आपसे बात करने लिए आई है कुसुमा

                                     कुसुम खिलाने को कुसुमा है आई,
                                    मां ,बहनाें ,बेटियों की सखी बन छाई,
                                    बांट हमारे दर्द को हौसला ये दे जाएगी,
                                   नई इबारत हम नारियों की कुसुमा लिख जाएगी.
आपका इंतजार खत्म हुआ. महिलाओं की बात करने, उनके मुद्दों को धार देने और आप से बात करने के लिए http://kusumaa.com अब आपके सामने है. आज इस वेबसाइट का शुभारंभ दुनियोदयधर्मा फाउंडेशन की संस्थापक व सचिव अल्पना सिंह ने किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि जब हम आधी आबादी की बात करते हैं तब महिला ही जेहन में आती है, पर वक्त आ गया है, कि अब, जब हम आधी आबादी की बात करें तो खुद ब खुद हमारे साथी, पुरूष खुद को देख सकें, सोच सके कि बात हमारी ही हो रही है, तभी आधी आबादी और आधी आबादी मिलकर पूरी आबादी, एक बेहतर, समाज एक सशक्त माहौल बना सकेंगे.सशक्त होने का मतलब मनमर्जी से जीना सामाजिक रीतियों को तोड़ कर लोगों का अनादर करके अच्छी बुरी ख्वाहिशें पूरी करने का नहीं है. इसका तो सीधा मतलब भीतर से स्वयं को ताकतवर बनाना है.
 
मेरी नजर में महिला सशक्तिकरण का सही अर्थ है स्त्री को एक ऐसा मौहाल देना जहां वो अपने जिंदगी के फैसले आजादी व पूरे सम्मान के साथ ले सके. ये गर्व करने की बात हैं कि महिलाओं ने खुद को बदलना शुरू कर दिया है एक हद तक बदल भी लिया है। अब आधी आबादी (जो उस तरफ है) उसे अपनी सोच बदलनी है, हमें चुनौती न समझें अपना साथी समझ, जरूरत समझ हमारे साथ चले, वो आत्मविश्वास दे वो समाज दे जहां निर्भीक निडर आपके साथ हमारे लिए, आने वाली पीढ़ियों के लिए हम अपना योगदान देते हुए एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकें   मेरी शुभकामनाएं कुसुमा के साथ हैं…
वेब साइट के बारे में :
एक ऐसी बेव साइट, जो सिर्फ और सिर्फ उस खूबसूरत बला के लिए बनी है जो मां है, पत्नी है, बेटी है, बहू है, दो परिवार के बीच का सेतु है, परंपरा है और कुछ हद तक अपना-आप तलाशती सृष्टि की अदभुत रचना है. आत्मनिर्भरता उसकी चाहत है तो आकाश छूती आजाद ख्याली भी संस्कारों की डोर से बंधी है. सेक्स सिंबल से परे एक ऐसी औरत भी है, जो ग्लैमर्स चेहरे वाली नहीं, पर बेलौस मोहब्बत की खान है, हौसलों की उड़ान तो त्याग और समझौते की मूर्ति भी हैं.
 
ऐसी ही महिलाओं को लिए http://kusumaa.com अपने इस कैनवास के जरिए, ’उनकी’ जिंदगी की आड़ी-तिरछी लाइनों से साकार रूप देने का प्रयास करने जा रहा है. प्रकृति की इस सुंदर कृति को इस डिजिटल मैंगजीन में आप विभिन्न शेड्स में देखेगेंण् ’यू एंड आई’ के तहत हम महिला प्रधान मुद्दों की समीक्षा आपकी टिप्पणी के साथ करेंगे तो ’आई बिलीव’ के जरिए किसी सफल महिला की कहानी उसकी जुबानी सुनेंगेण् हमारा ’गेस्ट’ कालम हर उस महिला के लिए है जो जीवन को देखने का नजरिया आप तक पहुंचाने को उत्सुक है.  इसके अतिरिक्त साहित्य-कला, परिवार, फैशन, मंनोरंजन, राशिफल और कानूनी सलाह पर भी विभिन्न आलेख उपलब्ध है.

Post Author: Sanjay Srivastava

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