अपर पुलिस महानिदेशक ने डीजी को लिखा पत्र, एक माह बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

अपर पुलिस महानिदेशक ने डीजी को लिखा पत्र, एक माह बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

मुकेश बाजपेई
लखनऊ।

उत्तर प्रदेश में योगी राज में उनके ही सरकार के मंत्री ऐसे अफसरों को संरक्षण दे रहे हैं जो ए के 47 रखने के आरोप में जेल जा चुके हैं और जिन पर रेप जैसी जघन्य आरोप तक लगे हैं। ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति वाले अफसर के खिलाफ इसलिए कार्रवाई नहीं की जा रही क्योंकि वो मंत्रीजी के करीबी का साला है! यही हाल रहा तो राजराज्य लाने का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्वप्न कोई और नहीं उनके मंत्री ही ध्वस्त कर देंगे। जब मंत्री ही इस तरह का काम करेंगे तो जनता को आगामी चुनाव में सरकार क्या मुंह दिखाएगी। होमगार्ड मंत्री अनिल राजभर एक ऐसे अफसर को बचाने में जुटे हैं जो ए के 47 रखने के आरोप में जेल की हवा खा चुका है और उस पर ड्यूटी के दौरान एक महिला होमगार्ड से रेप करने का आरोप लग चुका है। बताया जाता है कि आपराधिक प्रवृत्ति वाले अफसर का जीजा पूर्वांचल का भाजपाई नेता है।

अफसर के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई ना होने की वजह से ही उसका मनोबल इतना बढ़ गया है कि अब उसने मुरादाबाद मेें पुलिस विभाग के सरकारी आवास पर अवैध तरीके से कब्जा कर लिया है। उसके इस हरकत से पुलिस विभाग के बड़े अधिकारी सकते में हैं। कब्जा करने वाले अफसर के खिलाफ अपर पुलिस महानिदेशक,पुलिस अकादमी,मुरादाबाद ने डीजी, होमगार्ड को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई करने की मांग की लेकिन एक माह होने वाला है अभी तक कोई कार्रवाई नही की गई।  भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि अनिल राजभर के करीबी भाजपाई नेता भारत सिंह का साला अरूण कुमार सिंह जो वर्तमान समय मुरादाबाद के मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र में तैनात है। उसने पुलिस अकादमी,मुरादाबाद में राजकीय आवास में अनधिकृत रूप से ताला डालकर कब्जा कर लिया है।

इस पर 14 अप्रैल को पुलिस अकादमी,मुरादाबाद के अपर पुलिस महानिदेशक एस के गुप्ता ने डीजी,होमगार्ड को एक गोपनीय पत्र भेजा है। पत्र में लिखा है कि पुलिस अकादमी,मुरादाबाद में राजकीय आवास संख्या 4-25 में मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र ,मुरादाबाद में तैनात आपके कमांडेंट अरूण कुमार सिंह ने अनाधिकृत रूप से ताला डालकर कब्जा कर लिया है। पूर्व में यह आवास तत्कालीन जिला कमांडेंट,मुरादाबाद घनश्याम चतुर्वेदी,वर्तमान मंडलीय कमांडेंट,अलीगढ़ को आवंटित था।

श्री चतुर्वेदी के मंडलीय कमांडेंट,अलीगढ़ के पद पर तैनात होने के बाद उक्त आवास नियमानुसार अरूण कुमार सिंह को आवंटित नहीं किया गया। इस तरह से अनाधिकृत रूप से उक्त आवास पर ताला डाला गया है जो वर्दीधारी संगठन में निहित अनुशासनहीनता का घोतक है। इस पत्र के जवाब में स्टॉफ आफिसर टु कमांडेंट जनरल रामलाल वर्मा ने 16 अप्रैल को अरूण कुमार सिंह को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि इस मसले पर अपना स्पटीकरण तीन दिन के अंदर दें। आपके द्वारा अनाधिकृत रूप से राजकीय सम्पत्ति पर कब्जा करने के संबंध में क्यों न आपके खिलाफ प्राविधानों के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कराया जाये। वर्मा जी ने तीन दिन के अंदर जवाब देने की बात कही लेकिन कमांडेंट ने जवाब ना देकर यह साबित कर दिया कि डीजी और सरकार का फरमान उसके लिये कोई मायने नहीं रखता।

क्योंकि,भईया आखिर उसके जीजा जी मंत्री जी के लटक जो हैं… वर्ष 1996-97 में जब अरूण कुमार सिंह वाराणसी में तैनात थें,उस दौरान ये मुख्तार अंसारी के करीबी थें। पुलिस ने अरूण को एके 47 के साथ गिरफ्तार किया था। ये सात-आठ माह जेल की सलाखों के पीछे थें। विभाग ने इन्हें सस्पेंड कर दिया था। केश चला लक्ष्मी की माया के दम पर ये किसी तरह बहाल हुये। उसके बाद वर्ष 2013-14 में अरूण मऊ जिले में कमांडेंट के पद पर तैनात हुये। यहां पर उन्होंने एक महिला होमगार्ड के साथ जबरदस्ती की। मामला खूब उछला।

Post Author: Sanjay Srivastava

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *