video- विवाहिता की मौत पर परिजनों से चील-कौव्वों की तरह शव छीनती रही खाकी

योगी राज में मौत के बाद भी सीएचसी में मयस्सर नहीं हो सका स्ट्रेचर…

बयानवीर चिकित्सा मंत्री, सच्चाई जानना हो तो जाएं गांव की ओर

भगवान बनने की नौटंकी करने वाले डॅाक्टर तमाशबीन बन देखते रहें मामला

पिन्टू सिंह

रसड़ा,बलिया।

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद भी जहां गोरखपुर में बीमारी से बच्चों के मरने का सिलसिला नहीं थम रहा,वहीं सरकारी चिकित्सालयों में शानदार चिकित्सा व्यवस्था की बढ़चढ़ कर बखान करने वाले चिकित्सा मंत्री की कलई खुलने लगी है। प्रधानमंत्री कहते हैं गांव की ओर जाकर वहां विकास की राह तैयार करें। लोगों को चिकित्सा,शिक्षा,बिजली सहित सभी मूलभूत सुविधा मुहैया करायें। बजट तो करोड़ों-अरबों का स्वीकृत किया गया लेकिन आज भी गांव के चिकित्सालयों की स्थिति बदत्तर दिखती है। मरीज की जिंदा है तो उसे बेड मयस्सर नहीं होता,मौत होती है तो उसे बाहर तक लाने के लिये स्ट्रेचर नसीब नहीं होता…। आखिर कैसे मान लिया जाये कि भाजपा सरकार विकास की राह पर है…। ये तो तय है कि इस सरकार में भी अफसर,डॉक्टर और नौकरशाह का काकटेल जमकर लूट रहा है, और मारा जा रहा है बेचारा गरीब और उसकी गरीबी…।

 


एक बानगी बलिया के करीब रसड़ा के सीएचसी का दिखाना चाहेंगे,जहां एक विवाहिता की मौत हो जाती है। उसे हॉस्पिटल के अंदर ले जाने के लिये स्ट्रेचर नहीं मिला। परिजनों ने जली हुई महिला को चारों ओर से चादर में लपेट कर हॉस्पिटल के अंदर ले जाना पड़ा। भगवान बनने की नौटंकी करने वाले चंद डॉक्टर तमाशबीन की तरह सब कुछ देखते रहें लेकिन किया कुछ भी नहीं। खाकी भी वहां मौजूद थी लेकिन वो परिजनों की बाहों में चादरों के बीच झूल रही बेटी के शव को चील-कौव्वों की तरह छीनने के लिये पूरी ताकत लगा रहे थें। पुलिस मामला को दबाने के लिये किसी तरह शव को अपने कब्जे में लेना चाहती थी। लोग-बाग तमाशबीन बनकर परिजनों की चित्कार और खाकी वालों की बेहयई का मजा ले रहे थें। कोई आगे नहीं बढ़ रहा था,कि कौन खाकी से पंगा ले। इसी घटिया सोच की वजह से कायरों की जमात बढ़ती जा रही है।

बताते दें कि रसड़ा के सरदासपुर गांव मे जयप्रकाश पासवान के पुत्र विजय पासवान का विवाह गाजीपुर जनपद के करीमुद्दीनपुर स्थित गंधपा गांव के रामगहन की पुत्री नीलम पासवान के साथ 15 मई 2015 को हुई थी। तभी से नीलम अपने ससुराल रहती थी। संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की सूचना मिलते ही नीलम के पिता रामगहन व उसकी मां सविता देवी सहित काफ ी लोग वहां पहुंचे। गुरूवार को नीलम के शव को लेकर कन्या पक्ष के लोग रसड़ा कोतवाली ले आये जहां उन्होंने ससुराल वालों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हंगामा खड़ा कर दिया। पुलिस तत्काल शव को सीएचसी रसड़ा ले आयी लेकिन सीएचसी में स्ट्रेचर नहीं मिला। परिजनों ने चादर में पड़ी अपनी बिटिया को उठाकर अंदर की ओर भागे। इस उम्मीद से की उनकी लाडली की सांसे वापस लौट आये। चारो तरफ परिजनों की चित्कार और डॉक्टरों की बेहयाई दिख रही थी। मौके को भांप पुलिस किसी तरह शव को अपने कब्जे में लेकर उसका पंचनाम कराया। उसके बाद पोस्टमार्टम के लिए बलिया भेज दिया गया। चिकित्सा मंत्री हर बार बयान देते हैं कि विकास गांव में देखने को मिलेगा,चिकित्सालयों में दवाओं से लेकर उपकरणों की कमी नहीं होगी।

गांव वालों को अब इलाज के लिये शहर के निजी चिकित्सालयों की ओर नहीं भागना पड़ेगा। बयानवरी मंत्री जी से यही कहना चाहूंगा कि यदि आपलोग बजट स्वीकृत करते हैं तो खुद गांव के सीएचसी जाकर हालात देखें। बजट तो बड़े डॉक्टरों,ठेकेदारों और शासन में बैठे नौकरशाह डकार गये हैं। विकास हुआ है लेकिन गांव का नहीं आपके कमीशनखोरों का…। कभी कागजों पर ओ.के. दिखाने वाले जगह पर जाकर देखें तब शायद आपको सच्चाई पता चले। सबका साथ सबका विकास कहने वाली सरकार को दिखाना चाहते हैं कि दहेज के दानवों ने एक विवाहिता को बली चढ़ा दी। लेकिन, उसे सीएचसी में स्ट्रेचर मयस्सर नहीं हुआ। उसके शव को कभी पुलिस तो कभी घर वाले बिना स्ट्रेचर के छिना- झपटी करते दिखें। क्या यही है सबका साथ, सबका विकास। मरने के बाद भी स्टे्रचर नहीं मिला…

Post Author: Sanjay Srivastava

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