होमगार्ड मंत्री के नाम पर लखनऊ का कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय कर रहा लाखों की वसूली

मंत्रीजी को भी देनी पड़ती है 2 लाख रुपए, रूपए दोगे तभी मिलेगी ड्यूटी :कृपाशंकर पाण्डेय

: कमांडेंट ने बनाया ‘वसूली मैन गिरोह’, नहीं बदले गये पुराने लोगों का पटल

: आखिर कमांडेंट ने क्यों नहीं बदला पुराने वैतनिक एवं अवैतनिक ड्यूटी इंचार्जं को?

: छह माह के ड्यूटी की जांच करा ली जाये, बड़े पैमाने पर लगाये गये हैं फर्जी होमगार्ड

: गोमतीनगर के थानों,प्रतिष्ठनों में कागजों पर चल रहे फर्जी होमगार्ड

: मुख्यालय पर भी चल रहे हैं फर्जी होमगार्ड

संजय पुरबिया

लखनऊ।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास और कार्यालय पर तैनात होमगार्ड हों या फिर यातायात से लेकर थानों व सार्वजनिक प्रतिष्ठïान,सभी से ड्यूटी लगाने के नाम पर जबरदस्त वसूली की जा रही है। लखनऊ के कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय का जुमला है कि ‘मंत्री जी का पूरा खर्चा उठाना पड़ता है इसलिये ड्यूटी लगाने के एवज में तय कमीशन दो वर्ना नहीं मिलेगी ड्यूटी…।’ यही डॉयलाग कहकर कमांडेंट के ‘वसूली मैन’ जवानों पर दबाव बना रहे हैं। होमगार्ड मंत्री को इस बात की भनक भी नहीं कि उनके नाम पर कमांडेंट ने आतंक मचा रखा है। उन्होंने सभी जगह पुराने ड्यूटी इंचार्ज को लगा रखा है जिनके माध्यम से माह जनवरी से अब तक 15 से 20 लाख रुपए प्रतिमाह की वसूली की जा रही है। खास बात यह है कि थानों से लेकर कलेक्ट्रेट,सचिवालय एवं अन्य प्रतिष्ठïानों पर बड़े पैमाने पर फर्जी होमगार्ड तैनात किये जा रहे हैं और सरकार से उनके नाम पर हर माह लाखों रुपए का भुगतान हो रहा है। पूरी रकम पाण्डेय जी की जेब में समा रहा है। ड्यूटी के दबाव और वसूली से जवानों में आक्रोश है।

सवाल यह है कि आखिर कमांडेंट ने पुराने वैतनिक व अवैतनिक ड्यूटी इंचार्जों को क्यों नहीं हटाया ? जबकि,शासन स्तर पर बार-बार निर्देश दिया जा रहा है कि पुराने ड्यूटी इंचार्ज की जगह नये ईमानदार छवि के वैतनिक व अवैतनिक कर्मचारियों को इंचार्ज बनाया जाये। मेरा सवाल डीजी साहेब से है कि छह माह में कितने होमगार्ड कहां तैनात किये गये हैं उनकी शिनाख्त कभी की गई ? थानों से लेकर सभी जगह होमगाडों की संख्या सही तरह से लग रही है या नहीं ,इसकी जांच आपने कराई ?

मतलब साफ है, योगीराज में आदर्श की बातें तो बढ़-चढ़ कर की जा रही है लेकिन घूसखोरी और भ्रष्टïाचार के मामले में कृपाशंकर पाण्डेय ने पिछली सरकारों में तैनात कमांडेंटों को मात दे दिया। जवानों की बात पर विचार किया जाए तो दम नजर आता है,एक अदने से कमांडेंट और उसकी टीम की इतनी तो हैसियत नहीं होगी कि वो ये कहे कि मंत्री को इतनी रकम देनी है…

होमगार्ड विभाग के जवान ‘निरीहÓ हैं लेकिन कमांडेंट ‘करोड़पति’। ‘करोड़पति’ शब्द इसलिये इस्तेमाल कर रहे हैं कि मेरी हैसियत इससे ज्यादा अधिक लिखने की नहीं है। सही मायने में इनकी चल-अचल सम्पत्ति की जांच करा ली जाये तो ये लोग एक नहीं कई करोड़ के मालिक निकलेंगे। लखनऊ की बात करते हैं। यहां पर कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय हैं जो वाराणसी से यहां की व्यवस्था संवारने के लिये लाये गये हैं। शहर और शासन-प्रशासन की व्यवस्था सुधारने के बजाये उन्होंने अपनी व्यवस्था इतनी चौकस कर ली है कि आपलोग जानेंगे तो ‘कन्फ्यूजिया’ जायेंगे। कमांडेंट पाण्डेय जी ने एडीजी के हटने के बाद से अपने गुर्गो को एक नया डॅायलाग रटा दिया है। ‘मंत्री जी का लखनऊ से लेकर वाराणसी तक का पूरा खर्चा उठाना पड़ता है इसलिये तय रकम दो वर्ना नहीं मिलेगी नौकरी…।’मंत्री जी को भनक भी नहीं लगी और पाण्डेेय जी ने उनके नाम को कै श कर माह (जनवरी) से 15 से 20 लाख रुपए की वसूली कर रहे हैं।

इस खेल में कमांडेंट पर पूरी तरह से वरदहस्त मुख्यालय के उन भ्रष्टï अधिकारियों का है जिन्हें सभी को मैनेज करना पड़ रहा है। उनका एक ही जुमला है ‘लूट सको तो लूट लो,कार्रवाई की जुर्रत करने वाला कोई नहीं…।’राजधानी होने की वजह से यहां के थानों ,यातायात व्यवस्था, सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को संवारना पुलिस प्रशासन के लिये हमेशा से चुनौती रहा है। यही वजह है कि पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले होमगार्डों की मांग बढ़ती चली गयी। होमगार्डों ने हर समय अपने कार्यशैली से खाकी वालों को दातों तले ऊंगलियां दबाने पर मजबूर किया है। लेकिन इन्हें ड्यूटी देने के नाम पर जिस तरह से विभागीय अधिकारी शोषण करते हैं वो बेहद शर्मनाक है।

लखनऊ के कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय ने होमगार्डों का शोषण करना शुरू कर दिया है। शहर के थानों, सार्वजनिक प्रतिष्ठïान, सचिवालय, बापू भवन, मंडी परिषद सहित कई अन्य स्थानों पर तैनात होमगार्डों से बात की गयी तो एक ही बात समझ में आयी कि पाण्डेय जी मानों लखनऊ आकर बदहवास हो गये हैं। ना सीएम का ‘भय’ ना मंत्री का ‘खौफ’। पूरी तरह से बैखौफ होकर जवानों से ड्यूटी देने के नाम पर वसूली कर रहे हैं। जवानों ने बताया कि पिछली सरकारों के समय से बीओ राजकुमार वर्मा,इंस्पेक्टर उदय बहादुर,बीओ ओ पी सिंह,राजेश सिंह, कंपनी कमांडर कुलदीप शुक्ला, इंस्पेक्टर शेर प्रताप सिंह, हवलदार रंजीत यादव,सुरेश सिंह सहित अवैतनिक कंपनी कमांडर अरूण रावत, सुशील सिंह, सचिवालय देख रहे कंपनी कमंाडर जगदीश प्रसाद सालों से तैनात हैं।

शासन ने हाल ही में आदेश जारी किया था कि सभी कर्मचारियों का पटल बदल दिया जाये लेकिन कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय ने आज तक आदेश का पालन नहीं किया। इसी तरह डीजी,होमगार्ड डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने भी कमांडेंट को लिखित निर्देश दिया कि विभाग के ईमानदार वैतनिक व अवैतनिक कर्मचारियों को इनकी जगह पर तैनात किया जाये लेकिन ऐसा लगता है मानों पाण्डेय जी ने इनलोगों का ताख पर रख दिया है। बताया जाता है कि मुख्यालय पर तैनात तथाकथित अधिकारियों की शह पर कमांडेंट ‘चौडिय़ाए’ हैं।

जवानों ने बताया कि बीओ- राजकुमार शुक्ला मंडी परिषद, थाना गोमतीनगर, विभूतिखंड सहित अन्य थानों का इंचार्ज है। इसी तरह, इंस्पेक्टर-उदय बहादुर को यातायात पर जवानों को तैनात करने की जिम्मेदारी है। इंस्पेक्टर- शेर प्रताप सिंह को पीजीआई सहित कई कई थाने, इंस्पेक्टर दीपक सिन्हा प्लाटून कमंाडर एवं बृजपाल को कलेक्ट्रेट, अरूण रावत कंपनी कमांडर को एमसीआर , अवैतनिक कंपनी कमांडर- गुरदीप शुक्ला यातायात, सचिवालय में बीओ- ओ पी सिंह, कंपनी कमांडर – जगदीश दोनों मिलकर सचिवालय देख रहे हैं। बीओ- मुन्नालाल माल थाना के प्रभारी हैं। सार्वजनिक प्रतिष्ठïानों एवं अन्य थानों में भी होमगार्डो ंकी ड्यूटी लगायी जा रही है।

बताया जाता है कि एमसीआर से प्रतिमाह 2 लाख रुपए, कलेक्ट्रेट से 1.50 लाख रुपए, थानों से लगभग 6-7 लाख रुपए एवं अन्य जगहों से मिलाकर जवानों को ड्यूटी देने के नाम पर प्रतिमाह लगभग 15 से 20 लाख रुपए की वसूली की जा रही है। बताया जाता है कि जिसमें से मंत्री अनिल राजभर को 2 लाख रुपए,डीजी को बेगारी करने के नाम पर 60-70 हजार रुपए, डीआईजी एस के सिंह को 50 हजार रुपए, एसएसओ सुनील कुमार को 25 हजार, सीटीआई,कमंाडेंट संजीव शुक्ला 15 हजार रुपए प्रतिमाह जाता है। कनिष्टï स्टॅाफ अधिकारी अपने स्तर से हर माह 6 होमगार्ड मुख्यालय के नाम पर फर्जी चला रहे हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि मंत्री के नाम पर वसूली करने की जुर्रत कमांडेंट कृपाशंकर ने कैसे की,ये बड़ी बात है। डीजी साहेब, आपकी पारखी नजरों में यदि कोई ईमानदार अधिकारी हो तो जांच करा लेें,इस भ्रष्टïाचार में दूध का दूध और पानी का पानी साफ हो जायेगा। ड्यूटी लगाने में यदि परिवर्तन करना हो तो सभी का करें या फिर ना करें। मैं तो यही कहूंगा कि होमगार्डो के वेतन का भुगतान सरकारी खजाने से होता है। फर्जी ड्यूटी लगाकर कमांडेंट ने जो लूट मचा रखी है, एक तरह से वे सरकार यानि योगी जी को गुमराह करने का काम कर रहे हैं।

 

Post Author: thesundayviews

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