विष्णु ने दी शासन को खुली चुनौती:  हर हाल में लूंगा बाराबंकी का चार्ज

कमीशनर धीरज साहू की कार्रवाई संदेह के घेरे में !

लखनऊ के डीईओ सस्पेंड, भ्रष्ट इंस्पेक्टर विष्णु प्रताप सिंह को क्यों नहीं किया सस्पेंड!

विष्णु ने दी शासन को खुली चुनौती:  हर हाल में लूंगा बाराबंकी का चार्ज

आबकारी अफसरों के लिये स्वप्न सरीखे है हुक्का बार

नौजवानों को नशे में ढकेलने वाले अफसर यही से हो रहे मालामाल

युवा पीढ़ी बने नशेड़ी,तभी हम होंगे कामयाब

फर्जी एफ एल-11 देकर डिप्टी एक्साइज कमीशनर कर रहे हैं लाखों का वारा-न्यारा

वसूली गैंग के मुखिया डिप्टी एक्साइज कमीशनर ज्ञानेन्द्र उपाध्याय पर क्यों मेहरबान हैं सरकार?

भ्रष्टचार,तैनाती स्थल से गायब रहने वाले किसी कांस्टेबिल को नहीं बख्शेंगे:अर्चना पाण्डेय

अरूण शर्मा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी में सरकार और नौकरशाहों के बीच अफसरान बेखौफ होकर सरकारी सोच की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सीएम क्या चाहते हैं, इससे अफसरों को कोई वास्ता नहीं,उन्हें तो बस अपनी ख्वाहिशों को पूरा करना है। आबकारी विभाग में हुक्का बार,अवैध तरीके से विदेशी मदिरा की तस्करी पर कमीशनर धीरज साहू ने लखनऊ के डीईओ को सस्पेंड कर दिया लेकिन इंदिरा नगर,गोमतीनगर इलाके के इंस्पेक्टर को बख्श दिया? विभाग में चर्चा जोरों पर है कि इंस्पेक्टर विष्णु प्रताप सिंह पर कमीशन मेहरबान हैं? सवाल यह है कि आखिर एक इंस्पेक्टर की इस विभाग में इतनी हैसियत हो गई कि अपने सर्किल में रेस्टोरेंट बार से लेकर सारे अवैध काम उसने कराए,उसे सस्पेंड करने के बजाए तबादले का वरदान दे दिया गया? वाह रे,कमीशनर साहेब,इस एक फैसले ने आपके सभी फैसलों पर सवाल खड़ा कर दिया है…। यही वजह है कि इंस्पेक्टर विष्णु प्रताप सिंह खुलेआम कह रहा है कि बाराबंकी का चार्ज मुझे चाहिए, शासन अपनी कीमत बोले…।


आबकारी विभाग के अफसरों के संपत्तियों की यदि गल्ती से शासन जांच करा ले तो उन्हें ये अहसास हो जाएगा कि आर्थिक रूप से उनकी क्या हैसियत है और इंस्पेक्ट की। एक इंस्पेक्टर 10 नौकरशाह के संपत्तियों पर भारी पड़ेगा। आखिर हो भी क्यों ना,शासन उन्हें राजस्व बढ़ाने के बजाए अपनी कमाई कराने एवं करने की सलाह देते हैं जिस पर वे परफेक्ट उतरते हैं। यही वजह है कि आबकारी विभाग के इंस्पेक्टर बिना किसी डर के नियम के विपरित बार एण्ड रेस्टोरेंट चलवाते हैं,शराब की तस्करी की राह बनाते हैं और ऐसे काम करते हैं जिसे उन्हें लाभ मिले ना किस सरकार को।

लखनऊ में फर्जी लाइसेंस देने एवं हुक्का बार की आड़ में शराब परोसने के मामले को गंभीरता से लेते हुए आबकारी आयुक्त धीरज साहू ने एक सप्ताह पूर्व पूर्व लखनऊ के डीईओ संतोष तिवारी को निलंबित एवं सेक्टर 6 के इंस्पेक्टर विष्णु प्रताप सिंह का तबादला कर दिया गया। जब डीईओ को निलंबित किया गया है तो इंस्पेक्टर को क्यों बख्श दिया गया? इंस्पेक्टर विष्णु प्रताप सिंह लगभग दो वर्ष से इस सेक्टर में तैनात रहा। इस दौरान उन्होंने लगभग एक करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई बार में अवैध तरीके से शराब पिलाने एवं हुक्का बार की आड़ में फर्जी लाइसेंस देकर शराब पीलाने का काम कराया। बताया जाता है कि डीईओ एवं सभी सेक्टर के इंस्पेक्टर वसूली का काम डिप्टी एक्साइज कमीशनर ज्ञानेन्द्र उपाध्याय के इशारे पर कर रहे हैं।

 

अफसरों ने बताया कि जब वसूली के बिग बॉस ज्ञानेन्द्र उपाध्याय हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गयी? अफसरों ने बताया कि यदि सच्चाई जाननी है तो डीईओ के साथ चलने वाले हेड कांस्टेबिल परशुराम तिवारी एवं डिप्टी एक्साइज कमीशनर के साथ चलने वाले कांस्टेबिल चंद्रमा पाण्डेय के मोबाइल नंबर की जांच करा ली जाये। दोनों के नंबर में हर महीने वाले बड़े स्तर की अवैध वसूली का राज छिपा है। किससे कितना पैसा लेना है और किसे किस तरह से मैनेज करना है,सारी बातें खुलकर सामने आ जायेंगी। बताया जाता है कि हेड कांस्टेबिल परशुराम तिवारी की तैनाती मुख्यालय इलाहाबाद में है लेकिन लगभग 16 वर्ष से लखनऊ में ही डीईओ के साथ लगा हुआ है। सरकारें बदलती रहे,डीईओ बदलते रहें लेकिन इसकी ड्यूटी यही पर रहती है। ये सभी डीईओ के लिये वसूली का काम करता चला आ रहा है।

 

विभाग के डिप्टी एक्साइज कमीशनर ज्ञानेन्द्र उपाध्याय के इशारे पर डीईओ रेस्टोरेंट में हुक्का बार चलाने की आड़ में प्रतिमाह करोड़ों रुपए का वारा-न्यारा कर रहे हैं। इस काम को अंजाम जिला आबकारी अधिकारी और सभी सेक्टर के इंस्पेक्टर मिलकर कर रहे हैं। रेस्टोरेंट में हुक्का बार चलाने के लिये आबकारी विभाग से एफ एल-11 का लाइसेंंस मिलता है। आबकारी विभाग के अफसरों ने सरकार को धोखा देने और अपनी कमाई के लिये नया रास्ता अख्तियार कर रखा है। रेस्टोरेंट में होने वाले पार्टी एवं हुक्का बार की आड़ में रेस्टोरेंट मालिक दो दिन का लाइसेंस लेकर एक हफ्ते तक युवाओं को विदेशी महंगी शराब परोस रहे हैं। रेस्टोरेंट मालिक महीने में आठ दिनों का लाइसेंस लेकर 30 दिनों तक अवैध तरीके से विदेशी शराब बेच कर लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं। इसके एवज में डीईओ एवं इंस्पेक्टर के माध्यम से डिप्टी एक्साइज कमीशनर की जेब में सभी रेस्टोरेंट से 50- 50 हजार रुपए महीना पहुंच रहा है।

लखनऊ में इस समय 39 बार रेस्टोरेंट चल रहे हैं। नियम की बात करें तो रेस्टोरेंट में चलने वाली पार्टी में मदिरा पिलाने के लिये लाइसेंस लेने पर प्रतिदिन का 10 हजार रुपए शुल्क अदा करना पड़ता है। रात्रि आठ बजे से रात्रि 11 बजे तक ही शराब पिला सकते हैं, जो रेस्टोरेंट वालों को काफी महंगे का सौदा साबित हो रहा है। आबकारी अफसरों के इस कारस्तानी से सरकार को महीने में करोड़ों रुपए की चोट लग रही है। इसी काम से आबकारी इंस्पेक्टर करोड़पति बन गये हैं।
लखनऊ में तैनात डिप्टी एक्साइज कमीशनर ज्ञानेन्द्र उपाध्याय ने जिला आबकारी अधिकारी संतोष तिवारी सहित सभी सेक्टर के इंस्पेक्टर को एक मंत्र सीखाया है। हुक्का बार का दो दिन का लाइसेंस दो और बाकी पांच दिन अवैध तरीके से इसके आड़ में शराब पिलाने का धंधा कराओ। इस तरह महीने में आठ दिन का लाइसेंस कागजों पर दिखाकर शासन को गुमराह भी कर देंगे और सभी के जेब में लाखों रुपए भी आ जायेंगे। वाकई ये फार्मूला हिट हो गया, शहर के 39 बार रेस्टारेंट से 1 लाख 95 हजार रुपए की अवैध वसूली आने लगी।

लेकिन,एक चूक ने श्री उपाध्याय जी और इंस्पेक्टर के मंसूबों पर पानी फेर दिया। प्रमुख सचिव,आबकारी धीरज साहू के पास एक शिकायत आयी कि गोमतीनगर के गो डैडी बार एवं रेस्टारेंट में हुक्का बार की आड़ में अवैध तरीके से विदेशी शराब पीलायी जा रही है। श्री साहू ने जांच अपने स्तर से जांच कराया तो मालूम चला कि गो डैडी बार में भी दो दिन लाइसेंस लेकर सप्ताह भर अवैध तरीके से सुबह से लेकर देर रात तक शराब पीलायी जा रही है। उसके बाद उन्होंने सेक्टर 6 के इंस्पेक्टर विष्णु प्रताप सिंह को घर पर बिठा दिया था। सवाल यह है कि आखिर ईमानदार माने जाने वाले कमीशनर धीरज साहू पर इंस्पेक्टर विष्णु प्रताप सिंह पर इतने मेहरबान क्यों हैं? क्या उन्हें उसके भ्रष्टïाचार की सच्चाई मालूम नहीं या फिर वे सत्ता के दबाव में उसे बख्श रहे हैं…

Post Author: Sanjay Srivastava

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