वाराणसी में 14 वर्ष के बच्चे की नियुक्ति करने वाले कमांडेंट पर क्या होगी कार्रवाई ?

जिलों मे14 वर्ष सात माह में कर डाली होमगार्ड विभाग में नियुक्ति

जब कमांडेंट जन सूचना अधिकारी हैं तो उन्हें सब कुछ मालूम था,क्यों नहीं अफसरों को बताया

आखिर कमांडेंट ने क्यों प्यारे मोहन यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कराया

संजय पुरबिया

लखनऊ। वाराणसी में 14 वर्ष सात माह के बालक को होमगार्ड विभाग में होमगार्ड स्वयं सेवक के रूप में भर्ती कर दी गई। जब आरटीआई से जवाब मांगा गया तो जिला कमांडेंट,वाराणसी ने ही जवाब दिया कि जिस प्यारे मोहन बच्चे की बात कर रहे हैं वो तो नौजवान है? फिर उसकी नियुक्ति कैसे कर ली गई ? वाराणसी के कमांडेंट को जब इस फ्राड की जानकारी हो गई थी तो उन्होंने तत्काल उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज क्यों नहीं कराया? आखिर उन्होंने सब कुछ जानने के बाद भी उसे विभाग में क्यों रखा?यह भी पता लगाने की बात है कि किस जिला कमांडेंट के कार्यकाल में ये सब हुआ ? क्योंकि जितना दोषी उम्र कम दिखाकर भर्ती होने वाला व्यक्ति है उतना ही दोषी वो जिला कमांडेंट है जिसने उसकी भर्ती की। बहरहाल,इस खुलासे के बाद होमगार्ड विभाग में हड़कम्प है क्योंकि इस मामले ने साबित कर दिया कि योगी राज में सब कुछ संभव है।

 

द संडे व्यूज़ एवं इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ डॉट कॉम ने 8 जून को इस खबर को जिलों में 14 वर्ष सात माह में कर डाली होमगार्ड विभाग में नियुक्ति शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। होमगार्ड विभाग में दो नंबरियों की जितनी भी जांचें मुख्यालय पहुंचती रही है उसे डीआईजी एस के सिंह ने दबा दिया है। पिछले एक वर्ष के दौरान ऐसा कोई वाक्या याद नहीं आ रहा जिन पत्रावलियों पर डीआईजी ने एक्शन लिया हो। शुक्र है उस युवक की जिसने आरटीआई द्वारा प्यारे मोहन यादव के उम्र की पड़ताल की। गलत उम्र दिखाकर अपनी नियुक्ति कराने वाले उस शख्स का नाम मोहन प्यारे यादव है जो नई बस्ती, पाण्डेयपुर, वाराणसी का रहने वाला है। होमगार्ड विभाग में 6 मई 1984 को होमगार्ड स्वयं सेवक के रूप में नियुक्ति की गई। नियुक्ति के समय उसकी उम्र्र 3 अगस्त 1969 थी, इस तरह उसकी नियुक्त 14 वर्ष सात माह में किया गया है।

आते हैं शासनादेश पर। इसके मुताबिक किसी भी सरकारी या गैर सरकारी कर्मचारी बनने के लिए उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए लेकिन मोहन प्यारे अफसरों को इतने प्यारे लगे कि उनलोगों ने नियम को ताख पर रखकर उसकी नियुक्ति कर दी। अब ये मत पूछिएगा कि इस फर्जी काम के लिए अफसरों ने कितने पैसे लिए…।अभी हम बात कर रहे हैं अफ सरों के प्यारे प्यारे मोहन यादव की। भाजपा की सरकार में वो सब कुछ हो रहा है जो अभी तक पिछली सरकारों में नहीं देखने और सुनने को मिला। होमगार्ड मंत्री अनिल राजभर को हो सकता है इस बात की जानकारी ना हो लेकिन अब तो मालूम चल ही गया होगा।  जांच का विषय ये है कि जिस जिला कमांडेंट के कार्यकाल में प्यारे मोहन यादव की नियुक्ति की गई और जिसने सब कुछ आरटीआई को बताया उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। क्योंकि जितना दोषी प्यारे मोहन यादव है उतना ही दोषी जिला कमांडेंट भी है।

Post Author: thesundayviews

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