breaking news -समय को चुनौती देते डीआईजी: डीजी साहेब, आपके डीआईजी बदहवास हैं या कर रहे आपका अपमान ?

बदहवास हुए डीआईजी: 15 को जारी पत्र, 14 की शाम तक पत्रावलियां जमा करने का आदेश

डीआईजी के साथ-साथ उनका क्लर्क भी जी रहा मुगालते में

संजय पुरबिया

लखनऊ।

उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार में कुछ अफसर समय चुनौती दे रहे हैं। अफसरों के साथ-साथ उनके तेल लगाने वाले क्लर्क भी समय को चुनौती देने के लिए ठान लिए हैं। ये सारी बातें सूबे में योगी राज में देखने को मिल रहा है। इस सरकार में राम राज्य भले ही देखने को ना मिले लेकिन अफसर कुछ तरह की चुनौतियां दे रहे हैं। सूबे के अफसर जो भी काम करते हैं उससे एक दिन पहले ही अपने मातहतों से जवाब मांगते हैं वो भी लिखित तौर से…। आपलोग हैरान हो गए होंगे लेकिन मैं पूरे होशो-हवास में खबर लिख रहा हूं। एक ऐसा विद्वान अफसर हैं जो 14 जून को पत्र जारी करता है और जवाब 13 जून को मांगता है। इसी तरह, दूसरा पत्र 15 जून को पत्र जारी करता है और अफसरों से 14 जून को ही जवाब मांग रहा है। दो पत्र ने प्रदेश के सभी अफसरों को हतप्रभ कर दिया है। पत्र में अफसर ने अपने से एक-दो पायदान नीचे के अफसरों को चेतावनी भी दी है कि जो जवाब मांगा गया है उसे प्रत्येक दशा में फैक्स के माध्यम से भेजा जाए। यानि,जब तारीख लिखा गया है उसी दिन हर हाल में आप लोग जवाब दें।

प्रदेश में चर्चा है कि या तो अफसर सठिया गए हैं या द संडे व्यूज़ की झन्नाटेरार खबरों से बदहवास हो गए हैं। खैर,जो भी हो। खबर का असर तो दिख रहा है। भले ही होमगार्ड मंत्री अनिल राजभर इस विभाग के भ्रष्टï अफसरों पर मेहरबान होकर कोई कार्रवाई ना करें लेकिन खबर की सच्चाई ने उनके चहेते भ्रष्ट डीआईजी एस के सिंह को इतना बदहवास कर दिया है कि बेतुका काम करते चले जा रहे हैं। अफसरों में चर्चा ये भी है कि कहीं डीजी सूर्य कुमार शुक्ला की इमेज खराब करने के लिए डीआईजी एस के सिंह जानबूझ कर इस तरह का पत्र तो जारी नहीं कर रहे हैं ?

होमगार्ड विभाग में भ्रष्टïाचार करने वाले अफसरों पर मंत्री अनिल राजभर इस कदर मेहरबान हैं कि वो बदहवासी के आलम में है। लखनऊ के कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय खुलेआम मंत्री को 2 लाख रुपए देने की बात करते हैं तो डीआईजी एस के सिंह उल्टा-सीधा पत्र जारी कर रहे हैं। एक डीआईजी स्तर का अधिकारी इतना गैर जिम्मेदार कैसे हो सकता है? जिस अफसर को ये ना पता हो कि वो जो पत्र जारी कर रहा है उसका जवाब एक दिन बाद अपने सहयोगियों से जवाब मांगे, वो इस कुर्सी के लायक है ही नहीं…। इससे साबित होता है कि डीआईजी या तो अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं या फिर वे बदहवासी के आलम में हैं या वे जान-बूझ कर डीजी सूर्य कुमार शुक्ला की इमेज खराब करने पर आमादा हैं।

बता दें कि द संडे व्यूज़ एवं इंडिया एक्सप्रेस न्यूज डॉट कॉम ने 30 अप्रैल को सर मैं हूं न एवं 17 मई को इलाहाबाद भर्ती घोटाले के मास्टर माइंड डीआईजी एस के ङ्क्षसह को क्यों बख्श दिया गया शीर्षक नाम से खबरें प्रकाशित की। इस खबर के प्रकाशित होने के बाद डीआईजी ने दबाव बनाने के सारे जतन लगा दिए लेकिन नाकामयाबी हाथ लगी। उनके बदहवासी को आलम यह है कि हाल ही में डीजी सूर्य कुमार शुक्ला के एक गुडवर्क को बेडवर्क में बदलने में कोई चूक नहीं की। शातिर डीआईजी ने दो पत्र जारी किया जिसमें हुई चूक साबित कर रहा है कि या तो वे खबर की सच्चाई से बदहवास हैं या फिर डीजी की साख को पूरी तरह से खराब करने पर आमादा हैं।

 

बता दें कि डीजी सूर्य कुमार शुक्ला से द संडे व्यूज़ एवं इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ डॉट कॉम के ब्यूरो चीफ संजय पुरबिया ने विभाग में हो रहे भ्रष्टïाचार को रोकने के लिए सुझाव दिया था कि लंबे समय से एक ही जगह जमे कर्मचारियों का पटल बदला जाए ताकि भ्रष्टïाचार पर विराम लग सके। सुझाव यह भी था कि लखनऊ जिला कमांडेंट कार्यालय में वर्षो से जमे वसूली मैनों को हटाकर दूसरे ईमानदार कर्मचारियों को काम करने का मौका दिया जाए। इस सुझाव को सम्मान देते हुए डीजी ने सभी मंडलीय कमांडेंट को पत्र जारी कर पटल बदलने के निर्देश जारी किए। असर यह रहा कि कई जिलों में पटल बदल दिए,लखनऊ को छोड़कर। जहां-जहां पटल बदले गए वहां के कर्मचारियों का अभिलेख डीजी द्वारा बार-बार मांगने के बाद भी अभी तक नहीं दिया गया। इस पर डीजी ने डीआईजी एस के सिंह को सभी मंडलीय,जिला कमांडेंट को हर हाल में अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। अब देखिए,डीआईजी ने क्या फरमान जारी किया।

 

14 जून को एस के सिंह ने पत्र में लिखा है कि 3 वर्ष से एक ही पटल पर जमे सभी सहायकों का पटल परिवर्तन कर प्रमाण पत्र उपलब्ध करायी जाए। जिन लिपिकों का पटल बदल दिया गया है उनका प्रमाण पत्र फैक्स के माध्यम से 13 जून तक दे दिया जाए। इसी तरह दूसरा पत्र 15 जून को जारी किया गया जिसमें लिखा है कि 6 वर्ष से अधिक कार्मिकों के स्थानांतरण एवं तीन वर्ष से अधिक समय से जमे सहायकों का पटल परिवर्तन करके प्रमाण पत्र 14 जून तक हर हाल में फैक्स से भेजें। ताज्जुब की बात ये है कि डीआईजी एस के ङ्क्षसह ने ये पत्र आगरा, इलाहाबाद, मेरठ, अलीगढ, आजमगढ, फैजाबाद, सहारनपुर, झांसी, गोण्डा, चित्रकूट, कानपुर, बरेली, फैजाबाद एवं देवीपाटन के मंडलीय कमांडेंट को जारी किया है।

उक्त मंडलों के मंडलीय कमांडेंट दोनों पत्र को देखकर थोड़ा नहीं पूरी तरह से कन्फ्यूजिया गए हैं। कईयों तो अपने को कोस रहे हैं कि किस विद्वान डीआईजी से उनका पाला पड़ गया है। यो तो वे वाकई विद्वान हैं या फिर…। खैर, मैं कुछ भी नही बोलूंगा। अब आते हैं असल मुद्दे पर। या तो डीआईजी एस के सिंह में इतनी काबिलियत नहीं है कि वो अपने ही लिखे पत्र की खामियों को पकड़ लें या फिर वे जानबूझ कर डीजी सूर्य कुमार शुक्ला के गुडवर्क को बेडवर्क बनाने पर आमादा हैं। यदि पहली बात है तो फिर इन्हें डीआईजी किसने बनाया,इसका जवाब वही दे। दूसरी बात है तो मैं तो यही कहूंगा कि डीजी साहेब आप अपनी बचाएं,क्योंकि आपका रिटायरमेंट बेहद करीब है। यही हाल रहा तो आपके डीआईजी आपका ही काम लगा देंगे…

 

                                                                      शेष अगले अंक में

                                                                                     डीआईजी एस के सिंह पर किसका है वरदहस्त

                                                                                                                               आखिर किसकी शह पर हैं बदहवास डीआईज

Post Author: thesundayviews

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