गुस्साए डीजी ने छोटे भाई (सीटीआई कमांडेंट) को सुनाया फरमान: ट्रेनर का तत्काल करो तबादला

बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां सुभान अल्लाह…

घर पर योगा सिखाने वाले ट्रेनर ने मांगा पेट्रोल तो खिसियाए डीजी

सीटीआई कमांडेंट ने ट्रेनर को भेजा सीतापुर, यहां नहीं है ये पद

(ट्रेनर) कनिष्ठ प्रशिक्षक का यूपी में सिर्फ सीटीआई पर ही है पद

संजय पुरबिया
लखनऊ।

होमगार्ड विभाग अपने घटिया कारनामों की वजह से हमेशा सुर्खियों में है। शासन से बिना अनुमति लिए इलाहाबाद में होमगार्डों की भर्ती करने की बात हो या फिर तीन वर्ष ना करने वाले कमांडेंट्स का तबादला या पैसे लेकर मनचाही तैनाती। इससे घटिया बात और क्या हो सकता है कि इस विभाग के डीजी डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने सिर्फ इस बात के लिए एक ट्रेनर का तबादला सीतापुर करा दिया क्योंकि उसने घरेलू काम कर रहे होमगार्डों की तरह उसने भी विभागीय बाईक और पेट्रोल की मांग कर दी। जब आप मुख्यालय पर टे्रनिंग देने वाले कनिष्ठ प्रशिक्षक को अपने गोमतीनगर स्थित आवास पर फ्री में योगी सिखाने के लिए बुलाएंगे तो उसका भत्ता कौन देगा ? बस फिर क्या था, डीजी साहेब ने तुरंत अपना फरमान अपने अनुज सीटीआई कमांडेंट संजीव शुक्ला को सुना दिया। शुक्ला जी ने तत्काल प्रभाव से सीटीआई पर तैनात कनिष्ट प्रशिक्षक  हरिचरन सिंह का तबादला सीतापुर जिला कमांडेंट कार्यालय में कर दिया। शुक्ला जी जोश में ये भूल गए कि कनिष्ठ प्रशिक्षक का पद यूपी में सिर्फ सीटीआई, लखनऊ में ही है ? फिर उन्होंने उसे किस आधार पर सीतापुर जिला कार्यालय तबादला कर दिया ? बता दें कि कनिष्ठ प्रशिक्षक हरिचरन सिंह मानसिक रोगी भी हैं और उनका इलाज नूरमंजिल में चल रहा है। विभाग में चर्चा जोरों पर है कि जब बड़े मियां तीर चलाएंगे तो छोटे मियां तोप तो दागेंगे ही…।

जब किसी विधायक को माननीय का पद मिलता है तो वो उसकी गरिमा को बनाए रखने के लिए पूरी कोशिश करते हैं लेकिन उनके नाते-रिश्तेरदार भौकाल दिखाने के चक्कर में ये भूल जाते हैं कि माननीय की इमेज कैसे बनाए रखें। वे वसूूली से लेकर नियम विपरित सारे काम करने या कराने लगते हैं। ठीक उसी तरह,जब कोई आईपीएस किसी विभाग में तैनात होता है और वहां पर उनके भाई तैनात हों, तो फिर उसका आतंक तो दिखेगा ही। कुछ ऐसा ही नजारा होमगार्ड विभाग में पिछले कई माह से दिख रहा है। डीजी डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला के छोटे भाई संजीव शुक्ला मुख्यालय स्थित सीटीआई में मंडलीय कमांडेंट के पद पर तैनात हैं। सीटीआई में तैनात कनिष्ठ  प्रशिक्षक ट्रेनर हरिचरन सिंह जो सूर्य शुक्ला के गोमतीनगर स्थित आवास पर प्रतिदिन सुबह सात बजे योगा सिखाने जाते थें। इसके एवज में उसे अतिरिक्त कुछ नहीं मिलता था लेकिन हर दिन उसकी दिनचर्या सुबह सात से नौ बजे तक डीजी साहेब को योगा कराना था।

डीजी के आवास पर कई होमगार्ड भी तैनात हैं जो वहां उनकी और घरवालों की चाकरी करते हैं। होमगार्डों को डीजी साहेब ने विभागीय बाईक और विभागीय पेट्रेाल भी मुहैया करा रखा है। ट्रेनर हरिचरन सिंह भी सब कुछ चुपचाप देखता और सुनता रहता था। एक दिन उसने डीजी से कहा कि उसे भी गोमती नगर आने-जाने के लिए विभागीय बाईक और पेट्रेाल की सुविधा मुहैया करा दें तो मुझे राहत मिज जाएगी। बस ट्रेनर  ने यही गल्ती कर दी। डीजी साहेब गुस्सिया गए। उन्होंने डीआईजी एस के सिंह को निर्देश दिया कि ट्रेनर हरिचरन सिंह का तबादला किया जाए।

डीआईजी साहेब ने क्वीक एक्शन लिया और 28 फरवरी को सीटीआइ्र कमांडेंट को पत्र लिखा कि प्रशासनिक आधार पर तत्काल प्रभाव से हरिचरन सिंह का तबादला केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थान,होमगार्ड मुख्यालय से सीतापुर जिला कमांडेंट कार्यालय करें और अवगत कराएं। सीटीआई कमांडेंट यानि डीजी साहेब के छोटे अनुज सीटीआई कमांडेंट संजीव शुक्ला भी तत्काल प्रभाव से 3 मार्च को टे्रनर को सीतापुर जाकर कार्यभार ग्रहण कर अवगत कराने का फरमान जारी कर दिया। अब बड़े भईया गुस्सिया गए तो छोटे भाई को बर्दाश्त नहीं ही होना चाहिए।

आपलोग ध्यान दें डीआईजी एस के सिंह और सीटीआई,कमांडेंट संजीव शुक्ला,दोनों इस पहले और आखिरी मामले में सारा काम तत्काल किया है। बेचारा हरिचरन मारा गया,उसे सीतापुर भेज दिया गया। तब कहीं जाकर डीजी साहेब शांत हुए लेकिन डीआईजी एवं सीटीआई कमांडेंट ये भूल गए कि जो पद सिर्फ सीटीआई पर ही है वहां तैनात कनिष्ठ प्रशिक्षक को सीतापुर में कैसे तैनात कर दिया ? सीतापुर में इस पद पर इनसे क्या काम लिया जा रहा होगा इसका सही जवाब तो सीतापुर के कमांडेंट ही बता पाएंगे लेकिन जोश में होश खो बैठने की कहावत डीजी, डीआईजी और सीटीआई कमांडेंट पर सही लागू होता है। शायद इनलोगों को भी नहीं मालूम कि प्रदेश में सिर्फ सीटीआई पर ही कनिष्ठ प्रशिक्षक के सात पद हैं जिनमें से दो रिक्त हैं।

इस पर कनिष्ठ  प्रशिक्षक हरिचरन सिंह की पत्नी ने शासन को पत्र लिखा है। हरिचरन के मुताबिक गोमतीनगर आवास पर जाने के लिए सिर्फ डीजी से सरकारी बाईक और पेट्रोल की मांग करना उसके लिए काल बन गया। मेरा नूरमंजिल में इलाज चल रहा है और मुझे साइकेटिक की प्राब्लम है। यदि डीजी साहेब को मुझे सजा ही देनी थी तो बेडइंट्री दे देतें लेकिन जो पद कहीं और नहीं है वहां मुझे क्यों भेजा गया। खैर,हरिचरन की पत्नी संजू देवी के पत्र को शासन को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि ट्रेनर मुख्यालय पर जवानों को योगा सिखाने के लिए है ना कि डीजी के निजी आवास पर जाकर सभी को योगा सिखाने के लिए ?

चलिए मान लेते हैं हरिचरन ने सरकारी बाईक आने-जाने के लिए मांग कर गुनाह किया तो डीजी ने उसे घर पर बुलाकर शासनादेश की घोर अवहेलना की है,इन्हें कौन सी सजा देनी चाहिए ?  भईया, तो ठहरा छोटा पत्रकार अब इससे ज्यादा नहीं बोलूंगा नहीं तो गुर्गे हमरे ऊपर गुसिया जाएंगे…

Post Author: thesundayviews

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