योगी की नीति को मंत्री और शासन के अफसरों ने तोड़ी , चहेते अफसरों को मिली नई तैनाती

योगी की नीति को मंत्री और शासन के अफसरों ने तोड़ी , चहेते अफसरों को मिली नई तैनाती

तीन वर्ष से कम तैनाती वाले कमांडेंट में मंत्री और शासन के पसंदीदा कमांडेंट

तीन वर्ष से कम तैनाती वाले कमांडेंट्स के बोल : तैनाती मिल गई,कोई नहीं करा सकता वापसी

दस्तावेज दिखाता हूं: कुमार कमलेश

संजय पुरबिया

लखनऊ।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार को बदनाम कार्यकर्ता नहीं बल्कि उनकी सरकार के तथाकथित मंत्री और नौकरशाह कर रहे हैं। उप-चुनावों में मिली करारी हार इसी का नतीजा है। सरकार मंथन तो कर रही है लेकिन जनादेश और सरकारी विभाग में नियम-कानून का सम्मान करने वाले अफसरानों के साथ जब छल होता है तो उनका आक्रोश सरकार के प्रति दिखता है। होमगार्ड विभाग में भी आक्रोश है लेकिन दिख नहीं रहा। ईमानदार और पदोन्नति में अपनी बारी का इंतजार करने वाले अफसरों ने विभागीय मंत्री और शासन के नौकरशाहों के खिलाफ मुंह खोलना शुरू कर दिया है,जो जायज दिखता है। शासन के निर्देश पर होमगार्ड विभाग में समूह क एवं ख के अधिकारी जो तीन वर्ष से एक ही मंडल या जिले में तैनात थें, 16 कमांडेंट का तबादला किया गया। इनमें से 9 ऐसे कमांडेंट हैं जिनका एक जनपद में तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा हुआ ही नहीं,लेकिन उन्हें मनचाहा जिला दे दिया गया। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि तबादलों में होमगार्ड मंत्री और शासन के अफसरों की पैरवी की गई है। नियम को तार-तार करने के आदेश के बाद डीजी ने एक और आदेश जारी कर तीन वर्ष पूरा कर चुके जिन कमांडेंट्स को नई तैनाती नहीं मिली है,उसका एक बार फिर ब्यौरा मंगाया है। अफसरों ने बताया कि मामले को शांत कराने की एक चाल है। अब किसी पात्र कमांडेंट को जिले में तैनाती नहीं मिलेगी। कुल मिलाकर ,मंत्री और शासन के अफसरों ने योगी की नीति की धज्जियां उड़ा दी और तीन वर्ष बाद नई तैनाती के लिए इंतजार कर रहे कमांडेंट को लालीपाप थमा दिया गया है।

वर्ष 2018-19 में समूह ख संवर्ग के विभागीय राजपत्रित अधिकारियों व अराजपत्रित कर्मचारियों के वार्षिक स्थानांतरण के लिए एैच्छिक स्थानों का विकल्प मांगने के साथ ही उनका तीन वर्ष का एक ही जनपद व मंडल में कार्यकाल होना चाहिए। शासन के निर्देश पर 11 अप्रैल को स्टॉफ आफि सर टु कमांडेंट जनरल रामलाल वर्मा ने गोण्डा, सोनभद्र, इलाहाबाद, फतेहपुर, बलरामपुर, मैनपुरी, हाथरस, खीरी, बलिया, सिद्धार्थनगर, चंदौली, इटावा, झांसी, पीलीभीत, जौनपुर, रामपुर एवं रायबरेली के जिला कमांडेंट को मीटिंग के लिये,लखनऊ होमगार्ड मुख्यालय बुलाया था। तीन वर्ष पूरा कर चुके कमांडेंट की तैनाती नए जिलों में की जाएगी। इस तरह जिलों में तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके कमांडेंट जिनके नाम क्रमश: निन्म हैं- गोण्डा के कमांडेंट धर्मदेव मौर्य ने तीन वर्ष नौ माह, सोनभ्रद्र के कमांडेंट ज्योति कुमार रायजादा ने तीन वर्ष पंाच माह, इलाहाबाद के कमांडेंट प्रियव्रत सिंह ने तीन वर्ष, जो अब निलंबित कर दिए गए हैं, फ तेहपुर के कमांडेंट मुन्नू लाल ने तीन वर्ष आठ माह, बलरामपुर के कमांडेंट विशम्भर प्रसाद मिश्रा का तीन वर्ष नौ माह, मैनपुर के कमांडेंट रविशंकर त्रिवेदी का तीन वर्ष, हाथरस के कमांडेंट अर्जुन प्रसाद का तीन वर्ष, डॉ. बृजेश कुमार मिश्र का तीन वर्ष, लखीमरपुर खीरी के कमांडेंट गुरशरण रावत का तीन वर्ष, सिद्धार्थनगर के कमांडेंट रमेश कुमार का तीन वर्ष, चंदौली के कमांडेंट सुनील कुमार- तृतीय का तीन वर्ष, इटावा के कमांडेंट संजय कुमार शर्मा का तीन वर्ष, झांसी कमांडेंट अजय कुमार सिंह का तीन वर्ष, पीलीभीत कमांडेंट रमाकांत पाठक का तीन वर्ष, जौनपुर के कमांडेंट विनोद कुमार झा का तीन वर्ष, रामपुर के कमांडेंट मनोज सिंह बघेल का तीन वर्ष एवं रायबरेली के कमांडेंट रंजीत सिंह का तीन वर्ष कार्यकाल है। उक्त सभी कमांडेंट से उनके मन मुताबिक तीन एैच्छिक स्थानों का विकल्प मांगा गया।

खास बात यह है कि 9 मई को डीजी के स्तर से नई तबादला सूची जारी की गई है इनमें से तीन वर्ष पूरी करने वाले 7 कमांडेंट का ही तबादला किया गया है। इसके अलावा 9 ऐसे कमांडेंट का तबादला कर दिया गया जिनका कार्यकाल जिलों में तीन वर्ष से कम है। तीन वर्ष से कम कार्यकाल होने वाले कमांडेंट का नाम निम्र हैं- अतुल कुमार सिंह गौतम का संतकबीरनगर से प्रतापगढ़, श्रीमती प्रीति शर्मा का मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र एबरेली से बरेली का कार्यभार दे दिया है। इसी तरहए अभिलेष नारायण सिंह का बरेली जिला कमांडेंट से बिजनौर, बृजेश कुमार मिश्र का मिर्जापुर से मं. प्र. केन्द्र, इलाहाबाद के अलावा कुंभ मेला का अतिरिक्त प्रभार, शैलेन्द्र प्रताप सिंह को मं. प्र. केन्द्र, इलाहाबाद से मिर्जापुर, अनिल कुमार यादव का कासगंज से बलिया, दिलीप कुमार यादव का प्रतापगढ़ से मं. प्र. केन्द्र, फैजाबाद, मार्कण्डेय सिंह का मं. प्र. केन्द्र, आजमगढ़ से चंदौली हैं।

बता दें कि 21 अप्रैल को कमांडेंट के तबादले में क्या रेट चलेगा इसका खुलासा द संडे व्यूज़ डॉट कॉम एवं इंडिया एक्सप्रेस न्यूज डॉट कॉम ने तबादले का माल अंदर डीजी गए मायानगरी एवं माल अंदर करने वाले अफ सर हलकान, ट्रांसफ र नहीं हुआ तो लौटाना पड़ेगा माल शीर्षक से खबरें प्रकाशित की थी। विभाग में हड़कम्प मचा और डीजी ने अचानक रातो- रात 9 मई को 16 कमांडेंट्स का तबादला कर दिया। नियम की बात करें तो डीजी को इस पद पर किसी अधिकारी को तैनात करने का अधिकार है ही नहीं, क्योंकि क्लास वन एवं टू ऑफि सर का तबादला एवं कार्यभार लेने का अधिकार सिर्फ शासन को है ना कि डीजी को। कायदे से उन्हें शासन को रामलाल वर्मा के तबादले से अवगत कराना चाहिए, वहां से जिस अधिकारी की तैनाती का लिखित आदेश होता, उसे ही चार्ज देते। डीजी की मंशा शुरू से रही कि किसी तरह ट्रांसफ र में अपनी मनमानी कर लाखों रुपए अंदर कर लें जिसमें वे पूरी तरह से कामयाब भी हो गए हैं।

तीन वर्ष पूरे ना करने के बाद भी मनचाही तैनाती पाने वाले कुछ कमांडेंट के बोल अब खोल रहे हैं सारे पोल। फर्जी तरीके से किए गए इस ट्रांसफर में अधिकांश होमगार्ड मंत्री और शासन की सिफारिश चली है। अफसरों के बीच चर्चा जोरों पर है कि माननीय और शासन के लोग अपने लोगों को बिठाने के आगे ये भी नहीं सोचे कि इसका विभाग में क्या संदेश जाएगा। आखिर जो लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे थें उन्हें क्या मिला? जो इसके हकदार नहीं थें उन्हें मलाईदार कुर्सी मिल गई…। क्या मंत्री या शासन के अफसरानों ने ये नहीं सोचा कि इस फर्जीवाड़े का अफसरों पर क्या असर पड़ेगा ?

इस बारे में डीजी सूर्य कुमार शुक्ला से जब मुख्यालय पर संवाददाता की मीटिंग हुई थी तो एक सवाल के जवाब में उन्होंने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा था कि इसमें कई सिफारिश मंत्री और शाासन के लोगों की है। मैं क्या कर सकता हूं। प्रमुख सचिव कुमार कमलेश ने अनौपचारिक वार्ता में बताया कि दस्तावेज दे दें,मैं पता करता हूं।

Post Author: thesundayviews

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