अल्पसंख्यक होना जलालू का गुनाह है!

एक ऐसा अपराध जो हुआ ही नहीं!

क्या कब्रिस्तान में मौजूद युवक पांच किलो मीटर दूर जाकर गोली मार सकता है?

सैंकड़ों लोगों के सामने कब्र खोद रहा जलालू,पुलिस ने उसे बनाया अपराधी

गांव वालों ने एसएसपी,डीएम को दिया जलालू के बेगुनाही का शपथ पत्र,नहीं हुई कार्रवाई संजय पुरबिया

लखनऊ।

उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से अपराध तो बढ़े ही हैं लेकिन फर्जी अपराध का ग्राफ भी आसमान छू रहा है। किसी बेगुनाह को सलाखों के पीछे भेजने के लिए पुलिस के अधिकारी इस कदर बेचैन हैं मानों उन्हें डीजी साहेब बेस्ट अवार्ड देने के लिए आतुर हैं। एक मामले में पूरा गांव चीख-चीख कर एक नौजवान की बेगुनाही का सबूत दे रहा है लेकिन पुलिस के अफसरानों पर इसका असर नहीं पड़ रहा। वो नौजवान पिछले नौ माह पुलिसिया जुल्म से बचने के लिए से एक शहर से दूसरे शहर को भाग रहा है लेकिन उसे न्याय नहीं मिल रहा। शासन-प्रशासन से लेकर सीएम तक उसने अपनी बेगुनाही के दरख्वास्त दिए लेकिन ऐसा लग रहा है मानों भाजपा सरकार में उसकी आवाज नक्कारखानों में दब जा रही है। गांव वालों का कहना है, क्या उस नौजवान का गुनाह ये है कि वो अल्पसंख्यक है? उसका गुनाह ये है कि वो सभी धर्म के लोगों की छोटी-छोटी समस्याओं में शरीक होता है? अल्पसंख्यकों की हिमायती भाजपा सरकार में ये पुलिसिया अत्याचार राजधानी से हजार किलो मीटर दूर नहीं बल्कि मलिहाबाद से 12 किलो मीटर दूर के गांव तिरगवां में देखने को मिला।

नौ माह पुरानी बात है। इसी गांव के रहने वाले अकबर अली के बेटे इश्तियाक अली को किसी ने गोली मार दी। गोली उसके बांह से लगकर निकल गई। उन्होंने मलिहाबाद में जलालू, अयाज खां एवं मुनीश के नाम से 307 का मुकदमा दर्ज करा दिया। खास बात यह है कि जिस वक्त इश्तियाक अली को गोली मारी गई उस दौरान जलालू और अयाज खां गांव में ही हनीफ मुल्ला की मिट्टी में कब्रिस्तान में थे। जब दोनों कब्रिस्तान में मृतक की कब्र बना रहे थें तो वे घटना स्थल पर कैसे पहुंचे? गोली लगने की सूचना पर सभी गांव वाले सीधे कब्रिस्तान से मलिहाबाद थाने पहुंचे, इनमें जलालू और अयाज खां भी थें। लेकिन,वहां मालूम चला कि इश्तियाक अली के पिता अकबर अली ने तीन लोगों में जलालू और अयाज खां का भी नाम डाल दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ माह बाद पुलिस ने तीन अभियुक्तों में से अयाज खां का नाम हटा दिया।

अयाज खां का नाम क्यों हटा,जब वो अभियुक्त है? जलालू का नाम पुलिस ने क्यों नहीं हटाया,इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए द संडे व्यूज एवं इंडिया एक्सप्रेस न्यूज की टीम ने मलिहाबाद के उस गांव व घटना स्थल का दौरा किया तो जो खुलासा हुआ वो चौंकाने वाला है। माल पुलिस ने जलालू के परिजनों से 20 हजार रुपए बख्शने के नाम पर लिए। नाम हटाने के नाम पर मोटी रकम की मांग की जिसे उसके रिश्तेदारों ने नहीं किया इसलिए उसके घर पर आए दिन दबीश डाली जा रही है। वहीं, इस मामले का दूसरा अभियुक्त अयाज खां (जो वर्तमान में प्रधान है) इंस्पेक्टर,माल का मुंह नोटों की गड्डियों से पूरी तरह से बंद कर दिया है। गांव वालों की बात करें तो सभी की जुबां से एक ही बात निकल कर आई कि जलालू बेगुनाह है…। अब इसे क्या कहा जाए, जिसे गोली लगी वो इंसान जिंदा है लेकिन उसने तीन लोगों पर धारा 307 का मुकदमा दर्ज करा दिया। यानि, एक ऐसा जानलेवा हमला जो हुआ ही नहीं…

21 अगस्त 2017 की सुबह लगभग आठ बजे तिरगवां गांव,थाना मलिहाबाद के रहने वाले इश्तियाक अली पुत्र अकबर अली को दौलतपुर-रहीमाबाद मार्ग पर गोली मार दी गई। इतना सुनते ही गांव वाले घटना स्थल पर पहुंचे, इश्तियाक सड़क पर गिरा पड़ा था। उसके हाथ-पैर से खून बह रहा था। मलिहाबाद थाने में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक जब उसके पिता ने इश्तियाक से पूछा कि क्या हुआ है तो उसने बताया कि तिरगवां गांव के रहने वाले अयाज खां पुत्र वाशिद खां व जलालू पुत्र कमरूद्दीन एवं भवाखेड़ा निवासी मुनीश ने मुझे जान से मारने की नियत से गोली मारी। इतना कहकर वो बेहोश हो गया। इस बयान के आधार पर पुलिस ने अयाज खां,जलालू एवं मुनीश के खिलाफ धारा 307 का मुकदमा दर्जकर लिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इश्तियाक ने जो नाम बताए उनमें से दो युवक जलालू पुत्र कमरूद्दीन एवं अयाज खां पुत्र वाशिद खां घटना के वक्त कब्रिस्तान में गांव वालों के साथ मौजूद थें। उस दिन गांव के ही हनीफ मुल्ला पुत्र इंसान अली की मृत्यु हो गई थी। गांव वालों के साथ जलालू व अयाज खां कब्रिस्तान में मौजूद थे और जलालू कब्र की खुदाई कर रहा था।

द संडे व्यूज एवं इंडिया एक्सप्रेस न्यूज की टीम ने गांव जाकर सच्चाई से रूबरू होने की कोशिश की। पता चला कि घटना स्थल जहां इश्तियाक को गोली मारी गई वहां से कब्रिस्तान की दूरी लगभग पांच किलो मीटर है। क्या ये संभव है कि एक व्यक्ति घटना को अंजाम देने के बाद चंद मिनट में कब्रिस्तान पहुंच जाए? जब गांव वाले चीख-चीख कर बता रहे हैं कि जलालू घटना के वक्त कब्रिस्तान में उनलोगों के साथ मौजूद था और वो बेगुनाह है। दूसरी बात,जब इस प्रकरण में अयाज खां पुत्र वाशिद खां भी अभियुक्त है तो वो अपने घर पर आराम से कैसे रह रहा है? गांव में इस बात की चर्चा है कि अयाज ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर इस मामले से अपना नाम हटवा लिया है। इसके एवज में उसने मोटी रकम भी थाने में चढ़ाई है। चलिए थोड़ी देर के लिए गांव वालों की बातों को नजर अंदाज कर रहे हैं। जब अयाज अभियुक्त है तो वो फरारी काटने के बजाए बेखौफ होकर घर में आराम फरमा रहा है,उसे पुलिस क्यों नहीं गिरफ्तार करती। दूसरी तरफ, जलालू यदि अपने आवास पर आ जाए तो चंद मिनट में पुलिस छापेमारी करने पहुुंच जाती है…। क्या अयाज खाकी को सत्ता की हनक दिखाकर बच रहा है ?

 

तफ्तीश में यह भी पता लगा कि इस प्रकरण में तीसरे अभियुक्त भवाखेड़ा निवासी मुनीश कांट्रेक्ट किलर है। वो ठेके पर हत्या करने का काम करता है। गांव वालों ने बताया कि मुनीश ने भी इश्तियाक को बताया कि गोली उसी ने मारी है। फिर इश्तियाक के पिता ने जलालू और अयाज खां का नाम एफआईआर में क्यों डाला? तफ्तीश में पता लगा कि इश्तियाक,जलालू एवं अयाज तीनों ग्राम प्रधानी का चुनाव लड़ रहे थें। उस दौरान जलालू ने अयाज का समर्थन कर दिया और वो चुनाव जीत भी गया। यही वजह है कि जिस दिन इश्तियाक को गोली मारी गई उस दिन और उस समय दोनों कब्रिस्तान में थें लेकिन साजिशन इश्तियाक और उसके परिजनों ने दोनों को फंसाकर अपना बदला ले लिया।

 

इस प्रकरण में जब तिरगंवा गांव के लोगों से बात हुई तो सभी का यही कहना है कि एक बेगुनाह को साजिशन फंसाया गया है। जलालू वो शख्स है जो गांव में सभी संप्रदाय के लोगों की दिक्कतों में खड़ा होने वाला इंसान है। गांव के एक दर्जन लोगों ने लिखित रुप से डीजीपी, एसएसपी, डीएम, एसपी, ग्रामीण को शपथ पत्र भी दिया है। जिनमें से प्रमुख रूप से आजाद पुत्र इरफान अली,निवासी तिरगवां,दौलतपुर,उस्मान पुत्र सुल्तान निवासी तिरगंवा,दौलतपुर,राम प्रसाद पुत्र तेजा निवासी तिरगंवा,दौलतपुर, शहाबुद्दीन पुत्र अबरार अली निवासी तिरगंवा,दौलतपुर, कमरूद्दीन पुत्र स्व: नसरूद्दीन, निवासी तिरगंवा,दौलतपुर, हरिराम पुत्र उद्धव निवासी तिरगंवा, दौलतपुर, शदाब पुत्र मंसूर अली निवासी तिरगंवा, दौलतपुर, नियाजुद्दीन पुत्र निजामुद्दीन निवासी तिरगंवा,दौलतपुर ने लिखित रूप से अधिकारियों को शपथ पत्र भेजा है लेकिन कोई फायदा नहीं मिला।

 

सदरौना निवासी शकील जो अकबर अली के समधी हैं ने बताया कि जब अकबर अली से पूछा कि क्या आपको लगा कि जलालू इस केस में शामिल हैं तो उनका जवाब था कि नहीं वो शामिल नहीं है। मुझे मुनीश ने बताया कि अयाज का मेरे ऊपर बहुत बड़ा अहसान है। किसी केस में उन्होंने मुझे बचाया था इसीलिए अयाज के कहने पर उसने इश्तियाक को गोली मारी। इसके लिए अयाज ने मुझे 40 हजार रुपए दिए थे। मुनीश ने यह भी बताया कि जब उसने गांव वालों से पता किया कि इश्तियाक कैसा आदमी है,तो पता चला कि वो सीधा-साधा इंसान है। लेकिन मैंने उसे मारने का बयाना ले लिया था इसलिए उस पर हमला तो करना ही था।

इंसानियत के नाते मैंने उसका मर्डर नहीं किया लेकिन गोली उसके बांह पर मारी। शकील ने यह भी बताया कि माल थाने की पुलिस ने एक बार भी मुख्य अभियुक्त मुनीश को गिरफ्तार करने की कोशिश नहीं की। पुलिस सिर्फ जलालू के पीछे पड़ी है। पुलिस को तो गुनहगार और बेगुनाह से कोई वास्ता नहीं उसे सिर्फ नोटों की गड्डियों से वास्ता है। तभी तो जो अपराधी है वो बेखौफ होकर अपने घरों में आराम कर रहा है और जो बेगुनाह है वो इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है।गांव वालों ने तो यहां तक कहा कि भाजपा सरकार का पुलिस अफसरों पर रत्तीभर नियंत्रयण नहीं रहा। ये सरकार अल्पसंख्यकों को दुश्मन की तरह आंक रही है,जबकि सरकार बनाने में हमलोगों को भरपूर सहयोग रहा। तभी तो मोहनलालगंज के सांसद कौशल किशोर ने 27 अगस्त 2017 को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले की निष्पक्ष जांच मलिहाबाद थाने के बजाए किसी एजेंसी से कराए जाने की बात की, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ।

सवाल यह है कि आखिर यूपी पुलिस कब अपनी इमेज को सुधारेगी। इसमें थाने स्तर के एसओ को उतना जिम्मेदार नहीं माना जाएगा क्योंकि उनके मुंह में तो पहले से ही खून लगा है। किसे जेल भेजना है और किसे बचाना है,ये लोग इस पचड़े में नहीं पड़ते,ये सीधे सौदेबाजी कर केस को निपटाने में सारा ध्यान देते हैं। खामियां तो एसएसपी,एसपी-ग्रामीण स्तर से हुई है। जब गांव वालों ने इन अफसरानों को लिखित रुप से अवगत कराया तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? सवाल यह है कि आखिर माल थाने की पुलिस मुख्य अभियुक्त मुनीश को क्यों नहीं गिरफ्तार कर रही है?

Post Author: thesundayviews

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