होमगार्ड विभाग में भ्रष्टाचार के लिए अनिल राजभर, सूर्य शुक्ला, एस. के. सिंह को याद रखेगा विभाग

होमगार्ड विभाग में भ्रष्टाचार के लिए अनिल राजभर, सूर्य शुक्ला, एस. के. सिंह को याद रखेगा विभाग

यूपी में ‘याचना’ के नाम पर तबादला कराने की कीमत 50 हजार रुपए

सूबे में कई जनपदों में इंस्पेक्टर नहीं,कहीं इंस्पेक्टर कर रहे मौज

अनिल राजभर के राज में अफसरों ने बनाया भ्रष्ट   चार का रिकार्ड

मंत्री स्तर से कार्रवाई न होने से बुलंद हैं भ्रष्ट अफसरों के हौसले

संजय पुरबिया

लखनऊ।

उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार में तबादले के नाम पर रूपयों की बारिश हो रही है। खुला रेट है, देने वाले दे रहे हैं और अफसरों के माध्यम से रूपयों की थैली ‘ऊपर’ तक पहुंचाई जा रही है। जब भ्रष्टाचार करने की सलाह ‘ऊपर‘ वाले देंगे तो अफसर तो नियम-कानून की धज्जियां उड़ाने के लिए बैठे ही हैं। भाजपा की सरकार है। मंत्री अनिल राजभर के राज में किसी भ्रष्ट अफसर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। कह सकते हैं कि भ्रष्ट अफसरों के सितारे इस समय बुलंदी पर हैं। उन्हें मालूम है कि डीजी किसी काम के नहीं, मंत्री जी कार्रवाई करेंगे ही नहीं और नीचे बैठे डीआईजी, हर जांच की कीमत तय कर पत्रावलियों को दबाने में माहिर हैं। जब सब एक ही धारा के हैं तो कार्रवाई कौन करेगा? ये भी सच है कि होमगार्ड विभाग में अनिल राजभर के राज में ‘भ्रष्टाचार की नई गाथा ‘ लिखी जा रही है उसकी भनक मुख्यमंत्री को नहीं है,वर्ना…। इलाहाबाद में होमगार्डों की फर्जी भर्ती कराकर करोड़ों रुपए कमाने का मामला अभी ठंड़ा भी नहीं पड़ा कि ‘ऊपर’ वाले के इशारे पर मुख्यालय के अफसरों ने कमाई का नया फार्मूला निकाल लिया।

अफसरों ने 22 जून को याचना के आधार पर 10 कर्मचारियों ,रनर, बीओ, वाहन चालक एवं इंस्पेक्टर का तबादला किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इलाहाबाद में पहले से ही दो की जगह तीन इंस्पेक्टर तैनात हैं और नई सूची में एक और इंस्पेक्टर विश्वनाथ राम की तैनाती जिला कमांडेंट कार्यालय में कर दी गई। यानि, इलाहाबाद में अब दो की जगह चार इंस्पेक्टर हो गए।

भई वाह, मंत्री जी आखिर इस इंस्पेक्टर में ऐसी कौन सी योग्यता है कि याचना के आधार पर आपने सभी को इलाहाबाद दिया ? यदि तबादले का आधार ‘याचना’ है तो आपको मालूम होना चाहिए कि मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र, वाराणसी से भेजे गए इंस्पेक्टर विश्वनाथ राम के बच्चे वाराणसी में पढ़ रहे हैं और परिवार भी वहीं है, फिर किस बात की याचना? मंत्री जी, मेरा सवाल है कि प्रदेश के कई जनपदों में इंस्पेक्टर नहीं हैं,कार्य प्रभावित हो रहे हैं,क्या वहां इंस्पेक्टरों की तैनाती नहीं होनी चाहिए ? लखनऊ सहित कई जनपदों में अतिरिक्त इंस्पेक्टर बैठकर ऊंघा रहे हैं,क्या उन्हें रिक्त जगहों पर तैनाती नहीं देनी चाहिए ? जनपदों में बीओ के रिक्त पद पड़े हैं, क्या उन पर आपकी नजरें इनायत नहीं होगी ?

चर्चाओं की बात करें तो सत्ता के गलियारे से लेकर होमगार्ड विभाग में सभी खुलेआम चिल्ला रहे हैं कि इंस्पेक्टर का तबादले रूकवाने और कराने की कीमत 50 हजार रुपए है। अफसरों के माध्यम से रुपए ‘ऊपर’ पहुंचवा दो,गारंटी है इस सरकार में तो कोई कार्रवाई नहीं ही होगी…। मैं तो यही कहूंगा कि अनिल राजभर जी, सरकार की नीति का कुछ तो ध्यान रखें, क्योंकि येागी जी की नजर आज नहीं तो कल इस विभाग की कार्यशैली पर पड़ेगी ही, फिर…।

होमगार्ड विभाग में 22 जून को कनिष्ठ स्टाफ अधिकारी सुभाष राम ने 10 कर्मचारियों की तबादला सूची जारी की है। जिसमें वैतनिक निरीक्षक-विश्वनाथ राम को मं. प्र. केन्द्र, वाराणसी से इलाहाबाद जिला कार्यालय, पकीजा हबीब- वैतनिक प्लाटून कमांडर को मेरठ से मेरठ जिला कार्यालय, वीरपाल कुशवाहा- बीओ को फतेहगढ़ से हरदोई, धीरेन्द्र पाल सिंह- बीओ को पीलीभीत से कासगंज, रामलखन वर्मा- बीओ को बदायूं से शाहजहांपुर, प्रमोद कुमार राणा – बीओ को मुजफ्फरनगर से बुलंदशहर, सुधीर कुमार सिंह- बीओ को कौशाम्बी से प्रतापगढ़, शरद कुमार- वाहन चालक को कन्नौज से औरैया, पुष्पेन्द्र कुमार साहू- रनर को बांदा से हमीरपुर एवं सुरेश पाल – रनर को शाहजहांपुर से हरदोई तबादला किया गया है।
पत्र में याचना के आधार पर सभी का तबादला किया गया है। सभी की जांच करानी चाहिए कि वाकई इनलोगों ने स्थानांतरण का जो आधार बनाया है वो सही है या नहीं ? क्योंकि तबादले की सीजन आते ही सभी अधिकारी एवं कर्मचारी ‘श्रवण कुमारÓ बन जाते हैं। सभी के पत्र में एक ही तरह की याचना होती है कि उनके मां-पिता अस्वस्थ हैं। उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। बच्चों को कौन देखेगा, वगैरह-वगैरह। हकीकत में अधिसंख्य अपने मां-बाप को खाने की रोटी भी मयस्सर ना कराते हों। खैर, वाराणसी से इलाहाबाद भेजे गए इंस्पेक्टर विश्वनाथ राम के बच्चे वहीं पढ़ रहे हैं और परिजन भी वहीं पर हैं फिर किस बात की याचना उन्होंने की,जांच कराई जानी चाहिए। इसी तरह अन्य नौ कर्मचारियों ने अपने स्थानांतरण का जो आधार बनाया है,उसकी भी जांच करानी चाहिए। हालांकि,लिख रहा हूं लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि एक कहावत है चोर-चोर मौसेरे भाई…। जब नीचे से लेकर ‘ऊपर’ वाले तक 50 हजार की गड्डी पहुंच गई है तो फिर कौन करेगा जांच।

बता दें कि इलाहाबाद जिला कमांडेंट कार्यालय में पहले से ही इंस्पेक्टर अंतिम सिंह, शिवकरन सिंह एवं आनंद उपाध्याय तैनात हैं,जबकि यहां पर दो इंस्पेक्टर का पद है। आनंद उपाध्याय पहले से ही अतिरिक्त में चल रहे हैं। इसी तरह लखनऊ के डीटीसी में भी एक अतिरिक्त इंस्पेक्टर तैनात है। यहां पर चार इंस्पेक्टर राकेश चंद्र मिश्रा,दीपक श्रीवास्तव,अशोक वर्मा एवं एम पी सिंह तैनात हैं। कायदे से तीन की तैनाती होनी चाहिए। बताया जाता है कि इंस्पेक्टर एम पी सिंह जब से भर्ती हुए हैं तभी से जुगाड़ फार्मूले से लखनऊ में ही जमे हैं। चौंकाने वाली बात यह भी है कि इनकी तैनाती डीटीसी में है और काम जिले का लिया जा रहा है। वाकई, इनकी काबिलियत के बारे में तो कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय ही बता सकते हैं। क्या एम पी सिंह पर मंत्री जी और डीजी की नजर नहीं पड़ रही है ?

इसी तरह, डीटीसी में वैतनिक प्लाटून कमांडरों की संख्या दो है लेकिन तैनात तीन हैं। इनमें से रवि शर्मा,कपिल मिश्रा एवं रमेश यादव को मुख्यालय पर कंट्रोल रूम में अटैच कर दिया गया है। इनका काम डीटीसी पर जवानों को ट्रेनिंग देना होता है।  इसी तरह,रामपुर में एक,अलीगढ़ में एक,झांसी में एक,गोरखपुर में एक,कानपुर डीटीसी में एक-एक इंस्पेक्टर का पद रिक्त है। बरेली डीटीसी में एक अतिरिक्त एवं मेरठ डीटीसी में दो अतिरिक्त इंस्पेक्टर तैनात हैं। सवाल यह है कि आखिर रिक्त जगहों पर मंत्री जी फाकामारी कर रहे इंस्पेक्टर्स को क्यों नहीं तैनात कर रहे हैं ? सुनने में आया है कि कई इंस्पेक्टरों ने बाहर ना जाने के लिए भी मोटी रकम का चढ़ावा चढ़ा दिया है।

बता दें कि ‘द संडे व्यूज़’ ने पिछले माह ही खुलासा किया था कि ‘ तबादले के नाम पर मोटी वसूली की जुगत में लगे हैं होमगार्ड मुख्यालय के अफसर ‘। तबादले के नाम पर कर्मचारियों से मुख्यालय और ऊपर वाले के गुर्गों ने पैसा वसूल लिया था लेकिन खुलासे के बाद से मामला दबा दिया गया था। अब दबाई गई सूची धीरे-धीरे खुल रही है। मैं तो यही कहूंगा कि योगी राज में भ्रष्टाचार की जो गाथा लिखी जा रही है उसके लिए मंत्री अनिल राजभर, डीजी सूर्य कुमार शुक्ला एवं मुख्यालय पर तैनात डीआईजी एस के सिंह हमेशा याद रखे जाएंगे।

इस बारे में होमगार्ड विभाग के प्रवक्ता सुशील मिश्रा का कहना है कि ट्रेनिंग कम होने की वजह से ही डीटीसी वालों को मुख्यालय के कंट्रोल रूम में लगाया गया है। पूर्व के डीजी का आदेश था कि कंट्रेाल रूप में डीटीसी के कर्मचारियों को तैनात किया जाए। आदेश की लिखित कांपी मांगने पर प्रवक्ता की बोलती बंद हो गई।

Post Author: thesundayviews

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