षक से प्रकाशित किया। खबर प्रकाशित होने के बाद डीजी के होश फाख्ता हो गए। उन्होंने आनन-फानन में 29 जून को एक पत्र जारी करने का निर्देश वरिष्ठï स्टाफ अधिकारी सुनील कुमार को दिया। पत्र में निर्देशित किया गया है डीजी के निर्देशानुसार इलाहाबाद में तैनात वैतनिक निरीक्षक अंतिम कुमार सिंह को प्रशासनिक आधार पर मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र, गोरखपुर तात्कालीक प्रभाव से स्थांतरित किया जाता है। संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया जाता है कि वे तात्कालीक प्रभाव से अंतिम कुमार सिंह को अवमुक्त कर अवगत कराए।

डीजी साहेब,ठीक है आपने अंतिम कुमार सिंह, निरीक्षक को गोरखपुर तबादला किया,सही है लेकिन क्या यहां पर नई तैनाती पाने वाले विश्वनाथ राम को तैनात करना चाहिए था?जब पहले से ही यहां पर निरीक्षकों की संख्या अधिक थी तो आपने विश्वनाथ राम को क्यों तैनात किया? अंतिम सिंह इलाहाबाद में वर्ष 2012 में तैनात हुए थे और बीच में उनका तबादला आजमगढ़ कर दिया गया था। उसके बाद दुबारा इनकी तैनाती इलाहाबाद में की गई। देखा जाए तो इनके कार्यकाल का 6 वर्ष भी पूरा नहीं हुआ,फिर आपने इनका तबादला किस आधार पर किया।

दूसरी बात, इलाहाबाद में एक इंस्पेक्टर आनंद उपाध्याय हैं जिन्होंने अपनी नौकरी की शुरूआत यही से की और आप जैसे अफसरों का आशीर्वाद रहा तो शायद यहीं से उसका रिटायरमेंट भी हो जाए। श्री उपाध्याय वर्ष 2005 में प्लाून कमांडर के पद में भर्ती हुए। डीआईजी कार्यालय,इलाहाबाद में तैनात हुए,वर्ष 2015 में पदोन्नति पाकर इंस्पेक्टर बने। यानि, वर्ष 2005 से लेकर जून 2019 तक यही जमे हैं। एक इंस्पेक्टर 15 वर्ष से इलाहाबाद में जमा है उसे ना हटाकर आप उसे हटा दिए जिसका 6 वर्ष भी पूरा नहीं हुआ? आपने वाराणसी से आये विश्वनाथ राम को क्यों नहीं हटाया।


डीजी साहेब जब इंसाफ ही करना है तो इस तरीके से करें कि लोग आपको दुआएं दें और रिटायर होने के बाद भी विभाग के लोग आपको याद करें,ना कि…। आप समझ रहे होंगे मैं क्या कहना चाह रहा हूं। डीजी के नए पत्र के बाद विभाग के अफसरों के बीच एक बार फिर सूर्य कुमार शुक्ला जी प्रकाशमान हो गए हैं। एक बात नहीं समझ में आ रहा है कि आखिर डीजी को जब मालूम था कि इलाहाबाद में 2 इंस्पेक्टर अतिरिक्त तैनात हैं तो उन्होंने मंत्री अनिल राजभर की सिफारिश को माना क्यों? डीजी ने आखिर मंत्री को क्यों नहीं बताया कि इलाहाबाद में पहले से ही 2 अतिरिक्त इंस्पेक्टर तैनात हैं ?

Post Author: thesundayviews

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