क्या यूपी में महिलाएं सुरक्षित हैं!

दिव्या श्रीवास्तव
लखनऊ।

उत्तर प्रदेश में अपराधियों के बढ़ते हौसले से आवाम भयाक्रांत है। भाजपा की सरकार बनने के बाद जिस तरह से बेटियों की अस्मत लूटी जा रही है, महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार की घटनाएं एवं हत्या की वारदात हो रही हैं, उसे देखकर यही कह सकते हैं कि महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा की बातें इस सरकार में बेमानी है। जिस तरह से साइकिल सपा को रौंदकर भाजपा ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनायी, उस वक्त ऐसा लगा कि अब यूपी में रामराज्य दिखेगा,बेटियां बेखौफ होकर आ- जा सकेंगी लेकिन, इस योगी राज में ठीक इसका उलट हो रहा है। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, लड़कियों से छेडख़ानी,हत्या की घटनाएं बढ़ी है। सबसे चौंकाने वाली बात ये देखने को मिल रही है कि पिछले कुछ माह से सामूहिक बलात्कार की घटनाओं ने एक नया रूप ले लिया है। हालात यह है कि अब घर से निकलते समय बेटियां भी सशंकित रहती हैं। ना जाने किस मोड़ पर उन पर फब्तियां कसी जाए या फिर उनकी अस्मत…। घर के बड़े बुजुर्गों के दिल को तभी राहत मिलती है जब उनकी बेटियां सुरक्षित घर वापस लौट आती हैं। सरकार ने बच्चीयों की सुरक्षा के लिये ऐंटी रोमियो टीम बनाकर खूब वाहवाही लूटी लेकिन आज ये टीम कहां है मालूम नहीं। कहीं खाकी वाले बेटियों की असम्त लूट रहे हैं तो कहीं,लग्जरी गाडिय़ों में काले शीशे चढ़ाकर मनचले सरेआम राह चलती बेटियों को उठाकर सामूहिक बलात्कार जैसी जघन्य घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। सरकारी दावें भले ही की जाये कि यूपी में महिलाएं महफूज हैं लेकिन हकीकत में यूपी में हम सब कितने सुरक्षित हैं,इसका सही जवाब आपलोग ही दे सकती हैं…

उत्तर प्रदेश में आए दिन महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार,हत्या,अपहरण जैसी संगीन वारदात से लोगों का विश्वास योगी सरकार से उठ चुका है। घर निकल कर चौराहे तक जाना बेटियों के लिये दुश्वार हो गया है। मनचलों से लेकर फब्तियां कसने वालों में पुलिस का रत्ती भर खौफ नहीं रहा। अधिकांश मामलों में लोक-लज्जा के भय से परिजन थाने तक नहीं पहुंचते जिसकी वजह से घटनाओं को करने वालों का मनोबल बढ़ जाता है। आवाम उस दिन को याद कर अपने को कोसती है,जब समाजवादी पार्टी की सरकार में अपराधों के बढ़ते ग्राफ के बाद विकल्प के तौर पर भाजपा सरकार को चुनी। वैसे भी यूपी में जब किसी सरकार में अपराधी बेलगाम हो जाते हैं तो विपक्ष इसी को मुद्दा बनाकर भोली-भोली जनता को अपनापन का लालीपॉप थमाते हैं। जब उनकी सरकार बन जाती है तो फिर वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति देखने को मिलती है। कहने का मतलब, हर तरफ से जनता अपने को ठगा महसूस करती है। थोड़ा फ्लैशबैक में चलते हैं। जब यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और भाजपा विपक्ष की भूमिका में थी। यूपी में हत्या या रेप का कोई मामला होता था यही भाजपाई प्रदेश को हिलाकर रख देते थेें। अब उनकी सरकार है और कोई दिन ऐसा नहीं जाता जब महिला उत्पीडऩ,बलात्कार,सामूहिक बलात्कार जैसी घटनाएं ना हो रही हो। अब ये लोग खामोश क्यों हैं? क्या इनकी सरकार है इसलिये खिलाफत बोलना गुनाह समझते हैं?

खैर, महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार के बाद एक बार फिर से लोग उस बसपा सरकार को याद करने लगे हैं जब मायावती मुख्यमंत्री थीं। हालांकि, विधान सभा चुनाव के दौरान भाजपा ने अन्य मुद्दों में यूपी में बढ़ते अपराध को पूरी तरह से खात्मा करने का आवाम से वायदा किया था। पूर्व की सपा सरकार में बढ़ते अपराधीकरण से जनता बौरखला गई थी। उसे विकल्प के तौर पर भारतीय जनता पार्टी दिखी और सूबे में भाजपा की पूर्ण बहुमत से सरकार बनी। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर योगी आदित्यनाथ के बैठने से पहले ही सूबे में शासन-प्रशासन चुनावी मुद्दे को ध्यान में रखकर सख्ती का चादर ओढक़र काम करने लगे थे। नयी सरकार के गठन के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर पहल की वह अपने आप में बेमिसाल है। अभी सरकार बन ही रही थी, उसी समय प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक अलग प्रकार की तेजी दिखने लगी थी। पुलिस तभी बहुत एलर्ट हो चुकी थी और पूरे प्रदेश में लड़कियों से छेडख़ानी की घटनाओं पर अचानक अंकुश लग गया था। इसके बाद जब सरकार अस्तित्व में आ गयी और शपथ ग्रहण के बाद मंत्रिमंड बन गयी तब सभी की नजऱ इस खास एजेंडे की तरफ ही लगी हुई थी। सरकार बनने के बाद भाजपा के लिए इस मुद्दे को गंभीरता से लेना ही था और योगी जी ने लिया भी। बेटियों को लेकर योगी आदित्यनाथ की पहल ने निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश की महिलाओं की सुरक्षा और उनकी प्रगति के लिए बहुत बड़ी उम्मीद जगा दी। हालांकि, प्रदेश में कई ऐसे मामले हैं जिनमें महिलाओं की सुरक्षा पर हमेशा सवाल खड़ा होता है। में बलात्कार, छेडख़ानी, घरेलू हिंसा के मामले तेजी से बढ़े हैं। भाजपा सरकार से महिलाओं को इसी बात की उम्मीद है कि ऐसी घटनाओं पर यह नई सरकार अंकुश लगा सकेगी। घरेलू हिंसा, एसिड अटैक, छेडख़ानी और बलात्कार से पीडि़त महिलाओं और मासूम बच्चियों को अपनी सुरक्षा की उम्मीद है।

इसी तरह, महिलाओं के सशक्तिकरण और उन्हें जागरूक करने के लिए जागृति ऐप लॉन्च किया गया। ऐप लॉन्च करते हुए महिला कल्याण विभाग की कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा था कि महिलाओं को सम्मान और उनके विकास के अवसर प्रदान करना यूपी सरकार का संकल्प है। इस दौरान महिला सशक्तिकरण पर एक सेमिनार का भी आयोजन किया गयाए जिसमें सरकार और विभाग के साथ ही कई गणमान्य लोगों ने अपने सुझाव दिए। लखनऊ में महिला कल्याण विभाग की तरफ से महिला सशक्तिकरण पर संवाद का आयोजन किया गया। प्रमुख सचिव महिला एवं बाल कल्याण विभाग रेणुका कुमार ने कहा कि इस आयोजन का मकसद प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला सशक्तिकरण मिशन को सफ ल बनाना हमारे विभाग का उद्देश्य है। अब रीता जी इस सवाल का जवाब दें कि हर दिन महिला उत्पीडऩ की घटनाओं से यूपी थर्रा रहा है,इस पर क्या कहेंगी? उनके पास कोई जवाब नहीं होगा,क्योंकि इस समय वे विपक्ष में नहीं सरकार की काबिना मंत्री हैं। सच बोलती हैं तो कुर्सी खतरे में पड़ जायेगी। यही सत्ता की भूख है कि अपनी सरकार में महिलाओं के साथ जघन्य अपराध होता देखकर भी माननीय खामोशी अख्तियार कर लेते हैं…में बलात्कार, छेडख़ान, घरेलू हिंसा के मामले तेजी से बढ़े हैं।

भाजपा सरकार से महिलाओं को इसी बात की उम्मीद है कि ऐसी घटनाओं पर यह नई सरकार अंकुश लगा सकेगी। घरेलू हिंसा, एसिड अटैक, छेडख़ानी और बलात्कार से पीडि़त महिलाओं और मासूम बच्चियों को अपनी सुरक्षा की उम्मीद है। देश भर में महिलाओं पर की गई शोध पर नजर डालें तो भारत में घरेलू हिंसा के मामले सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में हैं। वर्ष 2015-16 में अकेले उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामलों की संख्या 6,110 थी, जबकि दिल्ली में 1,179, हरियाणा में 504, राजस्थान में 447 और बिहार में 256 मामले दर्ज हैं।
हर महिला और लडक़ी आज के समय में अपने आप को सुरक्षित नहीं महसूस करती है। महिलाओं की सुरक्षा की बात चाहें घर के अंदर हो या बाहर, जिसे जब मौका मिलता है उसका शोषण करने लगता है। अगर ये सरकार सख्ती से अपराध करने वालों को सजा दिलाने मे सफ ल रही तो ये मामले कम हो सकते हैं, इस सरकार से सभी को बहुत उम्मीदें हैं।

एंटी रोमियो : अभियान पुरानी बोतल में नई शराब
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार पुरानी बोतल में पुरानी शराब परोसने में किसी से पीछे नहीं है। महिलाओं की सुरक्षा के लिये चुनावी वायदों में ऐंटी रोमियो स्क्वायड बनाने की बात कही गयी थी। इस पर अमल भी किया गया। पुलिस विभाग ने जोर-शोर से ऐंटी स्क्वायड टीम बनायी और योगी जी से फीता कटवाकर,कुछ दिनों तक शोहदों को दबोचा गया,अब मामला शांत है। कहां गई ऐंटी रोमियो स्क्वायड टीम खुद पुलिस मुख्यालय के अफसरों को भी मालूम नहीं होगा। पुलिस की इसी सोच की वजह से अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं। सवाल यह है कि आखिर मुख्यमंत्री कहां तक और किन-किन योजनाओं पर नजर रखेंगे। ये काम पुलिस के बड़े अफसरों का है कि वे जांच करते रहें कि सरकार ने महिलाओं के लिये जिन योजनाओं को शुरू किया, वो सुचारू रूप से चल रही है या नहीं?
यहां यह गौर करने वाली बात है कि ऐंटी रोमियो स्क्वायड टीम गठित करना कोई नई शुरुआत नहीं है। यह पुरानी योजना है जिसे नया नाम देकर शुरू किया गया है। मायावती के शासनकाल में ये अभियान शुरू किया गया था जिसे नोयडा में वर्ष 2011 में शुरू किया गया था। इस अभियान के तहत पुलिस उन जगहों पर जाती थी जहां महिलाओं के साथ छेडख़ानी की जाती थी। इस टीम का नेतृत्व महिला अधिकारी करती थी। इससे पहले भी वर्ष 1986-87 में भी पुलिस ने इस तरह का अभियान शुरू किया था,जिसमें लड़कियों के साथ छेडख़ानी करने वाले शोहदों को पिंजड़े में रखा जाता था और उन्हें पूरे शहर में घुमाया जाता था ताकि वे शर्मिंदा महसूस करें।एंटी रोमियो दल से पहले प्रदेश में पुलिस ने अलग ऑपरेशन शुरू किया था जिसके तहत महिलाओं के साथ छेडख़ानी और उनका पीछा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कानून व्यवस्था को बेहतर करना चाहते हैं और महिलाओं की पुख्ता सुरक्षा मुहैया कराना चाहते हैं, जिसके तहत प्रदेश के हर जिले के थाने में एंटी रोमियो दल का गठन किया गया।

अगर इस तरह का अभियान कभी भी गंभीरता से चलाया गया होता तो महिलाओं के खिलाफ अपराध बहुत कम हो गए होते। योगी राज में ऐंटी रोमियो टीम को बड़े पैमाने पर बनाया गया लेकिन पुलिस की शिथिलता की वजह से एक नई सोच,नया अंदाज दम तोड़ती नजर आ रही है। यदि पुलिस इस पर अमल करती तो आज अपराधों का ग्राफ काफी नीचे होता। हाल ये है कि यदि कोई महिला अपनी फरियाद लेकर थानों में जाती है तो खाकी वालों की निगाहें उसे घूरने लगती है। महिलाओं को सम्मान तो दूर थानों में ही उन्हें अपनी अस्मत खतरे में दिखने लगती है।

इसी तरह, महिलाओं के सशक्तिकरण और उन्हें जागरूक करने के लिए जागृति ऐप लॉन्च किया गया। ऐप लॉन्च करते हुए महिला कल्याण विभाग की कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि महिलाओं को सम्मान और उनके विकास के अवसर प्रदान करना यूपी सरकार का संकल्प है। रीता जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला सशक्तिकरण मिशन को सफ ल बनाना हमारे विभाग का उदद्ेश्य है। मेरा सवाल रीता जी है कि यूपी में महिला उत्पीडऩ का ग्राफ बढ़ता जा रहा है,इस पर उनका क्या कहना? जानती हूं कि वे निरूत्त होंगी या फिर रटा-रटाया जवाब होगा कि नहीं,महिला उत्पीडऩ की घटनाएं नही हो रही हैं। यदि हो भी रही है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। यही जोशी जी विपक्ष में होती तो एक छोटी सी घटना को राई का पहाड़ बनाकर पेश करती। खैर,इसे इनकी मजबूरी कही जाये या सत्ता की भूख,सभी माननीय जानते हैं कि सच बोलेंगे तो कुर्सी खिसक जायेगी…।

भाजपा सरकार बनने के बाद तो महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं अखबारों,चैनल पर हर दिन सुर्खियां बटोरती रहती हैं लेकिन कुछ चुनिंदा घटनाओं पर नजर डालते हैं,जो भाजपा सरकार में महिलाओं के शोषण,अत्याचार की कहानी खुद-ब-खुद बयां कर देंगी।
12 मई 2017- कानपुर जिले में रहने वाली एक किशोरी ने अपने कलयुगी जीजा पर बलात्कार कर जिंदगी बर्बाद करने का आरोप लगाया। नाबालिग का आरोप है कि जीजा ने उसे नशीली चाय पिलाकर अपने भाई के साथ मिलकर बारी-बारी से कई दिनों तक बंधक बनाकर सामूहिक बलात्कार किया। अब वह गर्भवती हो गई है और 10 सप्ताह का बच्चा लेकर न्याय के लिए गुहार लगा रही है।
15 मई 2017 – हरदोई जिले के कोतवाली बेनींगंज क्षेत्र के एक गांव में घर में मां के साथ सो रही एक किशोरी को तमंचे के बल पर घर से उठाकर बाग़ में ले जाकर चार दिन तक सामूहिक दुष्कमज़् किये जाने का मामला सामने आया है।
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25 मई 2017– ग्रेटर नोएडा के जेवर थाना क्षेत्र में हाइवे पर चार गैंगरेप महिलाओं के साथ गैंगरेप की वारदात हुई। इस दौरान बदमाशों ने विरोध करने पर एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी।
25 मई 2017- झांसी जिले के समथर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 16 वर्षीय हाई स्कूल की छात्रा नेहा, नाम काल्पनिक ने चार युवकों पर अपहरण के बाद गैंगरेप का आरोप लगाया।
25 मई 2017- बाराबंकी जिले के जैदपुर थाना क्षेत्र में जमीन के विवाद में दो पक्षों में जमकर मारपीट के दौरान में एक किशोरी के साथ दरिंदगी की घटना हुई। यहां हैवानों ने किशोरी के नाजुक अंग में डंडा डाल दियाए इससे उसकी हालत बेहद नाजुक हो गई।
26 मई 2017 – इलाहाबाद के घूरपुर थाने क्षेत्र में जसरा ब्लॉक के पास दबंगों ने एक नाबालिग लडक़ी को घर से उठाकर गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया।
28 मई 2017- रामपुर जिले में अपने दोस्त के साथ घूमने गई दो लड़कियों से सरेराह छेड़छाड़ और अश्लीलता का एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वॉयरल हुआ। इसके बाद पुलिस ने 14 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर करीब एक दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
30 मई 2017- फि र से रामपुर जिले में फि र एक युवती को परचून की दुकान पर छेड़छाड़ के बाद सरेराह रास्ते से अपहरण कर जंगल में खींचकर रेप की कोशिश का मामला प्रकाश में आया।
क्या कहते हैं पुलिस के आंकड़े?
भले ही यूपी में लगातार रेप, छेड़छाड़ और गैंगरेप की घटनाएं बढ़ रही हों लेकिन पुलिस आपराधिक मुकदमें दर्ज करने में भी खेल कर रही है। यूपी पुलिस के आंकड़ों में अगर बात मई महीने 1-30 मई 2017 की जाये तो यूपी के सभी जोन में कुल 113 बलात्कार के केस दर्ज हुए हैं।
इनमें आगरा में 31, इलाहबाद में 9, बरेली में 9, गोरखपुर में 2, कानपुर में 15, लखनऊ में 10, मेरठ में 34 और वाराणसी में 3 रेप ( यह आंकड़े जोन के हिसाब से) पंजीकृत हैं।

Post Author: Sanjay Srivastava

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