आखिर कौन सा स्वार्थ है कि डीजी सूर्य कुमार शुक्ला कमांडेंट के सामने रिरिया रहे हैं ?

डीजी साहेब, पहले अपना घर साफ करें फिर मंडल में चलाए पटल बदलो अभियान !

 

आखिर सच्चाई का खुलासा होने के बाद भी क्यों चुप्पी साधे हैं मंत्री और डीजी ?

कमांडेंट ने मचाई लूट लेकिन खामोश हैं मंत्री और डीजी

सालों से एक ही जगह जमे लोगों का कमांडेंट ने पटल क्यों नहीं बदला?

डीजी के प्रवक्ता ही लगा रहे उनकी बाट…

संजय पुरबिया

लखनऊ।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हों या फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। स्वच्छता अभियान के लिए इनलोगों ने पहले स्वयं अपने हाथों में झाडू पकड़ा और गंदगी साफ किया। संदेश गया कि जब देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री स्वयं हाथों में झाडू लगाकर भ्रष्टचार मिटाने का संकल्प ले सकते हैं तो फिर नौकरशाह या कर्मचारी क्यों नहीं कर सकते…। ये बात होमगार्ड विभाग के डीजी सूर्य कुमार शुक्ला क्यों नहीं समझते…। डीजी ने प्रदेश के सभी मंडलीय कमांडेंट को पत्र लिखकर निर्देशित किया कि वे अपने जनपदों में तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही पटल पर जमे कर्मचारियों का तबादला कर सूचित करें। डीजी ने शानदार प्रयास किया,जिस पर जनपदों से तबादला की सूची भेज भी दी लेकिन क्यों उन्होंंने ये जानने की कोशिश की कि लखनऊ के जिला कमांडेंट ने लंबे समय से जमे वसूली मैनों की सूची भेेजी है ? ऐसा तो नहीं कि कमांडेंट ने अपने कार्यालय के कुछ बाबूओं की कुर्सी इधर से ऊधर कर फर्जी सूची भेज दिया हो? क्या कमांडेंट ने डीजी को सभी वसूली मैनों की सूची भेजी है। द संडे व्यूज़ की पड़ताल में स्पष्ट है कि लखनऊ के कमांडेंट ने डीजी को जो सूची भेजी है उसमें वसूली मैनों का नाम नहीं है। इससे साबित होता है कि या तो उन्होंने डीजी को गुमराह किया या फिर जानबूझ कर सूची में वसूली मैनों का नाम नहीं डाला। सवाल यह है कि आखिर एक कमांडेंट के सामने डीजी क्यों घुटने टेक रहे हैं,समझ से परे है। मुख्यालय के अफसरों की बात मानें तो डीजी साहेब का पूरा बाहरी खर्च वहन कर रहा है,जो प्रति माह लाखों में आता है। खैर, इससे क्या लेना देना। मुद्दा है ,पटल बदलने का। मैं तो यही कहूंगा कि डीजी साहेब पहले अपना घर साफ करें उसके बाद मंडलों में चलाएं पटल बदलो अभियान।

साप्ताहिक समाचार पत्र  द संडे व्यूज़ एवं इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ डॉट कॉम ने भ्रष्टचार के खिलाफ जो मुहिम चला रखा है उससे होमगार्ड विभाग के अफसरान घनचक्कर बने हुए हैं। पहले पायदान पर इस विभाग के डीजी डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला और दूसरे पायदान पर डीआईजी एस के सिंह हैं। हास्यापद बात तो ये है कि भ्रष्टचार के जिन मामलों को खुलासा किया जा रहा है,उस पर जांच कर सख्त कार्रवाई करने के बजाए दोनों इस बात में ज्यादा ध्यान दे रहे हैं कि आखिर विभाग का खबरची कौन है? कौन है जो खबरें द संडे व्यूज को दे रहा है। साहेब यदि आप अपनी इतनी ही ऊर्जा जांच कर कार्रवाई करने में लगाते तो शायद आप पहले अधिकारी होते जिनके नाम गुडवर्क करने का रिकार्ड बन जाता। लेकिन,फिर वही सवाल बनता है कि आखिर जब खुद लूटोगे तो चोर को कैसे पकड़ोगे…। इससे ज्यादा खुलकर नहीं लिख सकता।

द संडे व्यूज एवं इंडिया एक्सप्रेस न्यूज डॉट कॉम ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भ्रष्टचार के खिलाफ चलाए जा रहे मिशन को आगे बढ़ाते हुए होमगार्ड विभाग में हो रहे भ्रष्टचार का खुलासा कर रहा है। होमगार्डों के मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा किस तरह से लखनऊ का कमांडेंट कृपाशंकर लूट रहा है,उसने कौन-कौन लोगों को वसूली मैन बनाया और किस तरह से अवैध वसूली की रकम मंत्री से लेकर मुख्यालय तक पहंचाई जा रही है,सभी का खुलासा किया। चौंकाने वाली बात तो ये है कि सारी बातें डीजी सूर्य कुमार शुक्ला की जानकारी में आने के बाद भी अभी तक सालों से जमे अवैतनिक प्लाटून कमांडर,अवैतनिक ब्लॉक आर्गनाइजरों का पटल नहीं बदला। इससे साबित होता है कि ये लोग इस विभाग में भ्रष्टचार को बढ़ावा देने पर पूरी तरह से आमादा हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास और कार्यालय पर तैनात होमगार्ड हों या फि र यातायात से लेकर थानों व सार्वजनिक प्रतिष्ठान,सभी से ड्यूटी लगाने के नाम पर जबरदस्त वसूली की जा रही है। लखनऊ के कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय ने सभी जगह पुराने ड्यूटी इंचार्ज को लगा रखा है जिनके माध्यम से 15 से 20 लाख रुपए प्रतिमाह वसूली की जा रही है। खास बात यह है कि थानों से लेकर कलेक्ट्रेट, सचिवालय एवं अन्य प्रतिष्ठïानों पर बड़े पैमाने पर फ र्जी होमगार्ड तैनात किये जा रहे हैं और सरकार से उनके नाम पर हर माह लाखों रुपए का भुगतान हो रहा है। पूरी रकम पाण्डेय जी की जेब में समा रहा है।

सवाल यह है कि आखिर कमांडेंट ने पुराने वैतनिक व अवैतनिक ड्यूटी इंचार्जों को क्यों नहीं हटाया जबकि, शासन स्तर पर बार- बार निर्देश दिया जा रहा है कि पुराने ड्यूटी इंचार्ज की जगह नये ईमानदार छवि के वैतनिक व अवैतनिक कर्मचारियों को इंचार्ज बनाया जाये। इस खेल में कमांडेंट पर पूरी तरह से वरदहस्त मुख्यालय के उन भ्रष्ट अधिकारियों का है जिन्हें सभी को मैनेज करना पड़ रहा है। राजधानी होने की वजह से यहां के थानों ,यातायात व्यवस्था, सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को संवारना पुलिस प्रशासन के लिये हमेशा से चुनौती रहा है। लेकिन इन्हें ड्यूटी देने के नाम पर जिस तरह से विभागीय अधिकारी शोषण करते हैं ।

जवानों ने बताया कि पिछली सरकारों के समय से बीओ राजकुमार वर्मा, इंस्पेक्टर उदय बहादुर, बीओ ओ पी सिंह, राजेश सिंह़ कंपनी कमांडर कुलदीप शुक्ला, इंस्पेक्टर शेर प्रताप सिंह, हवलदार रंजीत यादव, सुरेश सिंह सहित अवैतनिक कंपनी कमांडर अरूण रावत, सुशील सिंह वर्षों से तैनात हैं। शासन ने हाल ही में आदेश जारी किया था कि सभी कर्मचारियों का पटल बदल दिया जाये लेकिन कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय ने अभी तक आदेश का पालन नहीं किया। इसी तरह डीजी, होमगार्ड डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने भी कमांडेंट को लिखित निर्देश दिया कि विभाग के ईमानदार वैतनिक व अवैतनिक कर्मचारियों को इनकी जगह पर तैनात किया जाये लेकिन ऐसा लगता है मानों पाण्डेय जी ने इनलोगों का ताख पर रख दिया है।  जवानों ने बताया कि एमसीआर से प्रतिमाह 2 लाख रुपए, कलेक्ट्रेट से 1.50 लाख रुपए, थानों से लगभग 6-7 लाख रुपए एवं अन्य जगहों से मिलाकर जवानों को ड्यूटी देने के नाम पर प्रतिमाह लगभग 15 से 20 लाख रुपए की वसूली की जा रही है। बताया जाता है कि जिसमें से मंत्री अनिल राजभर को 2 लाख रुपए, डीजी को बेगारी करने के नाम पर 60- 70 हजार रुपए, डीआईजी एस के सिंह को 50 हजार रुपए प्रतिमाह जाता है।

द संडे व्यूज़ की खबर को डीजी सूर्य कुमार शुक्ला ने गंभीरता से लिया और प्रदेश के सभी मंडलीय कमांडेंट को पत्र लिखकर निर्देशित किया कि वे तीन वर्ष से अधिक समय से जमे कर्मचारियों का पटल बदलकर अवगत कराए। कई जनपदों के जिला कमांडेंट ने पटल बदलकर डीजी को फैक्स के माध्यम से अवगत करा दिया लेकिन लखनऊ जिला कार्यालय से ऐसे कर्मचारियों की सूची भेजी गई जिन्होंने तीन वर्ष तो पूरे कर लिए लेकिन वे बेईमान नहीं हैं। द संडे व्यूज़ ने खुलासा कर ऐसे कर्मचारियों का नाम उजागर किया था जो वर्षों से इस शहर में वसूली मैन का काम करते चले आ रहे हैं और जिन पर लखनऊ कमांडेंट कृपाशंकर का वरदहस्त है। बावजूद इसके अभी तक कमांडेंट ने न तो उक्त वसूली मैनों का कार्यपटल बदला और ना ही शासन के आदेश को माना। इससे साबित होता है कि वो पूरी तरह से डीजी को गुमराह करने का काम कर रहे हैं।

डीजी सूर्य कुमार शुक्ला से बात हुई थी तो उन्होंने कहा था कि कमांडेंट ने तीन वर्ष से जमे कर्मचारियों की सूची भेजी है,उनका नाम पीआरओ से ले लिजिएगा।

पीआरओ सुशील मिश्रा से बात की गई लेकिन उन्होंने आज तक सूची उपलब्ध नहीं कराई। इनका कहना है कि डीजी ने खुद खेद व्यक्त किया है कि अभी तक अधिकारियों ने पूरी सूची उपलब्ध क्यों नहीं कराई। आखिर में एक सवाल – क्या कमांडेंट डीजी को भी खरीद लिया है? यदि नहीं बिके तो, डीजी वर्षों से जमे वसूली मैन बीओ राजकुमार वर्मा,इंस्पेक्टर उदय बहादुर, बीओ ओ पी सिंह, राजेश सिंह,कंपनी कमांडर कुलदीप शुक्ला, इंस्पेक्टर शेर प्रताप सिंह, हवलदार रंजीत यादव, सुरेश सिंह, वैतनिक कंपनी कमांडर अरूण रावत एवं सुशील सिंह का पटल क्यों नहीं बदलवा पा रहे हैं ?

 

शेष अगले अंक में—
बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां सुभान अल्लाह…
जो अपने भाई के लिए नियम तोड़ेगा क्या उसे दूसरों को नसीहत देने का अधिकार है ?
क्या ऐसा डीजी विभाग के लिए रोल माडल बन सकता है जो अपनों के लिए नियम तोड़े ?

 

Post Author: thesundayviews

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